बिहार के 18 जिलों में जल्द शुरू होगा भूमि सर्वेक्षण, भ्रष्टाचार की शिकायत पर जाएगी सर्वे कर्मी की नौकरी

Updated at : 29 Nov 2023 5:38 PM (IST)
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बिहार के 18 जिलों में जल्द शुरू होगा भूमि सर्वेक्षण, भ्रष्टाचार की शिकायत पर जाएगी सर्वे कर्मी की नौकरी

बिहार में भूमि सर्वेक्षण का काम पूरा हो चुके जमीनों के रैयतों को खतियान, नक्शा और नागरिक अधिकार अभिलेख के रूप में जमीन के दस्तावेज दिये जायेंगे. यह दस्तावेज अलग-अलग जमीन का अलग-अलग होगा. वहीं, राज्य के 18 जिलों के सभी मौजों में भी भूमि सर्वेक्षण का कार्य जनवरी 2024 तक शुरू होने की संभावना है.

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बिहार के 20 जिलों में भूमि सर्वेक्षण का कार्य जारी है, जिसे मार्च 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. वहीं, राज्य के अन्य 18 जिलों के सभी मौजों में भी भूमि सर्वेक्षण का कार्य जनवरी 2024 तक शुरू होने की संभावना है. इसके लिए राजस्व विभाग एवं सर्वे निदेशालय को 10 हजार 101 विशेष सर्वेक्षण कर्मियों की नियुक्ति का इंतजार है. बता दें कि नागरिक अधिकार अभिलेख को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा, सचिव और भू अभिलेख और परिमाप के निदेशक जय सिंह ने मंगलवार को बंदोबस्त पदाधिकारियों की मासिक बैठक में समीक्षा की थी और साथ ही सुझाव मांगे थे. इस बैठक का आयोजन शास्त्रीनगर के सर्वे प्रशिक्षण संस्थान में किया गया.

मार्च 2024 तक 89 अंचलों के भू-सर्वेक्षण का कार्य पूरा करने का लक्ष्य

बैठक में प्राथमिकता के 20 जिलों के 89 अंचलों में भूमि सर्वेक्षण की समीक्षा की गई. इस समीक्षा में पाया गया कि 2500 तक खेसरा वाले 2800 राजस्व मौजों में से 2012 मौजों में प्रारूप का प्रकाशन कर दिया गया है. वहीं 2500 से 5000 तक खेसरा वाले 1136 मौजों में से 149 मौजों में प्रारूप का प्रकाशन किया गया है. 89 अंचलों के 4927 मौजों में भूमि सर्वेक्षण मार्च 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य है.

सर्वे पूरा होने वाले जमीन के रैयतों को दिये जायेंगे खतियान, नक्शा और जमीन के दस्तावेज

वहीं, जिन मौजों के भूमि सर्वेक्षण का काम पूरा हो चुके उन जमीनों के रैयतों को खतियान, नक्शा और नागरिक अधिकार अभिलेख के रूप में जमीन के दस्तावेज दिये जायेंगे. यह दस्तावेज अलग-अलग जमीन का अलग-अलग होगा. इसमें हर एक जमीन यानि खेसरा का नजरी-नक्शा बना रहेगा. साथ ही जमीन का यूनिक नंबर यानि यूएलपीआइएन भी दर्ज रहेगा. अधिकार अभिलेख में रैयत का नाम और पूरा पता, खाता-खेसरा और एकड़ सहित डिसमिल में रकवा, भूमि का प्रकार लिखा होगा. साथ ही संबंधित रैयत का मोबाइल और आधार नंबर दर्ज रहेगा. अधिकार अभिलेख उस जिले के बंदोबस्त पदाधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर से जारी किया जाएगा.

भ्रष्टाचार और अनुशासनहीन की शिकायत पर नपेंगे सर्वेक्षण कर्मी

विभाग के अपर मुख्य सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता की शिकायत पर सर्वेक्षण कर्मियों की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्देश दिया है. बैठक में कई बंदोबस्त पदाधिकारियों ने सर्वेक्षण कर्मियों द्वारा अनुशासनहीनता की शिकायत की. साथ ही अरवल समेत कुछ जिलों के कुछ सर्वेक्षण कर्मियों के भ्रष्टाचार में लिप्त रहने की शिकायत आई.

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18 जिलों में नये साल में शुरू होगा भूमि सर्वेक्षण

प्राथमिकता के 20 जिलों के बाद अन्य 18 जिलों के सभी मौजों में भी भूमि सर्वेक्षण जनवरी 2024 तक शुरू होने की संभावना है. इसके लिए राजस्व विभाग एवं सर्वे निदेशालय को 10 हजार 101 विशेष सर्वेक्षण कर्मियों का इंतजार है. इनके लिए बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद द्वारा ली जा चुकी है और दिसंबर में परीक्षा का परिणाम आने की संभावना है. चयनित अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण के बाद सर्वेक्षण में लगाया जायेगा.

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बेगूसराय सहित कुछ जिलों में कई मौजों का खतियान उपलब्ध नहीं

बेगूसराय सहित कुछ जिलों के बंदोबस्त पदाधिकारियों ने कहा कि उनके जिलों के कई मौजों का खतियान उपलब्ध नहीं हो पा रहा. अपर मुख्य सचिव ने कहा कि जिन जिलों में रिविनल सर्वे शुरू हुआ, लेकिन किसी कारणवश पूरा नहीं हो पाया, ऐसे में वहां के बंदोबस्त पदाधिकारी खतियान का सार मंगा लें. उसको अन्य स्रोतों से सत्यापित कराकर प्रपत्र 5 तैयार कर लें. किसी भी मौजे में सर्वे का काम शुरू करने से पहले वहां के खतियान का सार प्रपत्र 5 तैयार किया जाता है. उन्होंने कहा कि जिलों में खतियान की स्कैनिंग लगभग हो चुकी है. इसे सर्वे कर्मियों को उपलब्ध करवा दिया जाये. किसी रैयत के पास गांव का खतियान या उस गांव का नक्शा उपलब्ध है तो उसका भी इस्तेमाल वहां भूमि सर्वेक्षण का काम करने के लिए किया जा सकता है.

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