स्टेशन मास्टर मोबाइल से लेते है गाड़ी आने की सूचना

Updated at : 03 Apr 2018 5:32 AM (IST)
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स्टेशन मास्टर मोबाइल से लेते है गाड़ी आने की सूचना

शौचालय भी नहीं है जन सुविधा के नाम पर मधेपुरा : दौरम मधेपुरा से सात किमी की दूरी पर अवस्थित मिठाई स्टेशन मधेपुरा-मानसी रेलखंड पर अपनी कड़वी हकीकत के लिए चर्चित हो रही है. मिठाई फिलवक्त मधेपुरा व सहरसा के बीच पहला स्टेशन है, जहां बगैर सिग्नल के ही ट्रेन आती और जाती है. शायद […]

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शौचालय भी नहीं है जन सुविधा के नाम पर

मधेपुरा : दौरम मधेपुरा से सात किमी की दूरी पर अवस्थित मिठाई स्टेशन मधेपुरा-मानसी रेलखंड पर अपनी कड़वी हकीकत के लिए चर्चित हो रही है. मिठाई फिलवक्त मधेपुरा व सहरसा के बीच पहला स्टेशन है, जहां बगैर सिग्नल के ही ट्रेन आती और जाती है. शायद इस अनोखे स्टेशन की खबर रेलमंत्री पीयूष गोयल या क्षेत्र के सांसद व विधायक तक नहीं पहुंची है. आश्चर्य की बात यह है कि स्टेशन पर ट्रेन परिचालित करने के लिए तैनात कर्मियों को एक अदद टेलीफोन की भी सुविधा मुहैया नहीं करायी गयी है.
स्टेशन मास्टर ट्रेन परिचालन व विभागीय सूचना का आदान-प्रदान निजी मोबाइल से करते है. गाड़ी आने और जाने की सूचना तैनात कर्मी को हमेशा सहरसा व मधेपुरा स्टेशन से लेनी होती है. यू कहिए की इलेक्ट्रिक इंजन बनाने को लेकर देशभर में चर्चित हो रही मधेपुरा मिठाई स्टेशन की कुव्यवस्था को नजरअंदाज कर रेलवे लाइन पर बड़ी दुर्घटना को आमंत्रित कर रही है. बगैर सिग्नल के स्टेशन से होकर लंबी दूरी की रेलगाड़ियों को गुजारना यात्रियों की जान को जोखिम में डालने जैसा है.
स्टेशन पर नहीं है शौचालय
एक जगह से दूसरे जगह रेल मार्ग से आवाजाही करने वाले यात्रियों की संख्या हजारों में है. इसके बावजूद मिठाई स्टेशन को जनसुविधाओं से वंचित रखा गया है. स्थानीय रेल यात्री बताते है कि स्टेशन पर शौचालय की सुविधा नहीं रहने की वजह से प्रेशर आने पर लोग खेत की तरफ भागते है. खासकर महिलाओं को मिठाई में ट्रेन का इंतजार करना महंगा पड़ता है.
कई बार हो चुके हैं आंदोलन
मिठाई में रेलवे लाइन पर सिग्नल लगाने की मांग कई बार स्थानीय लोग व जनप्रतिनिधि द्वारा रेलवे के वरीय अधिकारियों से की जा चुकी है. इसके बावजूद रेलवे यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी इन समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है. स्थानीय लोग बताते है कि स्थानीय रेल अधिकारी के अलावा समस्तीपुर मंडल के डीआरएम तक से गुहार लगायी जा चुकी है.
विद्युत रेल इंजन कारखाना का रखिए ध्यान
पूर्व रेलमंत्री लालू यादव के कार्यकाल में मधेपुरा को मिली सौगात विद्युत रेल इंजन कारखाना मिठाई स्टेशन से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है. रेल इंजन कारखाना जाने के लिए गाड़िया बगैर सिग्नल के पोस्ट से होकर गुजरती है. इस दृष्टिकोण से भी यहां सिग्नल की आवश्यकता है. रेल इंजन कारखाना में पहला इलेक्ट्रिक इंजन बन कर तैयार हो गया है. आने वाले समय में इंजन बनने की रफ्तार बढ़ेगी. ऐसे में बगैर सिग्नल वाली मिठाई स्टेशन भारतीय रेल के लिए भी परेशानी का सबब बन सकती है.
बगैर शेड का है प्लेटफार्म
स्टेशन के प्लेटफार्म पर शेड नहीं रहने से यात्रियों को धूप व बरसात के दिनों में फजीहत उठानी पड़ती है. इन दिनों मौसम के अचानक परिवर्तन से तापमान वृद्धि के कारण रेलयात्रियों को परेशानी हो रही है. लोग ट्रेन के इंतजार में वृक्षों की छांव तलाशते रहते है. ऐसे मे रेलयात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे को तत्काल शेड निर्माण कराये जाने की आवश्यकता है.
1934 के भूकंप में ध्वस्त हुआ था सिग्नल
चेचक के उपचार को ले डॉक्टरों की टीम पहुंची खुसरूपट्टी मुसहरी
चेचक के लक्षण
बुखार का लगातार बने रहना.
शारीरिक थकावट व लगातार सिर में दर्द होना.
शरीर में खुजली, एलर्जी महसूस होना.
पेट विकार बढ़ना, गैस्ट्रो जैसी स्थिति का लगातार बना रहना.
जी मिचलाना अथवा बार-बार उल्टी होना.
बचाव के उपाय
घर अथवा प्रतिष्ठानों के आसपास गंदगी न रहने दें.
पानी के टेंकों की साफ-सफाई रोज करें. पानी उबाल कर ही पियें.
घर में मच्छर पैदा न होने दें या फिर उनसे बचाव के इंतजाम करें.
मरीज के कपड़े, बिस्तर रोजाना धोकर प्रयोग में लाये
परिवार के अन्य सदस्य एक ही बिस्तर पर न सोये.
कहते हैं डॉक्टर
डाॅ लाल बहादुर ने बताया कि चिकन पॉक्स वायरल बीमारी है. इसलिए और लोगों को चिकन पॉक्स से बीमारी न हो इसके रोकथाम के लिए आवश्यक दवाइयां दी जा रही रही है. चिकन पॉक्स या चेचक मिजेल्स वायरस के कारण होता है. यह किसी भी समय किसी को भी हो सकता है. यह बीमारी वायरल है, इसलिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलता है. चिकन पॉक्स का रहन-सहन या खान-पान से कोई लेना-देना नहीं है. बचाव के रूप में अन्य लोगों को नहीं हो इसके लिए उस क्षेत्र में घर-घर वैक्सीन का टीका दिया जाना चाहिए.
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