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डॉ अंबेडकर केवल दलितों के मसीहा नहीं, बल्कि पूरी मानवता के थे उद्धारक : कुलपति

Updated at : 14 Apr 2025 6:56 PM (IST)
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डॉ अंबेडकर केवल दलितों के मसीहा नहीं, बल्कि पूरी मानवता के थे उद्धारक : कुलपति

डॉ अंबेडकर केवल दलितों के मसीहा नहीं, बल्कि पूरी मानवता के थे उद्धारक : कुलपति

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मधेपुरा. भारतरत्न डॉ भीमराव आंबेडकर बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे. वह एक अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री, धर्मशास्त्री व दार्शनिकों के साथ-साथ एक समाज-सुधारक, राजनेता, कानूनविद व संविधान-विशेषज्ञ भी थे. हम उनके विचारों व कार्यों को अपने जीवन में उतारें, यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी. यह बात बीएनएमयू कुलपति प्रो विमलेंदु शेखर झा ने कही. वह सोमवार को बाबा साहब डॉ भीमराव आंबेडकर की जयंती समारोह में उद्घाटनकर्ता सह मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे. कार्यक्रम का आयोजन ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय मधेपुरा में राष्ट्रीय सेवा योजना व राष्ट्रीय कैडेट कोर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया. केवल दलितों के मसीहा नहीं थे डॉ आंबेडकर कुलपति ने कहा कि डॉ आंबेडकर केवल दलितों के मसीहा नहीं, बल्कि पूरी मानवता के उद्धारक थे. उनका जीवन समाज के सभी शोषितों, पीड़ितों, वंचितों व बहिष्कृतों के लिए समर्पित था. कुलपति ने कहा कि डॉ आंबेडकर का व्यापक मानवतावादी चिंतन स्वतंत्र भारत के संविधान में परिलक्षित होता है. उन्होंने संविधान के माध्यम से भारत के सभी लोगों के लिए स्वतंत्रता, समानता व बंधुता का आदर्श प्रस्तुत किया है. यह संविधान चंद लोगों के लिए नहीं है, सबों के लिए है. यह सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक न्याय की गारंटी देता है. स्वतंत्रता के पूर्व भी उन्होंने श्रम-सुधार, महिला-अधिकारिता व बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के लिए अभूतपूर्व कार्य किया. कुलपति ने कहा कि डॉ आंबेडकर ने अपनी योग्यता के दम पर कठिन परिस्थितियों में संघर्ष करके उच्च शिक्षा हासिल की और पूरी दुनिया में अपना एक अपूर्व स्थान बनाया. वह आज दुनिया में ज्ञान के प्रतिक तथा विश्व-रत्न के रूप में समादृत है़ं. कुलपति ने कहा कि डॉ आंबेडकर हम सबों के हैं और उनके विचारों व कार्यों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी हम सबों की है. हमें इनको जाति, धर्म व क्षेत्रीय संकीर्णताओं में नहीं बांधना चाहिये. बदलना होगा समाज की मानसिकता कुलपति ने कहा कि जातिवाद व छुआछूत मात्र भौतिक बात नहीं है, बल्कि यह एक मानसिकता है. हमें इसे दूर करने के लिए आगे आना होगा. सबों को मिलाकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए कार्य करना होगा. हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ वीणा कुमारी ने कहा कि डॉ आंबेडकर का जीवन मानवाधिकार के लिए समर्पित था. उन्होंने ””हमें शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो”” का संदेश दिया है. बीएनएमयू के परिसंपदा पदाधिकारी शंभू नारायण यादव ने कहा कि डॉ आंबेडकर का चिंतन व्यापक है. उन्होंने संपूर्ण समाज व राष्ट्र के विकास के लिए कार्य किया है. आंबेडकर के विचार पूरी दुनिया में हो रहा है लोकप्रिय कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय प्राचार्य प्रो कैलाश प्रसाद यादव ने कहा कि 21वीं सदी वास्तव में डॉ आंबेडकर की सदी है. इस सदी में इनके विचार पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो रहे हैं. मंच संचालन करते हुए दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ सुधांशु शेखर ने कहा कि डॉ आंबेडकर एक प्रखर राष्ट्रवादी व मानवता के पुजारी थे. धन्यवाद ज्ञापन करते हुए अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ मनोज कुमार यादव ने कहा कि डॉ आंबेडकर के विचारों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है. मौके पर सीनेटर डॉ रंजन यादव, शोधार्थी राहुल पासवान व राजहंस राज ने भी विचार व्यक्त किये. कार्यक्रम के आयोजन में एनसीसी पदाधिकारी ले गुड्डु कुमार, नारायण ठाकुर, मनीष कुमार, सौरभ कुमार चौहान, सुनील कुमार, वाणी कुमारी, खुशी कुमारी, शुक्रिया कुमारी, मुनचुन कुमारी,शालू कुमारी, प्रीति कुमारी, साक्षी प्रिया, सोनम कुमारी, वंदना कुमारी, अभिनव रमन, सत्यम कुमार, राजीव कुमार, हिमांशु कुमार, आलोक कुमार, गौरव कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Kumar Ashish

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By Kumar Ashish

Kumar Ashish is a contributor at Prabhat Khabar.

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