कमरे छह, स्कूल तीन...बहुत नाइंसाफी है
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 May 2016 5:07 AM (IST)
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हद है. हनुमान नगर चौड़ा में उर्दू मध्य विद्यालय के परिसर में संचालित हो रहे तीन स्कूल सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लाख प्रयास कर लें, लेकिन स्कूलों में भवन की कमी के कारण कई विद्यालयों में एक साथ कई कक्षाएं संचालित की जाती हैं. यहां तक की एक ही विद्यालय परिसर में […]
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हद है. हनुमान नगर चौड़ा में उर्दू मध्य विद्यालय के परिसर में संचालित हो रहे तीन स्कूल
सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लाख प्रयास कर लें, लेकिन स्कूलों में भवन की कमी के कारण कई विद्यालयों में एक साथ कई कक्षाएं संचालित की जाती हैं. यहां तक की एक ही विद्यालय परिसर में तीन विद्यालय संचालित हैं.
मधेपुरा : सदर प्रखंड के महेशुआ पंचायत स्थित हनुमान नगर चौड़ा में उर्दू मध्य विद्यालय के परिसर में नवसृजित प्राथमिक विद्यालय व मध्य विद्यालय का वर्ग संचालन किया जाता है. इन तीनों विद्यालयों को मिला दें तो लगभग साढ़े सात सौ बच्चे नामित हैं. इतने बच्चों के लिए खेल-कूद का परिसर नहीं है और न ही पीने को स्वच्छ पानी.
स्कूल परिसर में बहाया जाता है गंदा पानी. स्कूल परिसर में लगाये गये चापाकल का इस्तेमाल स्कूली छात्रों के अलावे स्थानीय ग्रामीण भी करते हैं. जिसके कारण परिसर के पास काफी मात्रा में पानी जमा हो जाता है. स्कूल प्रबंधन की ओर से जमा पानी को ढ़क्कने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है. जिसके कारण पानी चारों ओर फैला हुआ है. स्कूल परिसर में फैले इस गंदे पानी पर तरह-तरह के कीटाणु अपना पांव पसार कर बच्चों को इसके प्रभाव में ला सकता है.
छह कमरों में बैठते हैं साढ़े सात सौ बच्चे. साढ़े चार कट्ठा के फैले इस विद्यालय के आस-पास मुस्लिम बाहुल क्षेत्र रहने के कारण पूर्व में उर्दू मध्य विद्यालय का ही संचालन किया जाता था. आबादी बढ़ने के साथ-साथ इसी परिसर में दो अन्य विद्यालय का संचालन प्रारंभ किया गया. वित्तीय वर्ष 2014-15 में इसी परिसर में चल रहे मध्य विद्यालय के लिए भवन निर्माण हेतु राशि भी आवंटित की गयी इससे स्कूल में कुल चार कमरें हो गये.
लेकिन इन चार कमरों में वर्ग का संचालन करना काफी मुश्किल हो रहा है. इसी परिसर में नवसृजित प्राथमिक विद्यालय का भी संचालन किया जाता है जिसमें कुल एक सौ से अधिक बच्चे है जबकि उर्दू मध्य विद्यालय में 206 बच्चे नामांकित है. कुल मिलाकर छह कमरे में 750 बच्चों को बैठाना का फी मुश्कल है ऐसे में पढ़ाई करना कितना मुश्किल होगा इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है.
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