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हाथ से छोड़ना त्याग, हृदय से छोड़ना वैराग्य है : मोरारी बापू

Updated at : 08 Jan 2026 6:18 PM (IST)
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हाथ से छोड़ना त्याग, हृदय से छोड़ना वैराग्य है : मोरारी बापू

हाथ से छोड़ना त्याग, हृदय से छोड़ना वैराग्य है : मोरारी बापू

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रामकथा का छठा दिन : बापू ने समझाया कर्मयोग का मर्म, कहा- फल की इच्छा छोड़ ईमानदारी से करें कार्य

लखीसराय. प्रसिद्ध शिव मंदिर अशोक धाम के प्रांगण में आयोजित नौ दिवसीय श्रृंगी ऋषि मानस आधारित रामकथा के छठे दिन गुरुवार को मोरारी बापू की अमृतवाणी सुनने श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा. कथा के छठे सोपान में बापू ने त्याग और वैराग्य के सूक्ष्म अंतर को स्पष्ट करते हुए तीव्र भक्ति, तीक्ष्ण ज्ञान और कर्मकार कर्म योग पर प्रकाश डाला.

कर्म की तृप्ति ही वास्तविक शांति

श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बापू ने कहा कि जीवन में किसी भी कार्य को पूरी ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ करना चाहिए. उन्होंने कहा, प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्म से तृप्ति मिलनी चाहिए. फल का अधिकार भगवान कृष्ण ने हमारे हाथ में नहीं दिया है, केवल कर्म का अधिकार हमारा है. किसी काम का अंत कैसा होगा, इसकी परवाह किए बिना इस बात की संतुष्टि होनी चाहिए कि हमने उसे करने में कोई कमी नहीं छोड़ी. उन्होंने ”अतृप्ति” को जीवित अग्नि संस्कार की संज्ञा दी.

मजदूर व बिल्डर के उदाहरण से दी बड़ी सीख

बापू ने एक मर्मस्पर्शी उदाहरण देते हुए बताया कि एक मजदूर ने अपने जीवन का अंतिम मकान ”जैसे-तैसे” खराब सामग्री से तैयार किया, यह सोचकर कि अब उसे रिटायर होना है. बाद में मालिक ने वही मकान उसे उपहार में दे दिया, तब मजदूर को अपनी ईमानदारी की कमी पर भारी पछतावा हुआ. बापू ने कहा कि यदि वह ईमानदारी से काम करता, तो उसे उस अच्छे मकान का सुख मिलता. काम करते समय उससे मिलने वाला ”रस” ही हमें तृप्ति देता है.

हृदय से छोड़ना ही वैराग्य

त्याग और वैराग्य की व्याख्या करते हुए मोरारी बापू ने कहा, “जो हाथ से छोड़ दिया जाए, वह मात्र त्याग है, लेकिन जो हृदय (हार्ट) से छोड़ दिया जाए, वही वास्तविक वैराग्य है. हाथ से छोड़ी वस्तु को कोई दूसरा पकड़ सकता है, लेकिन हृदय से छूटी वस्तु जीव को मुक्त कर देती है. “

प्रसंगों से भावविभोर हुए भक्त

कथा के दौरान बापू ने भगवान राम के ऋषि संग गमन, राजा दशरथ से उनकी मांग, जनकपुर की मनमोहक यात्रा और वनवास के दौरान केवट प्रसंग को अत्यंत भावपूर्ण तरीके से सुनाया. केवट प्रसंग सुनकर पांडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए.

बापू के अनमोल वचन:

“काम शब्द कर्म योग का संकेत है, काम करते समय समर्पण जरूरी है. “

“फल की इच्छा छोड़कर अपने हिस्से के काम को ईमानदारी से करना ही धर्म है. “

“अतृप्ति एक ऐसी अग्नि है जो मनुष्य को भीतर ही भीतर जलाती है. “

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Rajeev Murarai Sinha Sinha

लेखक के बारे में

By Rajeev Murarai Sinha Sinha

Rajeev Murarai Sinha Sinha is a contributor at Prabhat Khabar.

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