NEET UG फर्जीवाड़ा : लखीसराय पहुंची ईओयू की टीम, आरोपियों को रिमांड पर लेकर होगी सिंडिकेट की पूछताछ

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मेडिकल जांच के बाद आरोपियों को ले जाती पुलिस.

NEET UG परीक्षा फर्जीवाड़ा मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने लखीसराय पहुंचकर जांच तेज कर दी है. गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेकर सिंडिकेट के मास्टरमाइंड और वित्तीय लेनदेन का खुलासा करने की तैयारी है.

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राजीव मुरारी सिन्हा (लखीसराय). नीट यूजी परीक्षा फर्जीवाड़ा मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने जांच की रफ्तार तेज कर दी है. इसी क्रम में ईओयू की टीम लखीसराय पहुंच चुकी है और गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी में जुट गयी है. रिमांड प्रक्रिया शुरू करने से पहले बुधवार को सभी आरोपियों का लखीसराय सदर अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया. सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच पुलिस आरोपियों को अस्पताल लेकर पहुंची, जहां चिकित्सकों की टीम ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया. मेडिकल रिपोर्ट मिलने के बाद ईओयू कोर्ट में रिमांड के लिए आवेदन दाखिल करेगी.

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21 जून को हुआ था फर्जीवाड़े का खुलासा

गौरतलब है कि 21 जून को आयोजित नीट यूजी परीक्षा के दौरान लखीसराय में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था. जांच के दौरान दूसरे अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा देते हुए नौ फर्जी परीक्षार्थियों को रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया था. इनमें केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र से सात, जबकि केआरके हाईस्कूल और हसनपुर हाईस्कूल परीक्षा केंद्र से एक-एक फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गये थे. इस खुलासे के बाद पुलिस और जांच एजेंसियों ने पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने के लिए व्यापक जांच शुरू की.

अब तक 30 आरोपियों की हो चुकी है गिरफ्तारी

अब तक इस मामले में कुल 30 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. इनमें नौ फर्जी परीक्षार्थी, एक मूल अभ्यर्थी, दो सहयोगी और 18 बायोमेट्रिक कर्मी शामिल हैं. जांच में सामने आया कि बायोमेट्रिक कर्मियों ने पहचान छिपाने और फर्जी अभ्यर्थियों को परीक्षा दिलाने में अहम भूमिका निभायी थी. सभी गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है.

ईओयू की टीम सबसे पहले केआरके हाईस्कूल परीक्षा केंद्र के केंद्राधीक्षक विनय कुमार द्वारा कवैया थाना में दर्ज कराये गये कांड संख्या-245/26 के आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी. इसके साथ ही अन्य आरोपियों को भी चरणबद्ध तरीके से रिमांड पर लेने की प्रक्रिया चल रही है.

जांच एजेंसी का मानना है कि रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ से फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क, इसके वित्तीय लेनदेन, अन्य राज्यों या जिलों से जुड़े संपर्कों तथा इस रैकेट के मास्टरमाइंड के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है.

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