चिंताजनक . जिले के कई इलाकों में सिंचाई के लिए किया गया बोरिंग नाकाम

Published at :13 Apr 2016 5:04 AM (IST)
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चिंताजनक . जिले के कई इलाकों में सिंचाई के लिए किया गया बोरिंग नाकाम

एक साल में 20 फीट गिरा जलस्तर इन दिनों जिले के मुरलीगंज प्रखंड क्षेत्र के किसानों में हाहाकार मचा हुआ है. बढ़ती गरमी के साथ ही उनके खेतों का जलस्तर नीचे गिरना शुरू हो गया है. खेतों में पटवन के लिए विगत साल कराया गया बोरिंग इस साल एक पटवन के बाद काम ही नहीं […]

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एक साल में 20 फीट गिरा जलस्तर

इन दिनों जिले के मुरलीगंज प्रखंड क्षेत्र के किसानों में हाहाकार मचा हुआ है. बढ़ती गरमी के साथ ही उनके खेतों का जलस्तर नीचे गिरना शुरू हो गया है. खेतों में पटवन के लिए विगत साल कराया गया बोरिंग इस साल एक पटवन के बाद काम ही नहीं कर रहा है. जलस्तर करीब बीस फीट नीचे जा चुका है. पंप सेट इन बोरिंग से पानी निकालने में असमर्थ सिद्ध हो रहा है. पूरे प्रखंड क्षेत्र के हजारों किसानों में त्राहिमाम की स्थित है.
पानी की प्रचुरता के लिए जाना जाने वाले कोसी के इस इलाके में पानी के स्तर का गिरना पूरे कोसी क्षेत्र के लिए आने वाले खतरे का संकेत है. हालांकि जिले के अन्य इलाकों में भी स्थिति इससे इतर नहीं है.
रूपेश कुमार : मुरलीगंज प्रखंड के हरिपुर कला पंचायत में है तिनकोनमा गांव. पूर्णिया जिले की सीमा इस गांव के बाद शुरू हो जाती है. यहां के किसान श्यामनंदन यादव ने अपने पूरे परिवार के साथ दस बीघे में मक्के की खेती की है. उन्होंने पिछले साल ही पटवन के लिए 65 फीट गहरी बोरिंग करायी थी. इस साल मक्का में वह एक पटवन कर चुके हैं. लेकिन दूसरे पटवन के जब उन्होंने बोरिंग से पंप सेट को जोड़ा तो पानी का एक कतरा बाहर नहीं निकला.
पहले तो उन्हें यकीन नहीं हुआ. उन्होंने एक बार फिर प्रयास किया. इस बार भी उन्हें नाकामी ही मिली. अब वह निराश हैं. उन्हें फिर से बोरिंग कराना होगा. जमीन से पानी निकालने के लिए कम से कम सौ फीट गहरा पाइप डालना होगा. इसमें काफी खर्च आयेगा. पहले से ही टूट चुकी कमर को अब दोहरे बोझ की मार झेलनी होगी.
65 फीट की बोरिंग हुई नाकाम
तिनकोनमा गांव में श्यामानंद यादव के अलावा ऐसे दर्जनों किसान किसान हैं जिनके खेतों का जल स्तर नीचे जाने के कारण बोरिंग बेकार हो गयी है. इसी गांव के सुरेश यादव, प्रवीण यादव, पुष्पेन्द्र यादव, उमेश यादव, मिथिलेश यादव, उमेश यादव आदि के खेतों की भी यही स्थिति है. ये किसान बताते हैं कि इस तरह की स्थिति पहली बार हुई है. इससे पहले कभी जल स्तर नीचे नहीं गया था. हालांकि पहले आम तौर पर 45 फीट पर ही पानी उपलब्ध हो जाया करता था. कहीं-कहीं बोरिंग फेल हुआ तो लोगों ने एहतियातन 65 फीट पर बोरिंग करायी थी. लेकिन वह भी काम न आया.
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