मकर संक्रांति को ले लोगों ने नदी स्नान कर किया दान-पुण्य

Published at :15 Jan 2016 6:58 PM (IST)
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मकर संक्रांति को ले लोगों ने नदी स्नान कर किया दान-पुण्य

मकर संक्रांति को ले लोगों ने नदी स्नान कर किया दान-पुण्यफोटो संख्या:03-नदी स्नान के लिये श्रद्धालूओं की भीड़प्रतिनिधि, लखीसरायजिले भर में शुक्रवार को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया गया. पर्व को लेकर सुबह से ही नदी में स्नान के लिये लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गयी. किऊल नदी के विभिन्न घाटों के अलावे बड़हिया […]

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मकर संक्रांति को ले लोगों ने नदी स्नान कर किया दान-पुण्यफोटो संख्या:03-नदी स्नान के लिये श्रद्धालूओं की भीड़प्रतिनिधि, लखीसरायजिले भर में शुक्रवार को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया गया. पर्व को लेकर सुबह से ही नदी में स्नान के लिये लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गयी. किऊल नदी के विभिन्न घाटों के अलावे बड़हिया में गंगा नदी के तट पर स्नान के लिए दिन भर श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहा. स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने भगवान सूर्य को जल अर्पित किया. पुण्य स्नान के बाद ब्राह्मणों व गरीबों के बीच गर्म कपड़े, तिल, चावल, दाल आदि दान किये. इसके बाद घरों में दही-चूड़ा व तिलकुट का भोजन किया. लोगों ने अपने प्रियजनों व इष्ट मित्रों को बुलाकर पर्व का विशेष व्यंजन खिलाया. रात में कई घरों में खिचड़ी बनी. कुछ लोगों ने 14 व 15 जनवरी दोनों ही दिन इन व्यंजनों के लुफ्त उठाया. हिंदू धर्म से जुड़ी मान्यताओं के मुताबिक इस दिन सूर्योदय से पूर्व नदी स्नान कर भगवान सूर्य को किया गया. तर्पण गंगा नदी में स्नान जैसा पुण्य देता है. माना जाता है कि मकर संक्रांति के बाद धीरे-धीरे दिन बड़ी व रात छोटी होने लगती है. मकर संक्रांति को एक तरह से शरद ऋतु की विदाई व बसंत ऋतु का आगमन भी माना जाता है. मंदिरों में भीड़ मकर संक्रांति को लेकर सुबह से ही विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही. शहर के प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर के अलावे थाना चौक स्थित मंदिर, सूर्यगढ़ा में गौरी शंकर धाम मंदिर, नंदपुर बुढ़ानाथ मंदिर, साकेत धाम ठाकुरबाड़ी, सलेमपुर बड़की ठाकुरबाड़ी, श्रृंगि ऋषि धाम आदि जगहों में मंदिरों में श्रद्धालुओं की उपस्थिति बनी रही. वहीं सूर्यगढ़ा प्रतिनिधि के मुताबिक शुक्रवार को मकर संक्रांति के अवसर पर आस्था का केंद्र रहा. हरोहर नदी में लोगों ने डुबकी लगायी. स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने तिल व खिचड़ी का दान किया. सुहावने मौसम में मकर संक्रांति के पुण्यकाल में स्नान करने हेतु स्थानीय नदी पर सुबह से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा. मेदनीचौकी प्रतिनिधि के मुताबिक मकर संक्रांति का पर्व क्षेत्र में श्रद्धा व विश्वास के साथ मनाया गया. अहले सुबह नदी स्नान कर श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया. भगवान सूर्य को अर्ध्य दिया व तिलदान किया. इस पर्व में तिल का विशेष महत्व है. कुछ लोग तिल मिश्रित जल से स्नान करते हैं. तिल का भोजन करते हैं व तिल दान करते हैं. कहते हैं ये सभी कार्य पापनाशक है. हिंदुओं के घरों में दही-चूड़ा, तिल-गुड़ मिले लड्डू तिलकुट व तिलवा खाया-खिलाया जाता है. कुछ लोग इसे तिल संक्रांति के नाम से भी जानते हैं.

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