लखीसराय के किसानों के रक्षक बाबा तड़ाचंद, फसल की सुरक्षा के लिए आज भी लगती है हाजिरी
Published by : AMIT KUMAR SINH Updated At : 07 Jun 2026 9:19 AM
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Lakhisari News : लखीसराय जिले के चानन प्रखंड अंतर्गत गोपालपुर मौजा में खुले आसमान के नीचे स्थित बाबा तड़ाचंद का स्थान ग्रामीण आस्था का अनूठा केंद्र है. यहां मननपुर, चुरामनबीघा, गोपालपुर, रेवटा सहित आसपास के दर्जनों गांवों के किसान गहरी श्रद्धा रखते हैं. ग्रामीणों के अनुसार यह परंपरा लगभग दस दशक पुरानी है और आज भी खेती-किसानी से जुड़े हर शुभ कार्य की शुरुआत बाबा के आशीर्वाद से ही की जाती है.
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चानन(लखीसराय) से रंजन पासवान की रिपोर्ट
Lakhisari News : गोपालपुर मौजा में स्थित बाबा तड़ाचंद का स्थान किसी भव्य मंदिर में नहीं, बल्कि खुले आसमान के नीचे स्थापित है. इसके बावजूद यहां श्रद्धालुओं की आस्था किसी बड़े तीर्थ स्थल से कम नहीं है. दूर-दूर से किसान यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी फसल की सुरक्षा एवं समृद्धि की कामना करते हैं.बुआई से पहले बाबा को चढ़ता है पहला प्रसाद
क्षेत्र के किसानों के बीच यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है कि धान, गेहूं या अन्य फसलों की बुआई शुरू करने से पहले सबसे पहले बाबा तड़ाचंद की पूजा की जाती है. किसान धूप-अगरबत्ती जलाकर मिश्री, बताशा और लड्डू का प्रसाद अर्पित करते हैं. उनका विश्वास है कि बाबा की कृपा से खेतों में अच्छी पैदावार होती है और फसल सुरक्षित रहती है.अच्छी पैदावार पर अर्पित की जाती है विशेष भेंट
ग्रामीण बताते हैं कि फसल कटने के बाद यदि पैदावार अच्छी होती है तो कई किसान बाबा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए विशेष पूजा करते हैं. कुछ श्रद्धालु अपनी मान्यताओं के अनुसार बाबा के स्थान पर मुर्गे की बलि भी चढ़ाते हैं. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी कई परिवार इसका पालन करते हैं.चोरों को रास्ता भुला देने वाली मान्यता
ग्रामीण राजेंद्र पंडित, योगी यादव और काशी यादव बताते हैं कि चार दशक पहले तक क्षेत्र में एक अनोखी मान्यता प्रचलित थी. लोगों का विश्वास था कि यदि कोई व्यक्ति खेत से फसल चोरी कर भागने की कोशिश करता था, तो उसे रास्ता दिखाई देना बंद हो जाता था. जब तक वह चोरी की गई फसल वापस नहीं छोड़ देता, तब तक उसे सही मार्ग नजर नहीं आता था. ग्रामीण इस घटना को बाबा तड़ाचंद का चमत्कार मानते हैं.जंगली जानवरों से फसल की रक्षा करने वाले बाबा
किसानों का कहना है कि बाबा तड़ाचंद की कृपा से उनकी फसलें जंगली जानवरों के प्रकोप से सुरक्षित रहती हैं. एक समय क्षेत्र में सूअर, हिरण और नीलगाय फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते थे. इससे परेशान किसानों ने पुजारी के माध्यम से बाबा से प्रार्थना की. ग्रामीणों के अनुसार इसके बाद फसलों को होने वाला नुकसान काफी हद तक रुक गया और लोगों की आस्था और मजबूत हो गई.पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रही परंपरा
बाबा तड़ाचंद के प्रति श्रद्धा केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है. नई पीढ़ी भी इस परंपरा को पूरी निष्ठा से निभा रही है. किसान आज भी खेती की शुरुआत, नई फसल की बुआई, घर के शुभ कार्य या किसी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले बाबा का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते.आस्था, विश्वास और लोक परंपरा का जीवंत प्रतीक
गोपालपुर का बाबा तड़ाचंद स्थान केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण संस्कृति और लोक विश्वास का जीवंत प्रतीक भी है. लगभग सौ वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी लोगों को अपनी जड़ों से जोड़े हुए है. किसानों के लिए बाबा तड़ाचंद केवल देवस्थल नहीं, बल्कि उनके खेतों, फसलों और आजीविका के संरक्षक के रूप में पूजे जाते हैं.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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