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लगातार बरसा बदरा, खेतों में लौटी हरियाली, 525 हेक्टेयर में गिराया धान का बिचड़ा

Updated at : 22 Jun 2025 9:23 PM (IST)
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लगातार बरसा बदरा, खेतों में लौटी हरियाली,  525 हेक्टेयर में गिराया धान का बिचड़ा

जिले में पिछले पांच दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश से खेतों में धान का बिचड़ा गिराने के कार्य में तेजी से चल रहा है

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लखीसराय.

जिले में पिछले पांच दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश से खेतों में धान का बिचड़ा गिराने के कार्य में तेजी से चल रहा है. हालांकि बोरिंग की सुविधा वाले क्षेत्र में किसान धान का बिचड़ा ऐसे तो रोहिणी नक्षत्र से ही गिराना शुरू कर दिया था. जिले के किसानों द्वारा अभी तक 525 हेक्टेयर में धान का बिचड़ा गिराया जा चुका है. जबकि इस बार 42 सौ हेक्टेयर में धान का बिचड़ा गिराने का लक्ष्य है. जिले में 17 जून को ही मॉनसून प्रवेश कर चुका है. मॉनसून प्रवेश होने के साथ ही खेतों में हरियाली लौट आयी है. 17 जून से लगातार बारिश हो रही है. जिला मुख्यालय के सदर प्रखंड में शनिवार की सुबह वर्षा होने के बाद बारिश होना बंद हुआ है लेकिन खेतों काफी हद तक पानी लगा हुआ है.

बड़हिया में हुई सबसे अधिक बारिश

रोहिणी नक्षत्र में वर्षा नहीं होने के कारण कम किसानों द्वारा ही धान का बिचड़ा गिराया था. वहीं रोहिणी समाप्त होने के बाद मृगरिशरा के कुछ दिन बीतने के बाद कड़ी धूप व उमस भरी गर्मी से खेत की नमी काफी हद तक समाप्त हो चुकी थी. जिसके कारण धान का बिचड़ा गिराने की बात तो दूर खेत में कुदाल भी मुश्किल से चल रहा था. 17 जून से वर्षा शुरू होने के बाद लगातार पांच दिनों तक बारिश हुई है. जिले में सबसे अधिक चानन प्रखंड में बारिश हुई, जिसके बाद बड़हिया में अधिक बारिश होने का रिकॉर्ड दर्ज किया गया. चानन प्रखंड एक धनहर क्षेत्र है, बारिश होने के बाद शनिवार से नहर में भी पानी गिरना शुरू हो गया, जिससे कि किसानों को धान का बिचड़ा गिराने सहूलियत हो रही है.

सबौर संपन्न व 6444 किस्म के धान का बिचड़ा का है अधिक डिमांड

जिले के किसानों के बीच सबौर संपन्न एवं 6444 किस्म के धान का बिचड़ा का अधिक डिमांड है लेकिन कृषि विभाग द्वारा वर्तमान में सबौर संपन्न प्रमाणित धान का बिचड़ा ही किसानों को उपलब्ध करायी गयी है. हालांकि दोनों का अनुमानित उपज एक ही है, दोनों धान की उपज दो से तीन सौ मन प्रति हेक्टेयर अनुमानित उपज है. 6444 धान का बिचड़ा प्रायः गहरे सतही जमीन में रोपनी नहीं किया जाता है. इसका मूल वजह है कि गहरे सतही जमीन में कार्तिक माह तक पानी जमा होता है और 6444 धान का पौधा लंबे होने के कारण गिरने का किसानों को भय रहता है. यही कारण है कि किसान ऊंचे सतही खेतों में इस धान के पौधे का रोपनी करते है जबकि सबौर संपन्न धान एक तरह का मंसूरी नस्ल का धान है, जिसे गहरे और ऊंचे सतही खेतों में रोपनी किया जा सकता है और इसका पौधा लंबा नहीं होने के कारण गिरता भी नहीं है. अधिकांश किसान के घरों में यह दोनों धान चावल खाने के लिए भी उपयोग करते हैं.

बोले अधिकारी :

जिला कृषि पदाधिकारी सुबोध कुमार सुधांशु ने कहा कि किसानों के बीच धान का बिचड़ा का वितरण किया जा रहा है. सभी प्रखंडों में प्रमाणित बीज सबौर संपन्न धान का बिचड़ा उपलब्ध है. धान के बिचड़ा वितरण के बाद किसानों को समय समय पर खाद भी उपलब्ध कराया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Rajeev Murarai Sinha Sinha

लेखक के बारे में

By Rajeev Murarai Sinha Sinha

Rajeev Murarai Sinha Sinha is a contributor at Prabhat Khabar.

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