कलशस्थापन की सामग्री
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :01 Oct 2016 7:20 AM (IST)
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मधेपुरा . कलश स्थापना के लिए गंगाजल के साथ पंचरत्न (स्वर्ण, हीरा, पद्मराज, सप्तमृतिका, पंचपल्लव, सर्वोषधि, रक्तवस्त्र(लाल सालूक), नारियल ये सभी वस्तुएं वेद मंत्रोच्चार द्वारा मिट्टी के कलश में दिया जाना चाहिए. इसके बाद मां भगवती षोडषोपचार पूजन, दुर्गा के सभी अंगों वाहन, परिकर, नव चंडिका, नव दुर्गा, नवग्रह, दशदिक्पाल, षोडष मातृका आदि का उनके […]
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मधेपुरा . कलश स्थापना के लिए गंगाजल के साथ पंचरत्न (स्वर्ण, हीरा, पद्मराज, सप्तमृतिका, पंचपल्लव, सर्वोषधि, रक्तवस्त्र(लाल सालूक), नारियल ये सभी वस्तुएं वेद मंत्रोच्चार द्वारा मिट्टी के कलश में दिया जाना चाहिए. इसके बाद मां भगवती षोडषोपचार पूजन, दुर्गा के सभी अंगों वाहन, परिकर, नव चंडिका, नव दुर्गा, नवग्रह, दशदिक्पाल, षोडष मातृका आदि का उनके मंत्रों से आवाहन पंचोपचार, पुष्पांजलि एवं आरती सहित की जानी चाहिए. पंडित रमेश चंद्र झा ने बताया कि नवरात्र में हरेक दिन संकल्प के साथ पूजन होना चाहिए.
कन्या पूजन . उन्होंने बताया कि अष्टमी व नवमी को कन्याओं का पूजन होता है. इस दौरान पूजन के साथ-साथ कन्याओं को भोजन कराया जाता है. इसके लिए कन्याओं की संख्या नौ हो एवं इनकी उम्र दो से 10 वर्ष हो. इसे उत्तम माना जाता है.
जयंती धारण करने की विधि . कलश स्थापना के समय जौ और गेहूं कलश के नीचे गंगा मिट्टी में रखा जाता है. जो कलश व प्रतिमा विसर्जन के समय तक अंकुरित हो जाता है. इसे ही जैयंती कहा जाता है. इसे मंत्रोच्चारण के साथ कान में धारण किया जाता है.
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