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गर्मी से लोग हलकान, भूख के बदले लग रही प्यास, बच्चों को हमेशा पिलाते रहें पानी

Updated at : 16 Apr 2019 7:24 AM (IST)
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गर्मी से लोग हलकान, भूख के बदले लग रही प्यास, बच्चों को हमेशा पिलाते रहें पानी

मधेपुरा : इन दिनों कोसी के इलाके में मौसम का मिजाज चुनावी मीटर की तरह ही पल पल बदल रहा है. मौसम का रूख देखे बिना ही बच्चों से लेकर बड़े उम्र तक के लोग अनियमित जीवन जीने लगे हैं. धूप में चलकर घर पहुंचते ही पंखा, कूलर व एसी चलाये बिना रहा नहीं जाता […]

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मधेपुरा : इन दिनों कोसी के इलाके में मौसम का मिजाज चुनावी मीटर की तरह ही पल पल बदल रहा है. मौसम का रूख देखे बिना ही बच्चों से लेकर बड़े उम्र तक के लोग अनियमित जीवन जीने लगे हैं. धूप में चलकर घर पहुंचते ही पंखा, कूलर व एसी चलाये बिना रहा नहीं जाता है, लेकिन इस मौसम में लापरवाही कई बीमारियों को आमंत्रण दे रही है.

बच्चों का इम्यून सिस्टम कम होने की वजह से बदलते मौसम का असर सबसे ज्यादा बच्चों व बुर्जुगों में देखा जाता है. बच्चों में सर्दी जुकाम के साथ निमोनिया के लक्षण भी सामने आ रहे हैं. नाक में एलर्जी, वायरल बुखार, गले की खराबी और स्कीन एलर्जी के रोग भी पनपने लगे हैं.
अप्रैल महीना के शुरु होते ही गर्मी ने लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया है. सुबह होते ही सूरज की तीखी किरणें सिर के ऊपर चढ़ जाती है. सुबह सबेरे स्नान करना लोगों को भाने लगा है. दिन-रात पंखे की हवाखोरी की जरूरत महसूस होती है.
दिन चढ़ते ही लोग पसीने से तर-बतर होने लगे हैं. लोग अभी से ही सूती या अन्य हल्के-फुल्के कपड़े पहनने लगे हैं. गर्म खाने से लोग दूर भाग रहे हैं, जबकि बार-बार ठंडा पानी पी रहे हैं. बाजार में बेल के शरबत, आम के जूस, गन्ने का रस सहित कोल्ड ड्रिंक्स के काउंटर पर भीड़ जुटने लगी है. बाजार में हाथ पंखा भी बिकना शुरू हो गया है. राहगीर छांव की तलाश में पेड़ों के नीचे रुकने लगे हैं.
गर्मी में शरीर को राहत देने की कोशिश: गर्मी से शरीर को थोड़ा भी राहत पहुंचाने वाला सामान इन दिनों खूब बिक रहा है. सबसे अधिक बिक्री हाथ पंखे की है. प्रचंड गर्मी में इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए इसकी बिक्री सभी दुकानों में होने लगी है. कई तरह के रंग-बिरंगे पंखे लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं. हाथ पंखे भी कई तरह के हैं. ताड़, खजूर, प्लास्टिक, फाइबर प्लास्टिक व फोल्डिंग.
हाथ पंखों में सबसे अधिक डिमांड ताड़ व खजूर के पंखों की है. रेडिमेड की दुकानों में हाफ पैंट व हल्के गंजी की बिक्री धूम मचा रही है तो कोल्डड्रिंक्स की दुकान ग्राहकों से कभी खाली ही नहीं हो पा रही है. श्रृंगार प्रसाधन सहित आम किराने की दुकानों में तरह-तरह के आइस टाल्क (पाउडर) की बिक्री चरम पर है.
इलेक्ट्रिक पंखे, कूलर व एसी की बिक्री भी जोरों पर है. हल्का फुल्का खाना पसंद करने वाले लोगों का झुकाव इस भीषण गर्मी में दही की ओर ज्यादा बनता जा रहा है. वे बताते हैं कि दही पेट को ठंडा रखता है साथ ही हाजमा ठीक रखने के अलावा पूर्ण भोजन का भी एहसास कराता है.
गर्मी में अमृत है पानी: गर्मी में लोगों की भूख जैसे गायब ही हो गयी है. 10 से 15 मिनट के अंतराल पर उन्हें ठंडे पानी की आवश्यकता महसूस हो रही है.
शरीर पर कपड़ा जैसे काटता है. पसीना पोछने के लिए रूमाल काम नहीं आ रहा है. उन्हें अपने साथ तौलिया या गमछा रखना पड़ रहा है. गर्मी में लोगों को दो से तीन बार स्नान करने की जरूरत महसूस हो रही है. लोगों को तरह-तरह की स्वास्थ्य परेशानी शुरू हो गयी है
खूब बिकने लगा एस्ट्रॉल: एस्ट्रॉल का प्रयोग चेहरे व बाल को ढ़ंकने के लिए लड़कियां करती है. 80 से 250 रुपये के बीच बाजार में उपलब्ध एस्ट्रॉल की बिक्री हो रही है, जो इन लोगों को धूप व धूल दोनों से बचाव करती है. छात्रा सुरभि कहती है कि एस्ट्रॉल से चेहरे की चमक धूप में भी बरकरार रहती है.
बचाव पर भी दे ध्यान: इन वायरलों से बचाव के लिए प्रदूषित हवा सहित मच्छर भगाने वाले क्वाइल, बर्फ, अगरबत्ती, धूल व धुआं से दूर रहना चाहिए. डॉक्टर कहते हैं कि मौसम में हो रहे बदलाव की वजह से बच्चों में डायरिया की शिकायत बढ़ जाती है. इसकी मुख्य वजह शरीर में पानी का कम होना है.
डायरिया होने पर बच्चों को ओआरएस का घोल पिलाना चाहिए. इसके अलावा ताजा फलों का जूस भी पिलाया जा सकता है. जवानों व बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन की समस्या हो जाती है. ओआरएस, इलेक्ट्रॉल अथवा घर में पानी, नमक व चीनी का घोल बना कर पिलाना चाहिए. बीमारी नहीं भी है तब भी गर्मी के दिनों में नियमित रूप से इसका सेवन करना चाहिए.
कहते हैं चिकित्सक
शहर के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ असीम प्रकाश कहते हैं कि गर्मी की उमस में शरीर अत्यधिक पानी का डिमांड करती है. लू से बचाव के लिए लोगों को पानी का अत्यधिक सेवन कर ही घर से बाहर निकलना चाहिए. इसके अलावा एसी से सीधे धूप में निकलने से परहेज करना चाहिए.
चिकित्सक बताते हैं कि गर्मी के समय में मीट, मछली व अंडा का सेवन कम करना चाहिए. इसके अलावा बच्चों व बुजुर्ग को ओआरएस का घोल नियमित पीना चाहिए. उल्टी, दस्त व बुखार की स्थिति में चिकित्सक से सलाह लेकर ही दवा का सेवन करना चाहिए.
डॉक्टर कहते है कि इन दिनों वायरल फीवर की चपेट में लोग आ रहे हैं. खासकर जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, वायरल उन पर ज्यादा अटैक करता है. वायरल की वजह से लोगों को बुखार सहित नाक, कान, आंख व गले में संक्रमण देखा जा रहा है. बच्चों को समय-समय पर पानी पिलाते रहना चाहिए.
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