टूटने लगा हैं अन्नदाता के सब्र का बांध

Published at :20 Dec 2015 6:40 PM (IST)
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टूटने लगा हैं अन्नदाता के सब्र का बांध

टूटने लगा हैं अन्नदाता के सब्र का बांध -अब तक नहीं शुरू हो पायी प्रखंड में धान की खरीद फोटो 5 से 5 ई तक (प्रतिक्रिया देते किसान.प्रतिनिधि, सिकंदरा ज्येष्ठ हो या पौष हमारे कृषकों को आराम नहीं, छूटे कभी संग बैलों का ऐसी कोई शाम नहीं, मुख में जीभ शक्ति भुज में जीवन सुख […]

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टूटने लगा हैं अन्नदाता के सब्र का बांध -अब तक नहीं शुरू हो पायी प्रखंड में धान की खरीद फोटो 5 से 5 ई तक (प्रतिक्रिया देते किसान.प्रतिनिधि, सिकंदरा ज्येष्ठ हो या पौष हमारे कृषकों को आराम नहीं, छूटे कभी संग बैलों का ऐसी कोई शाम नहीं, मुख में जीभ शक्ति भुज में जीवन सुख का नाम नहीं, वसन कहां सूखी रोटी भी मिलती दोनों शाम नहीं. किसानों के यथार्थ को बयां करती राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर की ये पंक्ति शायद किसानों का सबसे सशक्त चित्रण है. शायद इसे बिडंबना ही कहा जाये कि देश की अर्थव्यवस्था को सबसे ज्यादा मजबूती प्रदान करने वाला किसान आज अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को विवश है और किसानों की इस बदहाली पर पूरा जिला प्रशासन तमाशबीन बना हुआ है. गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 5 दिसंबर से ही धान खरीद शुरू करने का निर्देश दिया है. लेकिन सरकार के आदेश के 15 दिन बीत जाने के बावजूद आज तक सिकंदरा प्रखंड में धान की खरीद शुरू नहीं हो पायी है. अभी तक प्रखंड के किसानों के लिए सूखा व अकाल सबसे बड़ी विपदा बन कर आती थी. लेकिन इस बार किसानों के लिए धान का भंडारण सबसे बड़ी समस्या बन कर उभरी है. किसान जल्द से जल्द धान बेच कर रबी की बुआई शुरू करना चाह रहे है. लेकिन धान खरीद में पैक्सों द्वारा की जा रही आनाकानी व व्यापारियों द्वारा धान का न्यायिक दर नहीं मिलने से किसान बेबस व लाचार नजर आ रहे हैं. विभाग ने इस वर्ष सिकंदरा प्रखंड में पैक्स व व्यापार मंडल के माध्यम से 3600 मिट्रीक टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है. लेकिन धान खरीद शुरू होने की निर्धारित तिथि के 15 दिन बाद भी धान खरीद शुरू होने की निर्धारित तिथि के 15 दिन बाद भी धान की खरीद शुरू होना तो दूर अभी तक पैक्सों की चावल मिल से टैग करने का कार्य भी नहीं हो पाया है. इस संबंध में कुमार के किसान हरदेव सिंह का कहना है कि धान की खरीद को लेकर राज्य खाद्य निगम बेहद ही उदासीन है. जिसके कारण अब तक धान की खरीद प्रारंभ नहीं हो पाया है. मिश्रडीह के किसान सह पूर्व मुखिया राजकुमार मंडल ने जिलाधिकारी डाॅ कौशल किशोर से इस मामले में संजीदगी दिखाते हुए जल्द से जल्द धान अधिप्राप्ति का कार्य प्रारंभ करवाने को मांग की है. पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष नवल किशोर सिंह ने धान पर बोनस देने की मांग करते हुए कहा कि सरकार धान खरीदने में आनाकानी कर रही है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले वर्ष धान पर 300 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया था. लेकिन इस वर्ष अब तक सरकार ने बोनस देने की घोषणा नहीं की है. जिसके कारण धान खरीद में राज्य सरकार की मंशा पर ही सवाल उठ रहा है. शारदाबाद के किसान सुनील यादव ने जिला प्रशासन से प्रखंड में जल्द से जल्द धान खरीद शुरू करने की मांग करते हुए कहा कि रबी की बुआई प्रारंभ हो गयी है. जिसके कारण आर्थिक तंगी से जूझ रहे छोटे किसान धान को औने पौने दाम पर बेचने को मजबूर हो रहे है.उन्होंने कहा कि विलंब से धान खरीद शुरू होने पर बड़े किसानों को ही इसका फायदा मिल पायेगा. मंजोष के किसान श्यामनंदन सिंह ने कहा कि बाजार में धान का सही भाव नहीं मिल पा रहा है. जबकि एसएफसी द्वारा अब तक प्रखंड में धान की खरीद शुरू नहीं पायी है. ऐसे में किसान महाजन के चंगुल में फंसने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. गोखुला के किसान मनोज कुमार का कहना है कि एसएफसी धान में ज्यादा नमी होने का बहाना बना कर किसानों का आर्थिक शोषण करता रहा है. उन्होंने बताया कि पातन वाले धान में नमी की मात्रा 17 प्रतिशत से कम है. इसलिए एसएफसी जल्द से जल्द धान खरीद की प्रक्रिया प्रारंभ करनी चाहिए.

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