विद्यालयों का नाम बदलना दुर्भाग्यपूर्ण, विरासत से नहीं होना चाहिए समझौता : डॉ अजय सिंह

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डॉ अजय कुमार सिंह | Prabhat Khabar Network

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बिहार विधान परिषद सदस्य डॉ अजय कुमार सिंह ने एसबीजेएस उच्च विद्यालय उदाकिशुनगंज और महर्षिमेंही उच्च विद्यालय कुमारखंड का नाम बदले जाने पर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत का अपमान है.

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मधेपुरा : बिहार विधान परिषद सदस्य डॉ अजय कुमार सिंह ने एसबीजेएस उच्च विद्यालय उदाकिशुनगंज एवं महर्षिमेंही उच्च विद्यालय कुमारखंड का नाम बदले जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है. उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जो समाज अपने पूर्वजों की धरोहर एवं विरासत की रक्षा नहीं कर सकता, इतिहास भी उसके साथ न्याय नहीं करता.

मॉडल विद्यालय बने, लेकिन ऐतिहासिक नाम न बदले

डॉ सिंह ने कहा कि महर्षिमेंही उच्च विद्यालय कुमारखंड केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि क्षेत्र की सामाजिक एवं शैक्षिक विरासत का प्रतीक है. यह विद्यालय महान संत सद्गुरु महर्षिमेंही दास के नाम पर स्थापित है. यदि सरकार विद्यालय को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित कर रही है तो यह स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन इसके लिए ऐतिहासिक नाम बदलना उचित नहीं है.

उन्होंने कहा कि उदाकिशुनगंज स्थित श्रीनाथ भुवानिया जानकी शाह उच्च विद्यालय का नाम बदलना भी दुर्भाग्यपूर्ण है. जिन दानवीरों ने समाज एवं शिक्षा के हित में अपनी संपत्ति दान की, उनके योगदान को भुलाना उनकी स्मृति का अपमान है.

पुराने नाम के साथ मॉडल विद्यालय जोड़ने का दिया सुझाव

विधान परिषद सदस्य ने सुझाव दिया कि सरकार यदि मॉडल विद्यालय की नई पहचान बनाना चाहती है तो पुराने नाम को बरकरार रखते हुए उसके साथ मॉडल विद्यालय जोड़ा जा सकता है. उदाहरण के तौर पर महर्षिमेंही उच्च मॉडल विद्यालय नाम रखा जा सकता है. इससे विद्यालय का विकास भी होगा और उसकी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान भी सुरक्षित रहेगी.

महर्षिमेंही दास से जुड़ी हैं लोगों की आस्थाएं

डॉ अजय कुमार सिंह ने कहा कि महर्षिमेंही दास करोड़ों श्रद्धालुओं के गुरुदेव हैं और उनके नाम पर स्थापित विद्यालय से क्षेत्र के लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं. उन्होंने बताया कि महर्षिमेंही दास का जन्म वर्तमान उदाकिशुनगंज अनुमंडल के मझुआ गांव में हुआ था. ऐसे महापुरुष के नाम पर स्थापित विद्यालय का नाम हटाया जाना उचित नहीं है.

उन्होंने सरकार से शिक्षा संस्थानों की ऐतिहासिक पहचान एवं महापुरुषों की विरासत को सुरक्षित रखते हुए नाम परिवर्तन के निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की.


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कौनैन वशीर

लेखक के बारे में

By कौनैन वशीर

कौनैन वशीर प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. वर्ष 2001 में अमर उजाला से पत्रकारिता की शुरुआत की. अभी उदाकिशनगंज (मधेपुरा) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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