शिशु की रक्षा के लिए प्रसव के 42 दिनों तक विशेष देखभाल की जरूरत

Published at :06 May 2026 7:12 PM (IST)
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शिशु की रक्षा के लिए प्रसव के 42 दिनों तक विशेष देखभाल की जरूरत

प्रसव के बाद नवजात के बेहतर देखभाल की जरूरत बढ़ जाती है

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समय से पहले, कम वजन एवं पहले दिन से मां का दुध है अमृत समान .

लखीसराय

प्रसव के बाद नवजात के बेहतर देखभाल की जरूरत बढ़ जाती है. संस्थागत प्रसव के मामलों में शुरुआती दो दिनों तक मां और नवजात का ख्याल अस्पताल में रखा जाता है, लेकिन गृह प्रसव के मामलों में पहले दिन से ही नवजात को बेहतर देखभाल की जरूरत होती है. शिशु जन्म के शुरुआती 42 दिन अधिक महत्वपूर्ण होते हैं. इस दौरान उचित देखभाल के अभाव में शिशु के मृत्यु की संभावना अधिक होती है. इसको ध्यान में रखते हुए होम बेस्ड न्यू बॉर्न केयर (एचबीएनसी) यानि गृह आधारित नवजात देखभाल कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है. इस कार्यक्रम के तहत संस्थागत प्रसव एवं गृह प्रसव दोनों स्थितियों में आशा घर जाकर 42 दिनों तक नवजात की खास देखभाल करती है.

जिला सिविल सर्जन डॉ .जयप्रकाश सिंह ने बताया नवजात देखभाल सप्ताह के दौरान आशाओं द्वारा किए जा रहे गृह आधारित नवजात देखभाल पर अधिक जोर दिया गया है.

संस्थागत प्रसव में छह व गृह प्रसव में सात बार करती है भ्रमण:

जिला कार्यकर्म प्रबंधक सुधाशुं नारायण लाल ने बताया कि एचबीएनसी कार्यक्रम के तहत आशाएं संस्थागत एवं गृह प्रसव दोनों स्थितियों में गृह भ्रमण कर नवजात शिशु की देखभाल करती है. संस्थागत प्रसव की स्थिति में छह बार गृह भ्रमण करती है( जन्म के 3, 7,14, 21, 28 एवं 42 वें दिवस पर). गृह प्रसव की स्थिति में सात बार गृह भ्रमण करती है ( जन्म के 1, 3, 7,14, 21, 28 एवं 42वें दिवस पर).

जानिए कार्यक्रम का उद्देश्य:

सभी नवजात शिशुओं को आवश्यक नवजात शिशु देखभाल सुविधाएं उपलब्ध कराना एवं जटिलताओं से बचाना. समय पूर्व जन्म लेने वाले नवजातों एवं जन्म के समय कम वजन वाले बच्चों की शीघ्र पहचान कर उनकी विशेष देखभाल करना. नवजात शिशु की बीमारी का शीघ्र पता कर समुचित देखभाल करना एवं रेफर करना. परिवार को आदर्श स्वास्थ्य व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना एवं सहयोग करना. मां के अंदर अपने नवजात स्वास्थ्य की सुरक्षा करने का आत्मविश्वास एवं दक्षता को विकसित करना.

इन लक्षणों को नहीं करें अनदेखा:

सही समय पर नवजात की बीमारी का पता लगाकर उसकी जान बचायी जा सकती है. इसके लिए खतरे के संकेतों को समझना जरूरी होता है. खतरे को जानकर तुरंत शिशु को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जायें.

शिशु को सांस लेने में तकलीफ हो.

शिशु स्तनपान करने में असमर्थ हो.

शरीर अधिक गर्म या अधिक ठंडा हो.

शरीर सुस्त हो जाय.

शरीर में होने वाली हलचल में अचानक कमी आ जाय.

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Rajeev Murarai Sinha Sinha

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By Rajeev Murarai Sinha Sinha

Rajeev Murarai Sinha Sinha is a contributor at Prabhat Khabar.

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