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दूसरे दिन हुई माता ब्रह्मचारिणी की पूजा, श्रद्धालुओं की लगी भीड़

Updated at : 04 Oct 2024 9:13 PM (IST)
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दूसरे दिन हुई माता ब्रह्मचारिणी की पूजा, श्रद्धालुओं की लगी भीड़

प्रखंड क्षेत्र में दुर्गा पूजा को लेकर माहौल भक्ति मय हो चुका है. शुक्रवार को नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा हुई.

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हलसी. प्रखंड क्षेत्र में दुर्गा पूजा को लेकर माहौल भक्ति मय हो चुका है. शुक्रवार को नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा हुई. प्रखंड क्षेत्र के नोमा में श्रीश्री 1008 वैष्णवी दुर्गा मंदिर में उपस्थित आचार्य सुनील पांडेय ने बताया कि नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है. जिसका अर्थ होता है नौ रातें. इन नौ रातों और दस दिन के दौरान, शक्ति देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है और दसवां दिन दशहरा मनाया जाता है. मां दुर्गा की नव शक्तियों का दूसरा स्वरूप देवी ब्रह्मचारिणी का हैं. यहां ब्रह्म शब्द का अर्थ तपस्या हैं. ब्रह्मचारिणी अर्थात तप की चारिणी-तप का आचरण करने वाली. कहा भी हैं-वेदस्तत्वं तपो ब्रह्म-वेद,तत्व और तप ब्रह्म शब्द के अर्थ हैं. ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत भव्य हैं. नवरात्र के दूसरे दिन पूजनोत्सव के दौरान संध्या आरती के लिए माता के दरबार में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी. मौके समिति अध्यक्ष संजय सिंह, उपाध्यक्ष सुधीर सिंह, कोषाध्यक्ष चंद्र भूषण सिंह, सचिव मिथिलेश कुमार पांडेय, उपसचिव हरे कृष्ण सिंह, संचालक कुमोद सिंह, बबलू सिंह, विनोद सिंह एवं अन्य ग्रामीण वासियों मौजूद रहे.

बड़हिया जगदंबा स्थान में उमड़ी भक्तों की भीड़

बड़हिया. शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन बड़हिया स्थित प्रसिद्ध मां बाला त्रिपुर सुंदरी जगदंबा मंदिर में पूजा-अर्चना करने श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ी. अहले सुबह से ही दूर दराज के क्षेत्रों से निजी वाहनों एवं विभिन्न ट्रेनों से श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया. हजारों की संख्या में पुरुष एवं महिला श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किये तथा पूजा-अर्चना की एवं मन्नत मांगी. नवरात्र के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा की गयी. मां ब्रह्मचारिणी को संयम की देवी कहा जाता है. इसलिए ऐसा माना गया है कि दूसरे दिन इस देवी के पूजा करने से मनुष्य के अंदर तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की प्राप्ति होती है. शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि मां ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में अक्ष माला और बाएं हाथ में कमंडल है. इस कारण पड़ा ब्रह्मचारिणी नाम. मां दुर्गा ने पार्वती के रूप में पर्वतराज के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और नारद के कहने पर पार्वती ने शिव को पति मानकर उनको पाने के लिए कठोर तपस्या की. हजारों सालों तक तपस्या करने के बाद इनका नाम तपश्चारिणी या ब्रह्मचारिणी पड़ा. नवरात्र के दूसरे दिन को इसी तप को प्रतीक के रूप में पूजा जाता है. इस देवी की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए. मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करके आप अपने जीवन में धन-समृद्धि, खुशहाली ला सकते है. मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करके आप अपने जीवन में धन-समृद्धि, खुशहाली ला सकते है. देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने वाले व्यक्ति को अपने हर कार्य में जीत हासिल होती है. वह सर्वत्र विजयी होती है. अगर आप भी किसी कार्य में अपनी जीत सुनिश्चित करना चाहते हैं, ब्रह्मचारिणी के इस मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए. देवी ब्रह्मचारिणी का मंत्र इस प्रकार है- ‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:’ आपको इस मंत्र का कम से कम एक माला, यानि 108 बार जाप करना चाहिए. इससे विभिन्न कार्यों में आपकी जीत सुनिश्चित होगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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