अमेरिकी प्रोफेसर ने बालिका विद्यापीठ में दुर्लभ पुस्तकों की ली जानकारी

Updated at : 03 Mar 2025 7:31 PM (IST)
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अमेरिकी प्रोफेसर ने बालिका विद्यापीठ में दुर्लभ पुस्तकों की ली जानकारी

प्रसिद्ध बालिका विद्यापीठ में अमेरिका के प्रतिष्ठित नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के प्रो रॉव लिनरोथे ने पहुंच विद्यालय का भ्रमण करने के साथ ही इसके ऐतिहासिक महत्व पर भी चर्चा की.

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अमेरिका के नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने बालिका विद्यापीठ का लिया जायजा

विद्यालय के पुस्तकालय में दुर्लभ पुस्तकों की भी ली जानकारी

लखीसराय. प्रसिद्ध बालिका विद्यापीठ में अमेरिका के प्रतिष्ठित नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के प्रो रॉव लिनरोथे ने पहुंच विद्यालय का भ्रमण करने के साथ ही इसके ऐतिहासिक महत्व पर भी चर्चा की. प्रोफेसर लिनरोथे और मार्जोरी वीनबर्ग कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज में एसोसिएट प्रोफेसर और डिपार्टमेंट चेयर हैं तथा आर्ट हिस्ट्री विभाग से जुड़े हुए हैं. इस दौरान उनके साथ आये आइआइटी गुवाहाटी के पीएचडी एचएसएससी विभाग के ईशान हरित, दिल्ली आर्ट गैलरी की सुष्मिता नंदिनी तथा फिल्म निर्माता रविराज पटेल ने विद्यालय का भ्रमण किया. प्रोफेसर लिनरोथे एक प्रख्यात शोधकर्ता भी हैं, अपने पुरातत्व और कला इतिहास से जुड़े शोध के लिए विद्यालय में आये थे. उन्होंने विद्यालय के ऐतिहासिक स्थलों का अवलोकन किया और इनके संरक्षण के महत्व पर चर्चा की.

विद्यालय पहुंचने पर प्रोफेसर लिनरोथे ने छात्रावास की छात्राओं से संवाद किया और उनके शैक्षणिक अनुभवों को साझा किया. वहीं उन्होंने विद्यालय के ऐतिहासिक स्थलों का गहन अध्ययन किया. उन्होंने पंचवटी का भ्रमण किया और इस स्थान के ऐतिहासिक महत्व को समझा. इसके बाद उन्होंने उस कमरे का दौरा किया, जहां देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ठहरे थे. डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा लगाये गये ”ज्ञान तारु वटवृक्ष” को देखकर उन्होंने अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त की और इसे भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक बताया. उन्होंने इस वृक्ष के ऐतिहासिक महत्व और उसके संरक्षण के तरीकों पर भी चर्चा की. वहीं उन्होंने विद्यालय में महात्मा गांधी के आने की बात पर भी चर्चा की.

पुस्तकालय भ्रमण और धरोहर संरक्षण पर चर्चा

प्रोफेसर लिनरोथे ने विद्यालय के पुस्तकालय का भ्रमण किया, जहां उन्होंने वर्षों पुरानी दुर्लभ पुस्तकों को देखा और उनके संरक्षण के महत्व पर चर्चा की. उन्होंने सुझाव दिया कि इन ऐतिहासिक पुस्तकों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए डिजिटलीकरण (डिजिटल आर्काइविंग) एक प्रभावी उपाय हो सकता है. उन्होंने कहा कि पुरानी ऐतिहासिक वस्तुएं और साहित्य हमारी अमूल्य धरोहर हैं, और इनका रखरखाव करना हमारी वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने जोर दिया कि नयी पीढ़ी को अपने पूर्वजों और ऐतिहासिक धरोहरों की जानकारी होनी चाहिए, जिससे वे अपनी संस्कृति और इतिहास से जुड़ सकें.

विद्यालय की ऐतिहासिकता और शैक्षिक परंपराओं से प्रभावित होकर प्रोफेसर लिनरोथे ने विद्यालय पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा कि वे बहुत जल्द इस विषय पर एक डॉक्यूमेंट्री तैयार करेंगे और इसे विद्यालय को समर्पित करेंगे, ताकि विद्यालय के गौरवशाली इतिहास को दुनिया भर में प्रचारित किया जा सके. विद्यालय प्रशासन एवं छात्राओं ने प्रोफेसर लिनरोथे और उनके साथ आये अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया और उनके बहुमूल्य सुझावों को अपनाने का संकल्प लिया.

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