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योग के लिए योग्य गुरु का होना भी है जरूरी: मोरारी बापू

Updated at : 09 Jan 2026 6:31 PM (IST)
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योग के लिए योग्य गुरु का होना भी है जरूरी: मोरारी बापू

प्रसिद्ध शिव मंदिर अशोक धाम के समीप शनिवार से आयोजित नौ दिवसीय मानस श्रृंगी ऋषि रामकथा के आठवें दिन शुक्रवार की गयी

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योग को गुफा व ग्रंथों से निकाल करके सबके बीच लाये योग ऋषि पूज्य बाबा रामदेव योग आरोग्य के लिए बहुत जरूरी है, सभी को सुबह-सुबह करना चाहिए योग कथा सिद्धांत नहीं स्वभाव है स्वभाव ही अध्यात्म है लखीसराय. प्रसिद्ध शिव मंदिर अशोक धाम के समीप शनिवार से आयोजित नौ दिवसीय मानस श्रृंगी ऋषि रामकथा के आठवें दिन शुक्रवार की गयी. विश्व ख्याति प्राप्त कथावाचक मोरारी बापू ने योग व रामकथा के महत्व से प्रवचन को आरंभ किया. उन्होंने स्वास्थ्य के लिए सभी लोगों को अनिवार्य रूप से सुबह में नियमित योग करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा योग को गुफाओं से निकाल करके, ग्रंथों से निकाल करके सब के बीच मैदान में लाकर एक ऋषि ने योग ऋषि ने प्रयोग किया सफल हुआ वो हमारे पूज्य बाबा रामदेव हैं और आगे भी करते रहेंगे. योग आरोग्य के लिए बहुत जरूरी है. सभी को सुबह-सुबह योग करना चाहिए. मैं तो तीन या चार घंटे व्यास पीठ पर बैठता हूं. उसी में मेरा सभी योग हो जाता है. मैं अलग से या विशेष रूप से योग नहीं करता हूं. योग के लिए योग्य गुरु का होना जरूरी होता है. योग तभी सफल होता है जब कोई योग्य गुरु की प्राप्ति हो. बिना योग्य गुरु के मार्गदर्शन में योग कुयोग बन सकता है अथवा योगी रोगी बन सकता है. सावधान ये नियम है. कथा सिद्धांत नहीं स्वभाव है. सिद्धांत में ध्यान रखना पड़ता है कि इधर-उधर ना हो जाये. कथा तो साधु का स्वभाव है और स्वभाव ही अध्यात्म है. गीता स्वभाव को अध्यात्म कहता है. सभी धर्म के अपने-अपने सिद्धांत होते हैं. सभी की अपनी रीत है, उसका स्वागत है, वह अद्भुत है और उसने समाज में बहुत कुछ किया भी है, लेकिन अध्यात्म में कोई सिद्धांत नहीं होता. वो हंसेगा भी, वो रोयेगा भी, वो नाचेगा भी और वो चुप बैठ भी जायेगा. वो भीड़ में भी रहेगा और कोने में भी. मैं कथा को प्रेमी यज्ञ करता हूं. ये केवल धर्मसभा नहीं है, ये प्रेमसभा है, अध्यात्म सभा है. मोरारी बाबू ने उपनिषद ग्रंथ के श्लोक ‘ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते, पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते, ॐ शांति: शांति: शांति,’ के साथ परमात्मा व कथा के पूर्ण होने की पुष्टि श्रद्धालुओं के सामने एक बोतल पानी व एक खाली स्टील के कटोरा के साथ प्रैक्टिकल के साथ बताया. बोतल के पानी को खाली कटोरा में डाल दिया, फिर कटोरा से पानी को बोतल में पुनः डाल दिया. उन्होंने बताया कि बोतल में जब पानी था तो भी बोतल पूर्ण था. बोतल से जब पानी निकल गया तो भी बोतल पूर्ण खाली ही रहा. उसमें फिर पानी डाल दिया गया तो पूर्ण खाली बोतल पुनः पूर्ण हो गया. अर्थात पूर्ण से पूर्ण निकाल दो तो भी पूर्ण ही रहता है. पूर्ण में पूर्ण डाल दो तो भी पूर्ण ही रहता है, दुगुना पूर्ण नहीं होता. कथा पूरा सुनिए, कथा थोड़ा सुनिए, कथा अधूरा सुनिए कथा हमेशा पूर्ण ही रहता है. इसलिए जितना भी कथा सुनने को मिले उसे पूर्ण समझ कर ग्रहण करना चाहिए.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Rajeev Murarai Sinha Sinha

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By Rajeev Murarai Sinha Sinha

Rajeev Murarai Sinha Sinha is a contributor at Prabhat Khabar.

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