गुरु केवल ज्ञान नहीं देता, संस्कार भी देता है- प्राचार्य

Published by :Kumar Ashish
Published at :10 Jul 2025 7:20 PM (IST)
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गुरु केवल ज्ञान नहीं देता, संस्कार भी देता है- प्राचार्य

गुरु केवल ज्ञान नहीं देता, संस्कार भी देता है- प्राचार्य

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गुरु-शिष्य परंपरा: भारतीय संस्कृति का आधार ” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी मधेपुरा. भूपेंद्र नारायण मंडल वाणिज्य महाविद्यालय में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर “गुरु-शिष्य परंपरा: भारतीय संस्कृति का आधार ” विषय पर सेमिनार का आयोजन गुरुवार को किया गया. यह कार्यक्रम महाविद्यालय परिवार द्वारा भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं को पुनर्स्मरण कराने व आधुनिक शिक्षा प्रणाली में गुरु-शिष्य संबंधों के महत्त्व पर विमर्श के लिए आयोजित किया गया था. कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ संजीव कुमार ने की. उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा न केवल भारत की सांस्कृतिक पहचान है, बल्कि यह हमारी सभ्यता का आधार स्तंभ है. उन्होंने कहा कि “आज जब शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और तकनीक हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है, ऐसे समय में गुरु और शिष्य के मध्य पारंपरिक भावनात्मक, नैतिक व बौद्धिक संबंध को बनाए रखना और भी अधिक आवश्यक हो गया है. गुरु न केवल ज्ञान का स्रोत होता है, बल्कि वह चरित्र, जीवन दृष्टि और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी मार्गदर्शन करता है. डॉ कुमार ने प्राचीन भारत की शिक्षा पद्धति का उल्लेख करते हुये तक्षशिला, नालंदा, और विक्रमशिला जैसे विश्वप्रसिद्ध विश्वविद्यालयों की चर्चा की. उन्होंने कहा कि भारत की इस महान परंपरा में गुरु केवल विषय विशेषज्ञ नहीं, अपितु जीवन के संपूर्ण मार्गदर्शक रहे हैं. राम और विश्वामित्र, कृष्ण और संदीपनि, अर्जुन और द्रोणाचार्य, चाणक्य और चंद्रगुप्त जैसे अनेक उदाहरण भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य संबंधों की अमर गाथा प्रस्तुत करते हैं. डॉ कुमार ने कहा कि आधुनिक युग में शिक्षा का व्यवसायीकरण हो गया है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि गुरु केवल ज्ञान नहीं देता, वह संस्कार देता है, आत्मा को जाग्रत करता है और राष्ट्र निर्माण की नींव रखता है. वहीं डॉ सत्येन्द्र कुमार ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा केवल भारतीय संस्कृति की विशेषता नहीं, बल्कि इसकी आत्मा है. यह परंपरा पीढ़ियों को जोड़ती है, संस्कार देती है और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत बनाती है. डॉ अरुण कुमार ने गुरुकुल परंपरा और वर्तमान समय की शिक्षा प्रणाली की तुलनात्मक विवेचना करते हुए कहा कि आज भले ही भौतिक सुविधाएं बढ़ी हों, लेकिन संबंधों की आत्मीयता और गुरु के प्रति आदर भाव में कमी आयी है, जो चिंता का विषय है. अर्थपाल डॉ कमलेश कुमार ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और छात्रों को धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया. मौके पर डॉ अर्चना सहाय, डॉ शंभू राय, डॉ प्रभाकर कुमार, डॉ प्रियंका कुमारी, डॉ प्रेम सुंदर प्रसाद, डॉ विनोद कुमार मंडल, डॉ कुमार ऐश्वर्य, गजेंद्र कुमार, प्रभात पंडित, सुजीत कुमार, शशि कुमार, अरविन्द कुमार, वकिल यादव, रोमन कुमार, विमल कुमार, प्रेम कुमार, प्रवीण कुमार, चंदन कुमार आदि मौजूद थे.

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