जलजमाव को ले डीएम का घेराव

Published at :29 Sep 2016 4:29 AM (IST)
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जलजमाव को ले डीएम का घेराव

पानी जमा होने से घरों की दीवारों में पड़ने लगी हैं दरारें सिंहेश्वर : प्रखंड क्षेत्र में इफको किसान भवन के उद्घाटन समारोह से लौट रहे डीएम मो सोहैल जैसे ही लालपुर – सिंहेश्वर रोड स्थित लक्ष्मीनियां टोला के समीप पहुंचे वहां की स्थानीय महिलाओं ने उनका घेराव कर दिया. ग्रामीण महिलाओं ने डीएम को […]

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पानी जमा होने से घरों की दीवारों में पड़ने लगी हैं दरारें

सिंहेश्वर : प्रखंड क्षेत्र में इफको किसान भवन के उद्घाटन समारोह से लौट रहे डीएम मो सोहैल जैसे ही लालपुर – सिंहेश्वर रोड स्थित लक्ष्मीनियां टोला के समीप पहुंचे वहां की स्थानीय महिलाओं ने उनका घेराव कर दिया. ग्रामीण महिलाओं ने डीएम को क्षेत्र में जलमाव की समस्या से अवगत कराया. इसके बाद डीएम ने सीओ से पानी निकलवाने की बात कही. हालांकि ग्रामीणों स्पष्ट कहा कि सीओ जयजय राम को दर्जनों बार सूचना दी गई है लेकिन उनके कान पर जूं नहीं रेंगी. ग्रामीणों का कहना था कि विगत 15 दिनों से उनके घरों में खाना भी नहीं बनाया जा रहा है. वे लोग दूसरे घर में रहते हैं. डीएम ने जल्द ही समस्या के समाधान का आश्वासन देकर घेराव समाप्त कराया.
रामपट्टी गांव से त्राहिमाम संदेश
प्रखंड मुख्यालय से सटे रामपट्टी गांव में जलजमाव की भारी समस्या हो गयी है. विगत 15 दिन से पूरा गांव परेशान हैं. कई घरों में घुटना भर पानी लगा है. घरों में लगतार पानी रहने से कई घर गिर चुके है तो कुछ गिरने के कगार पर है. पक्के मकान कि दिवारें में दरारे पड़ने लगी है. वह कभी भी गिर सकता है. पानी की निकासी नहीं होने के कारण गांव के लोग परेशान है. दूसरी तरफ रामपट्टी से केटावन गांव जाने के रास्ते जल-जमाव होने के कारण पुलिया डुब गयी है. परमाने नदी पूरे उफान पर है. इस कारण पानी रामपट्टी की ओर बड़ी तेजी से बढ रहा है. हालांकि ग्रामीणों ने आपस में मिलकर लगभग पचास बोरी में मिट्टी भरकर पानी को रोकने का काम किया है. लेकिन अगर स्थल पर युद्ध स्तर पर काम नहीं किया गया तो पानी की तेज गति के कारण बोरा ध्वस्त हो जायेगा और गांव जलमग्न हो जायेगा.
किसान रोने को हैं मजबूर
प्रखंड क्षेत्र में वर्षा व नदी के पानी ने भारी क्षति पहुंचायी है. कहीं खेतों में पानी घुटने भर है तो कहीं कमर भर. खेतों में लगे धान का पता तक नहीं चल रहा है. वहीं केले के खेत में कमर भर पानी रहने के कारण पेड़ गल कर गिर रहा है. खेती पर आश्रित रहने वाले किसान अब रोने को मजबूर है. उनकी खेती पुरी तरह नष्ट हो चुकी है और इनका दर्द देखने को किसी पदाधिकारी को समय तक नहीं है. सुखदेव यादव, पिंटू यादव, पप्पू यादव, संजय ठाकुर, सर्विस यादव, रमेश यादव, कुंदन कुमार मन्नू व अन्य ने एकजुट होकर कहा कि अगर मुखिया, सरपंच, व अन्य के द्वारा राहत का कार्य संबंधित पदाधिकारियों से नहीं करवाया गया तो उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे. वहीं ग्रामीण मो गोहल, मो इस्लाम, दिनेश यादव, देव कृष्ण यादव, जालेश्वर यादव, भागवत चैपाल, उतीमलाल, श्यामसुंदर, मोहन यादव, सर्विस यादव, धीरेंद्र यादव व अन्य ने कहा कि हमलोगों के घरों में लगभग पंद्रह दिनों से खाने पर भी आफत बनी हुई. घरों में घुटने से अधिक पानी जमा है. दूसरे के घरों में रहने को विवश है. अभी तक किसी भी प्रकार का राहत का कार्य नहीं किया गया है.
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