विकास से अब भी कोसों दूर भलुई ब्लॉक हॉल्ट
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :18 Feb 2016 5:48 AM (IST)
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नक्सलियों के टारगेट पर होने के बाबजूद यहां लाइट तक की व्यवस्था नहीं है सुरक्षा के नाम पर स्कॉट पार्टी व पेट्रोलिंग पर ही करना पड़ता है भरोसा हाई लेवल प्लेटफार्म नहीं होने से अक्सर होता है हादसा गरमी के दिनों में पेयजल की भी होती है किल्लत चानन : किऊल-झाझा रेलखंड के बीच जमुई […]
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नक्सलियों के टारगेट पर होने के बाबजूद यहां लाइट तक की व्यवस्था नहीं है
सुरक्षा के नाम पर स्कॉट पार्टी व पेट्रोलिंग पर ही करना पड़ता
है भरोसा
हाई लेवल प्लेटफार्म नहीं होने से अक्सर होता है हादसा
गरमी के दिनों में पेयजल की भी होती है किल्लत
चानन : किऊल-झाझा रेलखंड के बीच जमुई व मननपुर रेलवे स्टेशन के बीच स्थित भलूई ब्लॉक हॉल्ट में यात्री सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है. नक्सल प्रभावित इलाका होने के बावजूद भी हॉल्ट पर लाइट तक की व्यवस्था नहीं है, जबकि इस हॉल्ट से दर्जनों गांव के लोग ट्रेन से सफर कर बिभाग को राजस्व देते हैं.
यह हॉल्ट अक्सर नक्सलियों के निशाने पर होता है.लेकिन आज रेलवे विभाग के द्वारा इस हॉल्ट को न तो पूर्ण स्टेशन का दर्जा देकर सुरक्षा का कोई इंतजाम किया गया व न ही इसके विकास की दिशा में कोई कदम उठाया जा सका है. इस हॉल्ट पर ट्रेन से यात्रा करने के लिए क्षेत्र के लखनपुर, गोपालपुर, रेवटा, गोबरदाहा कोड़ासी, चेहरौन कोड़ासी, लखापुर सहित अन्य गांवों के हजारों लोग अपनी यात्रा आरंभ व समाप्त करते हैं. इस हॉल्ट को पूर्ण स्टेशन का दर्जा नहीं मिलने के कारण रेलवे के आलाधिकारी इस हॉल्ट के विकास से खुद को अलग रखते हैं. यहां न तो शौचालय है व न ही यात्री शेड. शौचालय नहीं होने से खास कर महिला यात्री को काफी परेशानी होती है. रेलवे टिकट के लिए यात्री को केबिन में बैठे कर्मचारी से टिकट खरीदना पड़ता है.
लाइट के अभाव में रात में इस हॉल्ट से ट्रेन पकड़ने वाले या फिर इस हॉल्ट पर उतरने वाले यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. इस दौरान कई बार यात्री हादसा के शिकार भी हो चुके हैं. कुछ माह पूर्व इस क्षेत्र के चुरामन बीघा निवासी एक ग्रामीण ट्रेन से उतरने के दौरान गिर पड़े व गंभीर रूप से जख्मी हो गये. वहीं पैदल ऊपरी पथ नहीं रहने के कारण रेल पटरी के बीच से होकर यात्री एक ओर से दूसरी ओर आते जाते हैं जिससे ट्रेन हादसे की आशंका बनी रहती है.
गरमी, जाड़ा व बरसात के मौसम में यात्रियों को खुले में ट्रेन का इंतजार करना पड़ता है. पेयजल के लिए एक एक चापाकल अप व डाउन ट्रैक के किनारे प्लेटफॉर्म के समीप दिया गया है लेकिन इनमें से एक ही चापाकल चालू रहता है. इस संबंध में यात्रियों ने बताया कि यहां की समस्या से मौखिक तथा लिखित आवेदन संबंधित विभाग को रेलकर्मी व स्थानीय लोगों के द्वारा दी गयी लेकिन इस हॉल्ट के विकास की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा सका है. वहीं केबिन मास्टर नवल किशोर राह ने बताया कि नक्सली खतरे के बाद भी लाइट की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है. उन्होंने भी सुविधा को लेकर विभागीय अधिकारी की मौन रहने पर कहा कि यात्री के अलावा कर्मचारी के लिए भी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं करायी गयी है.
कार्य समाप्ति के बाद आराम करने के लिए कोई कमरा नहीं है. ड्यूटी के बाद केबिन में ही सोना पड़ता है. बताते चलें कि नक्सली संगठन द्वारा घोषित दो दिवसीय बंदी के क्रम में नक्सलियों की धमकी के बाद सोमवार की रात से मंगलवार को सारा दिन उक्त हॉल्ट पर ताला जड़ा रहा.
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