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उगना रे मोर कतय गेला नाटक का हुआ मंचन

Updated at : 11 Sep 2019 7:35 AM (IST)
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उगना रे मोर कतय गेला नाटक का हुआ मंचन

मधेपुरा : साहित्य अकादमी नई दिल्ली व ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय मधेपुरा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय विश्व परिवेश में मैथिली भाषा व साहित्य विषयक संगोष्ठी के समापन सत्र में सामाजिक, संस्कृतिक व साहित्य झेत्र की उन्रति में अनवरत क्रियाशील सृजन दर्पण के ऊर्जावान रंगकर्मियों ने मैथिल कोकिल महाकवि विद्यापति की रचना ‘उगना रे […]

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मधेपुरा : साहित्य अकादमी नई दिल्ली व ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय मधेपुरा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय विश्व परिवेश में मैथिली भाषा व साहित्य विषयक संगोष्ठी के समापन सत्र में सामाजिक, संस्कृतिक व साहित्य झेत्र की उन्रति में अनवरत क्रियाशील सृजन दर्पण के ऊर्जावान रंगकर्मियों ने मैथिल कोकिल महाकवि विद्यापति की रचना ‘उगना रे मोर कतय गेला’ पर बेहतरीन नृत्य नाटिका प्रस्तुत कर भाव विभोर कर दिया. शिवभक्त विद्यापति की भाव विह्वल दशा व उगना के बिछड़ जाने के बाद उन की करुण पुकार से दर्शकों की आंखें नम हो गयी. नाटक की सूत्रधार रही मुन्नी ने बताया कि प्रेम की ताकत सबसे बड़ी ताकत होती है.

यही कारण है कि विद्यापति की सेवा के लिए भगवान स्वयं सेवक बन कर उपस्थित हो गये. विद्यापति की भूमिका में युवा रंगकर्मी विकास कुमार व उगना की भूमिका में सुमन कुमार ने अभिनय दिखाया. निर्देशन पुष्पा कुमारी ने किया. मौके पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ केपी यादव, डॉक्टर अमोल राय, डॉ रविंद्र कुमार, सुशील कुमार ,मनीष कुमार आदि मौजूद थे.
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