लखीसराय के प्रवेश द्वार पर ही नगर परिषद डंप कर रहा शहर का कूड़ा: NH-80 किनारे सड़ांध से राहगीर बेहाल

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बरसात के दिनों में एनएच-80 किनारे डंप किये गये शहर के कचरे से उठ रही बदबू

विद्यापीठ चौक के समीप कूड़ा डंपिंग | Prabhat Khabar Network

लखीसराय शहर के मुख्य प्रवेश द्वार यानी विद्यापीठ चौक (सूर्यगढ़ा रोड) पर नगर परिषद द्वारा फैलाए गए कचरे के साम्राज्य ने शहर की सुंदरता और स्वच्छता के दावों को मटियामेट कर दिया है. मॉनसून की हालिया बारिश के बाद इस डंपिंग यार्ड से उठने वाली तीव्र बदबू और सड़ांध के कारण आम राहगीरों, वाहन चालकों और स्थानीय दुकानदारों का दम घुटने लगा है.

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पिछले दो-तीन दिनों से जिले में रुक-रुक कर हो रही मानसूनी बारिश और उसके बाद निकली तेज उमस के कारण हाईवे किनारे फेंका गया टनों कचरा अब सड़ने लगा है. नियमों को ताक पर रखकर राष्ट्रीय उच्च पथ-80 (NH-80) के ठीक किनारे मुख्य प्रवेश द्वार पर कूड़ा गिराए जाने से शहर में आने वाले मेहमानों को सबसे पहले दुर्गंध का सामना करना पड़ता है. इस मनमानी के खिलाफ स्थानीय लोगों में नगर परिषद प्रशासन के प्रति भारी रोष है.

नियमों की उड़ रही धज्जियां, मुख्य हाईवे बना डंपिंग जोन

स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध जनों का कहना है कि एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) और स्वच्छता गाइडलाइन के अनुसार, शहर के मुख्य आबादी वाले क्षेत्र अथवा राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे ओपन डंपिंग यार्ड बनाने का कोई प्रावधान नहीं है. इसके बावजूद नगर परिषद अपनी मनमानी पर आमादा है. सूर्यगढ़ा रोड और बड़हिया रोड को जोड़ने वाले इस बेहद व्यस्त मार्ग से रोजाना हजारों लोग गुजरते हैं, जिन्हें नाक पर रुमाल रखकर या सांस रोककर यहां से पार होना पड़ता है.

विकल्प मौजूद, पर इच्छाशक्ति की कमी: किशनपुर के पीछे खाली पड़ी है जमीन

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नगर परिषद को स्थायी समाधान का रास्ता सुझाते हुए कहा है कि शहर से दूर कचरा प्रबंधन के लिए पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं:

  • गैरमजरूआ भूमि: रेहुआ रोड के समीप और घनी आबादी से काफी दूर किशनपुर गांव के पीछे बड़े पैमाने पर सरकारी (आम गैरमजरूआ) जमीन खाली पड़ी है.
  • अधिग्रहण की मांग: नगर परिषद प्रशासन चाहे तो अंचलाधिकारी (CO) से पत्राचार कर उक्त भूमि का विधिवत अधिग्रहण कर सकता है, जहां सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट (कचरा प्रसंस्करण इकाई) स्थापित कर शहर को इस नरक से मुक्ति दिलाई जा सकती है.

संक्रामक बीमारियों का बढ़ा खतरा, डैमेज हो रही शहर की छवि

बरसात के मौसम में इस तरह खुले में भारी मात्रा में जैविक और अजैविक कचरा सड़ने से क्षेत्र में मक्खियों और मच्छरों का प्रकोप अत्यधिक बढ़ गया है. स्थानीय डॉक्टरों के अनुसार, यदि इस कचरे को जल्द यहां से नहीं हटाया गया, तो आस-पास के मोहल्लों में हैजा, डायरिया, टाइफाइड और डेंगू जैसी घातक संक्रामक बीमारियां महामारी का रूप ले सकती हैं.

कहते हैं सफाई पदाधिकारी

विद्यापीठ चौक पर जलजमाव और कचरे से उत्पन्न संकट तथा ग्रामीणों के आक्रोश को लेकर जब लखीसराय नगर परिषद के सफाई विंग के वरीय अधिकारी से बात की गई, तो उन्होंने आश्वासन दिया:

"हमें विद्यापीठ चौक के समीप एनएच किनारे कूड़ा डंपिंग से आम लोगों और राहगीरों को हो रही परेशानी की पूरी जानकारी है. बरसात के कारण समस्या थोड़ी ज्यादा गंभीर हो गई है. विभाग द्वारा टाउन प्लानिंग के तहत शहर की सीमा से काफी दूर एक उपयुक्त भूमि (प्लॉट) की तलाश सरगर्मी से की जा रही है. अंचल कार्यालय के साथ मिलकर जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. जैसे ही एनओसी (NOC) मिल जाती है, बहुत जल्द कचरा डंपिंग का कार्य मुख्य शहर और हाईवे से हटाकर दूरस्थ नए चिह्नित स्थल पर शिफ्ट कर दिया जाएगा." — नीतीश कुमार सिन्हा, सफाई पदाधिकारी (नगर परिषद, लखीसराय)

अब देखना यह है कि सफाई पदाधिकारी का यह 'जल्द जमीन तलाशने' का दावा कब धरातल पर उतरता है, या फिर लखीसराय की जनता को इस मानसूनी सीजन में इसी तरह बदबूदार हवा में सांस लेने को मजबूर होना पड़ेगा.


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