तीन नदियों का संगम रहा है लखीसराय मंचासीन अतिथि व अन्य.

लखीसराय : शहर के चितरंजन रोड स्थित लायंस क्लब में इंडियन रेडक्राॅस सोसायटी ने लखीसराय के ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने , समझने एवं संग्रह करने को लेकर एक सेमिनार आयोजित किया. सेमिनार में लखीसराय के विभिन्न क्षेत्रों में अवस्थित ऐतिहासिक अवशेषों को बचाने एवं संग्रह करने पर वक्ताओं द्वारा जानकारी दी गयी. सेमिनार की अध्यक्षता […]
लखीसराय : शहर के चितरंजन रोड स्थित लायंस क्लब में इंडियन रेडक्राॅस सोसायटी ने लखीसराय के ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने , समझने एवं संग्रह करने को लेकर एक सेमिनार आयोजित किया. सेमिनार में लखीसराय के विभिन्न क्षेत्रों में अवस्थित ऐतिहासिक अवशेषों को बचाने एवं संग्रह करने पर वक्ताओं द्वारा जानकारी दी गयी. सेमिनार की अध्यक्षता सुरेश प्रसाद सिंह ने की. वहीं शांति निकेतन के प्रोफेसर अनिल कुमार द्वारा बताया गया कि ईसा पूर्व से ही लखीसराय तीन नदियाें का संगम रहा है.
झारखंड के गिरीडीह व जमुई होते हुए किऊल नदी व गंगा से होते हुए हरुहर नदी के अलावे पुनपुन का संगम लखीसराय की धरती पर ही हुआ है. उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से ही लखीसराय ऐतिहासिक विरासत संजोये हुए है. शहर के हसनपुर, कवैया लाली पहाड़ी से इंद्रदमनेश्वर का नाता ऐतिहासिक बताया है. भगवान बुद्ध बर्षा निवास लखीसराय में ही किया करते थे. घोसीकुंडी, लाली पहाड़ी, उरैन में बुद्ध भगवान का प्रवचन होने की भी बात कही गयी. इसके अलावे लखीसराय में खिलजी वंश का अवशेष मिलने की बात कही गयी.
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