चार दिनों से हो रही बारिश से चहुंओर त्राहिमाम

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 10 Jul 2019 4:10 AM

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मधेपुरा : बीते चार दिनों से हो रही लगातार हो रही बारिश से शहरी क्षेत्र की स्थिति नारकीय हो गयी है. शहर के सभी इलाकों में जलजमाव से लोगों में त्राहिमाम की स्थिति हो गयी है. लोगों का सड़क में चलना दूभर हो गया है. वहीं ग्रामीण इलाकों वर्षा से हर्ष का माहौल है. कृषक […]

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मधेपुरा : बीते चार दिनों से हो रही लगातार हो रही बारिश से शहरी क्षेत्र की स्थिति नारकीय हो गयी है. शहर के सभी इलाकों में जलजमाव से लोगों में त्राहिमाम की स्थिति हो गयी है. लोगों का सड़क में चलना दूभर हो गया है. वहीं ग्रामीण इलाकों वर्षा से हर्ष का माहौल है. कृषक अब अपने-अपने खेतों में धान की रोपनी की तैयारी में जुट गये है.

दूसरी तरफ लोगों ने लगातार हो रही वर्षा से बाढ़ की संभावना भी जतायी है. मालूम हो कि बाढ़ के मामले में कोसी का इलाका संवेदनशील है. मानसून में इस इलाके में हर वर्ष बाढ़ आती है. तटबंध के इलाके में लोगों को बाढ़ से ज्यादा परेशानी होती है.
बाढ़ से करोड़ों की क्षति, मौसम की मार झेलना किसानों की बन गयी है नियति : हर वर्ष आने वाली बाढ़ एक त्रासदी लाती है. इसमें करोड़ों की जान माल का नुकसान होता है. बाढ़ की वजह से हजारों की आबादी पलायन को मजबूर होती है. हालांकि बीते वर्ष सूखा की वजह से बाढ़ नहीं आयी थी.
इस वर्ष भी मौसम के जानकारों ने औसत से कम वर्षा का अनुमान लगाया है, लेकिन लगातार चार दिनों से हो रही वर्षा से बाढ़ की संभावना को बल मिला है. कोसी के किसानों को मौसम की मार वर्ष में कई बार झेलने पड़ती है. कभी बाढ़ तो कभी तूफान, कभी सूखा. ऐसे में ये किसान कभी भी मौसम की मार से उबर नहीं पाते. प्रकृति की मार कोसी के किसानों को कर्ज के तले दबा देती है.
क्षतिपूर्ति नाकाफी, बाढ़ से सुरक्षा की गति धीमी : मौसम की मार से बर्बाद हुई फसल की भरपाई के लिए किसानों को सरकार क्षति पूर्ति राशि देती है, जो कम रहती है. इस राशि में भी बंदर बाट हो जाता है. बिचौलिया क्षति पूर्ति राशि का गबन कर लेते है. बमुश्किल कुछ किसानों को ही इसका आंशिक लाभ मिल पाता है.
प्रशासन द्वारा बाढ़ बचाव कार्य मंद गति से चल रही है. तटबंध की सुरक्षा धीमी गति से हो रही है. अधिकारियों द्वारा मोनिटरिंग नाममात्र की जाती है. संभावित प्रभावित लोगों के लिए अबतक मुकम्मल व्यवस्था नहीं हो पाई है. आश्रय स्थल जर्जर हैं जिसको मरम्मत की जरूरत है.
रेलवे स्टेशन है या तालाब : जनाब विभाग की गरिमा का तो ख्याल कीजिये
रेल प्रशासन दौरम मधेपुरा स्टेशन को मॉडल स्टेशन बनाने की बात कर रहा है. वर्तमान व्यवस्था को देख मॉडल स्टेशन की बात बेईमानी लगती है. बीते तीन-चार वर्षों से मधेपुरा स्टेशन की हालत बद से बदतर है. रेलवे अधिकारियों की उदासीनता व सौतेलापन की मार मधेपुरा वासी झेल रहे हैं.
हाल के वर्षों में देश के विभिन्न इलाकों में रेलवे द्वारा प्राथमिकता के आधार पर दुर्त गति से विकास हो रहा है. वहीं राजनीतिक दृष्टि से संपन्न मधेपुरा जिला रेल के विकास में दिनों – दिन पिछड़ता जा रहा है. पिछड़ेपन के लिए रेल विभाग व अधिकारी से ज्यादा यहां के जनप्रतिनिधि जिम्मेदार है.
इंजन कारखाना का स्टेशन है या टापू : मधेपुरा में इलेक्ट्रिक इंजन का कारखाना संचालित हो रहा है. इसके मद्देनजर इस रेलवे स्टेशन का विकास रेल विभाग को प्राथमिकता के आधार पर करनी चाहिए जबकि हो रहा है इसके उलट अन्य दिनों में तो स्टेशन परिसर की हालत खराब रहती है.
बरसात के दिनों में स्थिति नारकीय हो जाती है. स्टेशन के निकास द्वार और प्लेटफॉर्म पर जलजमाव किसी बड़े हादसे को निमंत्रण दे सकता है. प्लेटफॉर्म के शेड से वर्षा के दिनों में हमेशा पानी टपकता है.
जमालपुर रेलवे स्टेशन से सबक लेने की जरूरत : पूर्व रेलवे के मालदा मंडल अंर्तगत जमालपुर जंक्शन में डीजल इंजन का कारखाना स्थापित है. उस स्टेशन को विभाग ने ए ग्रेड के स्टेशन का दर्जा दे रखा है.
साफ-सफाई के मामले में जमालपुर स्टेशन अव्वल है. वहां रेल का अस्पताल, स्कूल, पार्क व अन्य सुविधा विद्यमान है. जबकि मधेपुरा में ये सब नदारत है. जो रेल विभाग के सौतेलेपन व लापरवाही को दर्शाता है.
बारिश से किसान को कहीं खुशी तो कहीं गम
शंकरपुर : पिछले दो दिनों से हो रहे हल्की हल्की बारिश और मंगलवार की सुबह हुई मूसलाधार बारिश से कही किसानों में खुशी तो कही गम दिख रही है. मंगलवार के सुबह कई घंटों तक हुई मूसलाधार बारिश से जहां सरकार के विकास कार्यों को धो कर रख दिया. शहर से गांव के सड़कों पर कीचड़ ही कीचड़ नजर आ रहा है.
वहीं किसान खरीफ फल लगाने की तैयारी में जुटे हुए हैं. किसान धान रोपनी करने के लिए अधिक से अधिक उपज हो इसके लिए उन्नत किस्म के धान के बीज खरीद कर धान की बिचड़ा की कलम लगाये हुये हैं. सुबह में हुई मूसलाधार बारिश के कारण गहरे जमीन में लगाये गये बिचड़ा जलमग्न हो गया है.
धान रोपनी को लेकर किसानों को चिंता सताने लगी है. कई किसानों ने बताया कि धान की बिचड़ा अधिक समय तक बारिश के पानी में डूबा रहा तो बिचड़ा गलने लगेंगे और किसान को धनरोपनी करने के लिए फिर से धान का बिचड़ा का कलम लगाना पड़ेगा. तब तक में उन्नत वराइटी के धान लगाने का समय निकल गया होगा. जिससे किसान को दोहरी मार का सामना करना पड़ेगा.
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