कॉलेज में नहीं हैं शक्षिक, बिना पढ़ाई के ही वद्यिार्थी भरते हैं परीक्षा फॉर्म

Updated at :29 Oct 2015 6:37 PM
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कॉलेज में नहीं हैं शक्षिक, बिना पढ़ाई के ही वद्यिार्थी भरते हैं परीक्षा फॉर्म

कॉलेज में नहीं हैं शिक्षक, बिना पढ़ाई के ही विद्यार्थी भरते हैं परीक्षा फॉर्म फोटो संख्या 11कैप्शन:केएसएस कॉलेज की प्रयोगशाला में फैली गंदगीप्रतिनिधि, लखीसरायसरकारी महाविद्यालयों में शिक्षकों की घोर कमी के कारण इंटर व स्नातक के छात्र बिना वर्ग व प्रायोगिक कक्षा किये परीक्षा का फॉर्म भरते हैं और डिग्री प्राप्त करते हैं. जिले में […]

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कॉलेज में नहीं हैं शिक्षक, बिना पढ़ाई के ही विद्यार्थी भरते हैं परीक्षा फॉर्म फोटो संख्या 11कैप्शन:केएसएस कॉलेज की प्रयोगशाला में फैली गंदगीप्रतिनिधि, लखीसरायसरकारी महाविद्यालयों में शिक्षकों की घोर कमी के कारण इंटर व स्नातक के छात्र बिना वर्ग व प्रायोगिक कक्षा किये परीक्षा का फॉर्म भरते हैं और डिग्री प्राप्त करते हैं. जिले में दो अंगीभूत महाविद्यालय है जिसमें शहर के केएसएस कॉलेज व बीएनएम कॉलेज बड़हिया हैं. दोनों महाविद्यालय में शिक्षक व स्टॉफ की घोर कमी है. इसके बावजूद भी केएसएस कॉलेज में चार हजार व बीएनएम कॉलेज में दो हजार इंटर व स्नातक के विद्यार्थियों का नामांकन है. केएसएस कॉलेज का यह हाल है कि चार हजार विद्यार्थी रहने के बाद भी सभी विषयों के एक-एक शिक्षक हैं. अगर सभी विद्यार्थी कॉलेज में अध्ययन अध्यापन के लिए आना शुरू कर दे तो शिक्षक नहीं होंगे. जो 100-200 की संख्या में कॉलेज आते हैं वह भी शिक्षक के अभाव में वापस चले जाते हैं. जो एक दो दर्जन विद्यार्थी बचते हैं वह प्रायोगिक वर्ग कर पाते हैं. वहीं बीएनएम कॉलेज में तो शिक्षक के अभाव मे इक्का-दुक्का वर्ग ही संचालित हो पाता है. यहां तो प्रायोगिक वर्ग होता ही नहीं है. लखीसराय कॉलेज के वनस्पति विज्ञान के विभागाध्यक्ष श्याम नंदन प्रसाद सिंह, रसायन शास्त्र के विभागाध्यक्ष चंद्र मौलेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि प्रायोगिक लैब में सारी सुविधा रहने के बावजूद भी एक बैच में 60 विद्यार्थियों में मात्र सात-आठ विद्यार्थी प्रायोगिक वर्ग कर पाते हैं. लैब टेक्निशीयन के अभाव में गंदगी का अंबार है.इंटर के छात्र अभिषेक राज, राज कुमार आदि ने बताया कि कॉलेज में शिक्षकों की घोर कमी है. जितने विद्यार्थी आते हैं उसका भी वर्ग नहीं हो पाता है, क्योंकि सभी विषयों में मात्र एक-एक शिक्षक ही हैं. अगर प्रायोगिक वर्ग कराते हैं तो थ्योरी का वर्ग बाधित हो जाता है. यही क्रम चलते रहता है. कम मात्रा में भी प्रत्येक दिन प्रायोगिक वर्ग करते हैं. शिक्षक की कमी से विद्यार्थियों को कोचिंग का सहारा लेना पड़ता है. केएसएस कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य कौशल किशोर व बीएनएम कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डाॅ अरविंद कुमार ने बताया कि कॉलेज में जितने भी विद्यार्थी आते हैं उनका वर्ग व प्रायोगिक संचालित होता है, लेकिन विद्यार्थियों की उपस्थिति ही कम होती है. शिक्षक व स्टॉफ की कमी जरूर है, इसकी भरपाई जल्द ही विश्वविद्यालय द्वारा कर दी जायेगी.

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