जिले को मिला पहला जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी पद

Updated at : 08 Jun 2024 7:03 PM (IST)
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जिले को मिला पहला जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी पद

जिले में पहली बार जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी के पद पर पदाधिकारी की नियुक्ति की गयी है.

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लखीसराय. जिले में पहली बार जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी के पद पर पदाधिकारी की नियुक्ति की गयी है. जिसमें बिहार कला एवं संस्कृति सेवा से चयनित पदाधिकारी मृणाल रंजन ने लखीसराय में अपना योगदान दिया है. योगदान देने के बाद प्रभात खबर से बातचीत करते हुए मृणाल रंजन ने कहा कि जिला में कला संस्कृति के साथ ही कलाकारों की प्रतिभा को निखारने का काम किया जायेगा. कलाकारों कला के क्षेत्र में आगे बढ़ाने का प्रयास उनकी प्राथमिकता में होगी. साथ ही उन्होंने कहा कि वे बिहार सरकार के कला संस्कृति एवं युवा विभाग के पदाधिकारी है. जिस वजह से जिले में विभाग के तहत आने वाले राजकीय धरोहरों को संरक्षण एवं संवर्द्धन का प्रयास भी करेंगे. उन्होंने कहा कि जिला में पहली बार इस पद का सृजन हुआ है और वे पदाधिकारी के रूप में अपना योगदान दिये हैं. जल्द ही जिले के अन्य क्षेत्रों का उनके द्वारा भ्रमण किया जायेगा और जायजा लिया जायेगा.

डॉ अनिल कुमार व संग्रहालय अध्यक्ष के साथ लिया संग्रहालय का जायजा

लखीसराय. जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी मृणाल रंजन ने जिला में योगदान करने के बाद संयोगवश लखीसराय पहुंचे विश्व भारती शांति निकेतन विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के प्राध्यापक डॉ अनिल कुमार एवं लखीसराय संग्रहालय के अध्यक्ष डॉ सुधीर कुमार यादव के साथ लखीसराय संग्रहालय एवं अशोक धाम मंदिर को भी देखा. संग्रहालय निरीक्षण के दौरान डॉ अनिल कुमार व मृणाल रंजन ने पुरातात्विक महत्व की मूर्तियों व अन्य वस्तुओं के रखने की जगह का जायजा लिया. इस दौरान उक्त जगहों के सीलिंग की स्थिति पर दोनों ने सवाल उठाये. वहीं कई जगह दीवारों पर दाग को भी चिह्नित करते हुए संग्रहालय अध्यक्ष से इस ओर ध्यान दिये जाने की बात कही. बता दें कि संग्रहालय का भवन काफी पूर्व ही बन कर तैयार हो गया था. वहीं अप्रैल से भवन में मूर्तियों के रखरखाव के लिए शो-केस व पेडस्टल निर्माण का कार्य चल रहा है. संभवत 15 अगस्त तक सारा कार्य समाप्त कर संग्रहालय को आम जनता के लिए खोले जाने की बात भी कही जा रही है. संग्रहालय निरीक्षण के बाद अशोक धाम मंदिर में सभी अधिकारियों ने पूजा-अर्चना कर मंदिर के पीछे रखे पुरातात्विक मूर्तियों को भी देखा. इस दौरान मूर्तियों को देख मृणाल रंजन ने आश्चर्य भी व्यक्त किया.

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