साइबर ठगी के शिकार हो रहे लोग

Published at :27 Feb 2017 6:25 AM (IST)
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साइबर ठगी के शिकार हो रहे लोग

परेशानी. पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराने से भी नहीं निकल रहा नतीजा मोबाइल को डिजिटल क्रांति का हथियार बनाया जा रहा है, लेकिन आम आदमी इस मोबाइल के जरिये प्रतिदिन ठगी का शिकार हो रहे हैं. विडंबना है कि इस तरह की चोरी व ठगी की शिकायत पर कोई कार्रवाई भी नहीं होती़ मधेपुरा […]

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परेशानी. पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराने से भी नहीं निकल रहा नतीजा

मोबाइल को डिजिटल क्रांति का हथियार बनाया जा रहा है, लेकिन आम आदमी इस मोबाइल के जरिये प्रतिदिन ठगी का शिकार हो रहे हैं. विडंबना है कि इस तरह की चोरी व ठगी की शिकायत पर कोई कार्रवाई भी नहीं होती़
मधेपुरा : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के दौर में इस समय में देश में करीब 98 करोड़ मोबाइल है़ इस मोबाइल को ही इस डिजिटल क्रांति का हथियार बनाया जा रहा है, लेकिन आम आदमी इस मोबाइल के जरिये प्रतिदिन ठगी का शिकार हो कर अपनी मेहनत की कमाई लाखों रुपये खुद ही चोरों के खाते में डाल रहे हैं, तो कहीं चोर किसी और के खाते से ऑनलाइन भुगतान कर रहे हैं. विडंबना है कि इस तरह की चोरी और ठगी की शिकायत पर कोई कार्रवाई ही नहीं होती़
चोर सीनाजोरी कर फिर से नये शिकार में लग जाते हैं. अधिवक्ता रघुवंश प्रसाद सिंह कहते है डिजिटल ठगी के शिकार होने के बाद आदमी की हालत सांप छुछुंदर सरीखी हो रही है. एक तो कम जानकारी के कारण लोग ठगे जाते है. ऊपर से पुलिस कहती है साइबर क्राइम का मामला है. पटना में केस दर्ज होगा.
केस स्टडी – 1 : जनवरी 2017 को वरिष्ठ नागरिक सह अधिवक्ता रघुवंश प्रसाद सिंहे के घर से एटीएम व नकद राशि की चोरी हुई. उसके अगले दिन उनके एटीएम से स्वेएप कर आठ हजार रुपया भी निकाल लिया गया. बुजुर्ग नागरिक पासबुक की छाया प्रति लेकर थाना पहुंचे. वहां बताया गया कि साइबर क्राइम थाना में मामला दर्ज होगा, यह पटना में है.
केस स्टडी – 2: सिंहेश्वर में अपनी रिश्तेदारी में पहुंचे सुधांशु वर्मा को 9006025487 नंबर से एक कॉल आया. कॉल करने वाली लड़की ने अपना नाम पूजा अग्रवाल बताया. उसे खुद को मुंबई एसबीआइ डेबिट कार्ड विभाग से बताया. लड़की ने कहा कि आपके डेबिट कार्ड की वैद्यता समाप्त हो रही है. नया कार्ड जारी करने के लिए डेबिट कार्ड पर अंकित 16 डिजिट का नंबर बताने कहा. इसके बाद एकाउंट से संबंद्ध मोबाइल नंबर पर वैकल्पिक कोड आया. इसे बताते ही सुधांशु वर्मा के खाते से पंजाब बिजली बोर्ड को भुगतान किये जाने की सूचना एसएमएस के जरिये उनके मोबाइल पर आयी. इसके बाद तो उनके होश उड़ गये. वह जब तक बैंक से संपर्क कर अपना खाता बंद कर पाते तब तक उनके खाते से 50 हजार की राशि का भुगतान पंजाब बिजली बोर्ड को किया जा चुका था. इस बारे में उन्होंने पुलिस से संपर्क किया, लेकिन इस मामले में पुलिस ने हाथ खड़े कर दिये. ट्रैकिंग साॅफ्टवेयर के अनुसार यह नंबर बिहार-झारखंड का ही है. सुधांशु अब भी उस नंबर पर कॉल करते हैं और उधर से मजाक उड़ाया जाता है.
केस स्टडी – 3: मधेपुरा न्यायालय में कार्यरत युगलकिशोर मेहता जिला मुख्यालय में पुरानी बाजार के निवासी है. गत वर्ष 18 जून को उनके पास 9708314856 नंबर से एक कॉल आया. फोन करने वाले ने अपना परिचय एटीएम एक्जीक्यूटिव के तौर पर दिया और उन्हें उनके डेबिट कार्ड की अवधि समाप्त होने की बात कही. नये एटीएम कार्ड जारी? करने के लिए उनसे कार्ड पर अंकित नंबर बताने कहा. मोबाइल पर आये वैकल्पिक कोड भी पूछा और उनके खाते से करीब 47 हजार रुपये कहीं और भुगतान कर दिया गया. यह भुगतान पेटीएम डॉट कॉम के जरिये किया गया था. वहीं दूसरे दिन युगल किशोर मेहता की पत्नी के मोबाइल पर उसी नंबर से वैसा ही फोन आया. कॉल युगल ने ही रिसीव किया. ठगे जाने वाले व्यक्ति की लाचारगी देखिये कि युगल ने उससे कहा कि यार फिर मेरा ही नंबर मिला तुम्हे. इस पर ठग ने सॉरी कहते हुए फोन काट दिया़ नंबर अब भी एक्टिव है़
केस स्टडी -4: गत वर्ष 22 जून को मधेपुरा में पदस्थापित वरीय उपसमाहर्ता कृष्णमोहन प्रसाद को 9507571614 नंबर से ऐसा ही एक फोन आया़ उनके खाते से 57 हजार से अधिक रुपये का भुगतान कर दिया गया़ जब तक वह समझ पाते तब तक उनके मोबाइल पर खाते से राशि निकासी होने संबंधी एसएमएस आ चुका था़ उन्होंने सदर थाना में प्राथमिकी भी दर्ज करायी लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला है.
खरीदारी कर ली
सेवानिवृत्त प्रधान सहायक शिवशंकर प्रसाद से ठगी कर एटीएम से 75 हजार एक सौ 40 रुपया निकाल लिया गया. त्वरित कार्रवाई कर एटीएम तो बंद करा लिया गया, लेकिन साइबर थाना में ऑनलाइन कंप्लेन दर्ज करने के बावजूद एफआइआर का नंबर उन्हें नहीं मिल सका. खास बात यह है कि इस पूरी राशि की निकासी बाजार में खरीदारी कर स्वेएप के माध्यम से की गयी है. इसके अलावा कई लोग भी इसके शिकार हुए हैं.
इतनी लाचार है पुलिस
सवाल यह है कि जब सब कुछ डिजीटल हो गया है तो इसके लिए गांवों और कसबों में क्या तैयारी की गयी है़ इस तरह की ठगी करने वाले आराम से घूम रहे हैं और हर दिन नये लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं. नंबर एक्टिव हैं ऐसे मामलों में पुलिस हाथ खड़े कर रही है़
प्रशिक्षण की जरूरत
इस तरह की ठगी का गांवों और शहर भी मायने नहीं रखता़ ऊपर के तीनों उदाहरण में ठगी का शिकार होने वाले लोग पूर्ण शिक्षित हैं. ऐसे में यह जरूरी है कि जोरदार प्रचार अभियान चला कर लोगों को डिजीटल प्रशिक्षण दिये जाने की जरूरत है़
मतदाता सूची में करें सुधार
निर्देश. एसडीओ ने अधिकािरयों व बीएलओ के साथ की बैठक
मतदाता सूची में शुद्धीकरण के समय सतर्कता बरतने की जरूरत है. वार्ड नंबर पांच के 35 मतदाताओं का नाम दस में जोड़ा गया है, जो परिसीमन के हिसाब से गलत है.
मुरलीगंज : प्रखंड परिसर अवस्थित कौशल विकास केंद्र में शनिवार को एसडीओ संजय कुमार निराला ने अधिकारियों व बीएलओ के साथ मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर बैठक की. जिसमें अनुमंडल पदाधिकारी ने सभी वार्डों की एक-एक कर मतदाता सूची में गलतियों को सही करने व वार्ड नंबर एक से लेकर 15 तक सभी वार्ड में कुछ नये नाम जोड़ने के भी प्रस्ताव है. वार्ड नंबर पांच व नंबर दस की सबसे बड़ी समस्या यह थी कि वार्ड नंबर पांच के 35 मतदाताओं का नाम दस में जोड़ा गया है. जो कि परिसीमन के हिसाब से गलत बताया गया. वही दस के 154 मतदाताओं का वार्ड नंबर पांच में जोड़ दिया गया है , जो कि गलत मतदाता सूची में अंकित है.
इस आशय पर विशेष रूप से एसडीओ संजय कुमार निराला ने बताया है कि इसे शुद्ध कर लिया जायेगा और शुद्धिकरण के समय सतर्कता के साथ इस पर नजर रखी जायेगी और भी बहुत से वार्ड में इस तरह की समस्या थी. जिस पर उन्होंने सुझाव दिया कि वह सब सुधार कर लिया जायेगा. मौके पर भूमि सुधार उपसमाहर्ता रवि शंकर शर्मा, बीडीओ अनुरंजन कुमार, सीओ जयप्रकाश स्वर्णकार, कार्यपालक दंडाधिकारी सह मतदाता पुनरीक्षण पदाधिकारी नगर पंचायत मुरलीगंज महेश्वर प्रसाद रजक, नगर पंचायत के अध्यक्ष सर्जना सिद्धि, वार्ड पार्षद श्वेत कमल उर्फ बौआ जी, राम जी साह, राजेश शर्मा, अनीता शर्मा, अरूण जायसवाल, दिनेश मिश्र, राहुल मिश्रा, उदय कुमार कालेंद्र यादव, उपेंद्र आनंद, ललिता आनंद, सुनील कुमार, टुनटुन साह, डिंपल पासवान, मो निजाम, श्यामानंद, गौतम यादव, बब्बन मंडल आदि उपस्थित थे.
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