न कार्यालय न सुविधाएं, अग्निशमन कहां जाए

न कार्यालय न सुविधाएं, अग्निशमन कहां जाए -चिंताजनक . स्टेडियम को बना दिया अग्निशमन विभाग का कार्यालय -आवश्कता के अनुसार नहीं उपलब्ध है गाड़ी व कर्मी फोटो – मधेपुरा 7कैप्शन- बीएन मंडल स्टेडियम में खड़ी दमकल व संचालित कार्यालय इंट्रो – :::::::::मधेपुरा में खेल मधेपुरा क्रिकेट एकेडमी की स्थापना के बाद खेल पर एक सकारात्मक […]
न कार्यालय न सुविधाएं, अग्निशमन कहां जाए -चिंताजनक . स्टेडियम को बना दिया अग्निशमन विभाग का कार्यालय -आवश्कता के अनुसार नहीं उपलब्ध है गाड़ी व कर्मी फोटो – मधेपुरा 7कैप्शन- बीएन मंडल स्टेडियम में खड़ी दमकल व संचालित कार्यालय इंट्रो – :::::::::मधेपुरा में खेल मधेपुरा क्रिकेट एकेडमी की स्थापना के बाद खेल पर एक सकारात्मक बहस शुरू हुई है. जिलाधिकारी मो सोहैल ने काफी उत्साह के साथ इसका स्वागत किया और हर संभव सहायता देने की बात कही. स्थानीय खिलाड़ियों में इससे उत्साह का संचार हुआ है. लेकिन, इन सबके बीच स्टेडियम को लेकर भी चर्चाओं का दौर चल पड़ा है. जिला मुख्यालय स्थित स्टेडियम में वर्षों से अग्निशमन विभाग का कार्यालय संचालित किया जा रहा है. विडंबना है कि जहां जिले में प्रत्येक विभाग के लिए भवन का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन अग्निशमन विभाग एक कार्यालय के लिए वर्षों से प्रतीक्षारत है और स्थिति बदहाल है. विभाग जैसे-तैसे काम चला रहा है. न कार्यालय है, न ही आबादी के अनुसार गाड़ियां ही मुहैया हैं. कर्मी की भी कमी है.प्रतिनिधि, मधेपुराकोसी क्षेत्र के लिए अग्निशमन विभाग आवश्यक आवश्यकताओं में से है. वर्षा ऋतु में इंद्रदेव कुपित हुए तो तबाही और गर्मी में अग्नि देव की नजर टेढ़ी हुई तो कयामत. इस क्षेत्र की यही त्रासदी है कि बरसात में बाढ़ और गर्मी आयी तो आग से दम निकल जाता है. जैसे ही पछुवा हवा चलना शुरू होती है भयंकर अगलगी की घटनाओं का सिलसिला शुरू हो जाता है. देखते ही देखते टोले के टोले भस्म हो जाते हैं. ढिबरी, चूल्हे की आग, घूरा की आग और गेहूं की दौनी करते समय थ्रेसर या जनरेटर से निकली चिंगारी को पछुवा हवा शोला बना देती है और हर वर्ष हजारों लोग बेघर हो जाते हैं. यह कहानी हर साल की है, बस स्थान और पात्र बदल जाते हैं. ऐसे में अग्निशमन विभाग बहुत बड़ा सहारा है. — नहीं बना है अब तक कार्यालय — मधेपुरा में अग्निशमन विभाग का अपना कोई कार्यालय नहीं है. वर्षों से बी एन मंडल स्टेडियम परिसर ही दमकल विभाग का अस्थायी कार्यालय बना हुआ है. स्टेडियम के ही एक हॉल में दमकल विभाग के कर्मियों के आवास भी हैं और कार्यालय भी.–पानी भरने जाते हैं सिंहेश्वर– दमकल गाडि़यों में पानी भरने के लिए मधेपुरा जिला मुख्यालय में कोई व्यवस्था नहीं है. जिला मुख्यालय से छह किमी दूर सिंहेश्वर स्थित पीएचइडी परिसर से पानी भरना पड़ता है. मुख्यालय से सिंहेश्वर पहुंचने में 10 से 15 मिनट लगता है. — विभाग में कर्मियों का लगा है टोटासदर अनुमंडल एवं उदाकिशनुगंज अनुमंडल में कुल 36 पद स्वीकृत है, लेकिन यहां मात्र एक पदाधिकारी के साथ 20 कर्मी प्रतिनियुक्त है. जिसमें विभाग के प्रभारी श्याम सुंदर प्रसाद यादव विगत छह माह से बिहटा में प्रशिक्षण ले रहे है. विभाग के पास केवल पांच गाडि़यां हैं. तीन गाड़ी के टैंक की क्षमता 5 हजार लीटर है और दूसरी गाड़ी के टैंक की क्षमता ढाई हजार लीटर है. — विभाग को न भूमि है और न भवन –अग्निशमन विभाग के तत्कालीन जिला प्रभारी पदाधिकारी ने दुरभाष पर बताया कि 26 मार्च 2015 को पटना में अपर पुलिस महानिदेशक एसके भारद्वाज की अध्यक्षता में बैठक हुई थी. इस बैठक में उन्होंने आवेदन देकर मधेपुरा में अग्निशमन की व्यवस्था दुरूस्त करने की मांग की थी. उन्होंने बताया कि विभाग के पास न भूमि है और न भवन है. ईंधन, पानी तथा चालक नहीं के बराबर हैं. — गाड़ी तीन, चालक एक– अग्निशमन विभाग में चालक का अभाव इस कदर है कि सिपाही को खुद ही गाड़ी चलाना पड़ता है. मधेपुरा स्टेशन में तीन गाडि़यां हैं लेकिन केवल एक चालक पदस्थापित है. इस चालक का भी तबादला हो चुका है. यहां एक चालक के भरोसे ही यह तीन अग्निशमन वाहन खड़ी रहती है. वहीं उदाकिशुनगंज स्टेशन में मौजूद दो गाडि़यों में केवल एक चालक है. — और दो गाड़ियां पटना में — जिले में दमकल विभाग को और दो गाडि़यां आवंटित की गयी हैं. एक मुरलीगंज के लिए और दूसरी बिहारीगंज के लिए. लेकिन चालक नहीं होने के कारण ये गाडि़यां पटना के बिहटा में ही रखी हुई है. प्रभारी पदाधिकारी ने बताया कि ये दोनों गाडि़यां मिक्स टेकनोलॉजी से युक्त हैं. हालांकि मधेपुरा में पहले से ही एक मिक्स टेकनोलॉजी की गाड़ी उपलब्ध है. ये गाडि़यां ग्रामीण क्षेत्रों में लगी आग को बुझाने के लिए काफी सक्षम होती हैं. आकार में छोटी होने के कारण संकरे मार्ग पर इन्हें ले जाया जा सकता है. लेकिन चालक नहीं होने के कारण इसका उपयोग नहीं किया जाता है.– वेतन से भराते हैं डीजल –अग्निशमन विभाग का यह हाल है कि दमकल गाडि़यों में विभाग के अधिकारी और कर्मचारी वेतन के पैसे से डीजल भराते हैं. यहां प्रतिनियुक्त कर्मी बताते हैं कि वेतन के पैसे से डीजल भराया जाता है. बाद में इस बिल का भुगतान विभाग द्वारा किया जाता है. बिल भुगतान में देरी होती है तो परिवार का भरण पोषण प्रभावित हो जाता है. ——————–फायर स्टेशन – दो (मधेपुरा एवं उदाकिशुनगंज में)- कितनी दमकल गाड़ी – पांचमधेपुरा में – 3उदाकिशुनगंज में – 2
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