छठ महापर्व: चार दिवसीय अनुष्ठान नेम धर्म के साथ आज से शुरू

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 04 Nov 2024 10:18 PM

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हिंदुओं का सर्वश्रेष्ठ नेम धर्म का महापर्व छठ मंगलवार से शुरू हो जायेगा. चार दिवसीय लोक आस्था का पर्व छठ का पहला दिन नहाय खाय से शुरू किया जायेगा.

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लखीसराय. हिंदुओं का सर्वश्रेष्ठ नेम धर्म का महापर्व छठ मंगलवार से शुरू हो जायेगा. चार दिवसीय लोक आस्था का पर्व छठ का पहला दिन नहाय खाय से शुरू किया जायेगा. मंगलवार को नहाय खाय एवं बुधवार को लोहंडा पूजा होगी. मंगलवार को चार दिवसीय अनुष्ठान का पहला दिन कद्दू भात को लेकर बाजार में कद्दू की बिक्री जमकर हुई. बाजार में कद्दू का दाम सबसे अधिकतम 60 रुपये प्रति पीस, वहीं छोटा कद्दू का दाम 30 रुपये तक की बिक्री हो रही थी. छठ के नहाय खाय के दिन अरवा चावल, चना का दाल कद्दू की सब्जी के साथ साथ पकोड़े पकाया जाता हैं, जिसे व्रती पूजा पाठ कर ग्रहण करती है, जिसके बाद ही घर के अन्य सदस्य प्रसाद के रूप में ग्रहण करते है. मंगलवार को नहाय-खाय के बाद बुधवार को लोहंडा पूजा किया जाता है. इस दिन काफी साफ सफाई नेम धर्म के साथ मनाया जाता है.

छठ घाट को लेकर इस बार जिला प्रशासन है गंभीर

किऊल नदी में विद्यापीठ चौक स्थित महावीर दुर्गा छठ घाट, कुशवाहा घाट, सदर प्रखंड के सामने वीर हनुमान घाट, बड़ी दरगाह स्थित सीढ़ी घाट, महावीर स्थान महावीर घाट, नगर परिषद स्थित चंपा लाल घाट के बाद रविवार से पथला घाट से लेकर व्यायामशाला गली घाट तक घाट को चुस्त दुरुस्त किया गया. डीएम मिथिलेश मिश्र, नप ईओ अमित कुमार, उप सभापति शिवशंकर राम, जदयू जिला अध्यक्ष रामानंद मंडल, वार्ड पार्षद गौतम कुमार, सुनील कुमार द्वारा निरीक्षण किया गया. नप ईओ अमित कुमार ने बताया कि डीएम के निर्देश शहर नदी के छठ घाट के साथ शहर के हर्ट पचना रोड स्थित संसार पोखर समेत अन्य पोखरों की साफ-सफाई घाटों की चुस्त दुरुस्त व्यवस्था पिछले एक पखवाड़ा से किया जा रहा है.

छठ पूजा समिति भी करवा रहा घाटों की साफ-सफाई

शहर के अलावा किऊल नदी के पूर्वी तट के किनारे वाले गांव के द्वारा भी छठ घाट की साफ-सफाई किया जा रहा है, सदर प्रखंड के सीमा पर बसे वृंदावन धर्मशाला के रवि रश्मि छठ पूजा के युवाओं ने सुबह से घाट के सफाई में लगे हैं. किऊल नदी के हरसाल व्रतियों व श्रद्धालुओं को आने-जाने एवं पूजा सामग्री को रखने के लिए साफ-सफाई को लेकर अहम माना जाता है जहां नदी में पानी आने से नदी के घाट एवं घाट पर व्रतियों को पहुंचने में परेशानी होती है, जिसके लिए स्थानीय ग्रामीण एवं युवाओं के द्वारा छठ पूजा से पहले साफ-सफाई में जुट जाते हैं. वहीं हर साल की तरह विधायक प्रह्राद यादव के द्वारा रास्ते को घाट तक पहुंचाने के लिए जेसीबी के द्वारा साफ सफाई कराने के लिये किऊल धर्मशाला रवि रस्म परिषद के द्वारा क्यों नदी के घाट को साफ-सफाई में जुटे रहे.

बीडीओ व थानाध्यक्ष ने छठ घाटों का लिया जायजा

चानन. बीडीओ प्रिया कुमारी एवं चानन थानाध्यक्ष रवींद्र प्रसाद के द्वारा रेउट, मननपुर, चुरामनबीघा व भलुई सहित अन्य छठ घाटों का निरीक्षण किया गया, ताकि छठ व्रतियों को किसी प्रकार कि कोई कठिनाइयों का सामना करना न पड़े. वहीं जानकीडीह पंचायत में छठ व्रतियों को सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर मुखिया प्रतिनिधि उचित यादव द्वारा छठ घाटों कि साफ-सफाई किया जा रहा है. मौके पर उपमुखिया विपिन यादव, सहित अन्य लोग उपस्थित थे.

कुमार प्रोगेसिव स्कूल ने छठ व्रतियों के बीच बांटे पूजन सामग्री

रामगढ़ चौक. प्रखंड के परसावां-चमघारा स्थित कुमार प्रोग्रेसिव स्कूल में लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा के मौके पर सोमवार को चेयरपर्सन सबिता कुमारी द्वारा छठ व्रतियों के बीच पूजा सामग्री, नारियल और साड़ी का वितरण किया गया. छठ व्रतियों में सौ से अधिक महिला-पुरुष ने विद्यालय प्रबंधन द्वारा छठ पूजा सामग्री प्राप्त किया. चेयरपर्सन ने बताया कि विद्यालय क्षेत्र के आस-पास की छठ व्रतियां ने छठ पूजा की महत्ता को विद्यालय परिवार के साथ साझा किया. इस अवसर पर सबिता कुमारी ने छठ पूजा हमारी संस्कृति धरोहर कैसी है, सभी को अवगत कराया और उपस्थित सभी को पर्यावरण स्वस्थ्य कैसे रहे की जानकारी भी दी. लोगों से अपील किया कि अपने आस-पास स्वच्छता का ध्यान रखें.

स्कूल में शिक्षिका ने ड्रॉइंग के जरिये छठ पर्व का बताया महत्व

पीरीबाजार. क्षेत्र अंतर्गत नक्सल प्रभावित क्षेत्र चौरा राजपुर पंचायत के प्राथमिक विद्यालय बंगाली बांध में सोमवार को छठ पूजा के पूर्व विद्यालय में शिक्षिका जेवा जाहिद ने छात्र-छात्राओं को छठ पर्व के महत्व को समझने के लिए ड्रॉइंग के जरिये छात्र-छात्राओं को महापर्व छठ के महत्व को समझाया. छात्र-छात्राओं को बताया गया कि छठ पर्व हमारे बिहार का सबसे बड़ा और मुख्य पर्व है. लोक आस्था का महापर्व छठ न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि इसका वैज्ञानिक, ऐतिहासिक, और सामाजिक महत्व भी गहरा है. यह पर्व हमारी संस्कृति, परंपराओं, और रीति-रिवाजों का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है. छठ पूजा की महत्ता और इसकी परंपरा का उल्लेख करने वाली अनेक पौराणिक एवं लोक कथाएं प्रचलित हैं, जो इसे और भी विशिष्ट बनाती हैं. इस पर्व का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सादगी, पवित्रता और लोक संस्कृति का प्रतिविंब है, यह पर्व सूर्योपासना का एक पर्व है, जिसमें कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान सूर्य नारायण को अर्घ जल चढ़ाया जाता है और उनकी विधिवत पूजा की जाती है. यह प्रकृति के प्रति प्रेम प्रकट करने का पर्व है और छठ मइया की पूजा कर प्रकृति के प्रति अपनी श्रद्धा और सम्मान प्रकट किया जाता है तथा प्रकृति के देवताओं को धन्यवाद दिया जाता है.

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