फैशन के दौर में कुंभकारों के पुश्तैनी धंधे पर लगा ग्रहण

Updated at :26 Oct 2015 7:02 PM
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फैशन के दौर में कुंभकारों के पुश्तैनी धंधे पर लगा ग्रहण

फैशन के दौर में कुंभकारों के पुश्तैनी धंधे पर लगा ग्रहण * दूसरों के घरों में दीये से रोशनी करने वाले कुंभकारों के घरों में पसरा अमावस्या का अंधेराफोटो-09 चित्र परिचय: मिट्टी का दीया बनाता कुम्हारफोटो- 10- कुल्हो पंडितफोटो-11- सुनील पंडितफोटो-12- सुधीर पंडितफोटो -13- राजेंद्र पंडितमेदनीचौकी : फैशन के दौर में मेदनीचौकी सहित प्रखंड के […]

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फैशन के दौर में कुंभकारों के पुश्तैनी धंधे पर लगा ग्रहण * दूसरों के घरों में दीये से रोशनी करने वाले कुंभकारों के घरों में पसरा अमावस्या का अंधेराफोटो-09 चित्र परिचय: मिट्टी का दीया बनाता कुम्हारफोटो- 10- कुल्हो पंडितफोटो-11- सुनील पंडितफोटो-12- सुधीर पंडितफोटो -13- राजेंद्र पंडितमेदनीचौकी : फैशन के दौर में मेदनीचौकी सहित प्रखंड के कुंभकारों के पुश्तैनी धंधे पर ग्रहण लगने लगा है. खपड़ा, सुराही, घड़ा, चुक्का, पतला, हंडि़या, बिड़ुआ बनाना कुंभकारों का पुश्तैनी धंधा रहा है, जबकि बदलती जीवन शैली ने कुंभकारों की जिंदगी को बदहाल कर दिया है. सूर्यपुरा पंचायत के खालिकपुर निवासी राजेंद्र पंडित अपनी पत्नी गीता देवी, पुत्र सुधीर पंडित व सुनील पंडित के साथ अपने पुश्तैनी धंधे में लगे हुए हैं. राजेंद्र पंडित ने बताया कि तेज रफ्तार के इस युग में प्लास्टिक के गिलास का चलन हो गया है. चाय की दुकानों पर मिट्टी के भांड़ के स्थान पर प्लास्टिक के कप का क्रेज है. पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की पहल पर ट्रेनों में मिट्टी के भांड़ या कुल्हड़ में चाय मिलने लगी थी. तब पुश्तैनी धंधे में जान आयी थी और मिट्टी के कुल्हड़ की अच्छी खासी कीमत भी मिल जाती थी. अब तो दीपावली में भी मिट्टी के दीयों के स्थान पर मोमबत्ती जलाना पसंद किया जा रहा है. गीता देवी कहती हैं कि पहले लोग मकानों में खपरैल की छत देते थे. अब बालू, छड़, सीमेंट की छत ढालते हैं, इसलिए खपड़े की मांग नहीं है. वही अपनी व्यथा बताते हुए कहती है कि पर्व त्योहार में पहले मिट्टी के चुकवा-चुकिया, खिलौना आदि बेच कर परिवार का भरण पोषण मजे में हो जाता था. अब तो लोग कुल देवता या मंदिर में जलाने के लिए ही मिट्टी के दीये लेते हैं. सुनील पंडित पढ़ा लिखा युवक है. उनका कहना है कि कुंभकार तो जन्म से ही कलाकार होता है, उसने ही सबसे पहले पहिया का आविष्कार किया. आज कलाकार भूखे मर रहे हैं. हमारी आमदनी का जरिया दिन ब दिन अवरुद्ध होता जा रहा है. सुधीर पंडित ने राज मिस्त्री का धंधा अपना लिया है. दूसरों का घर बनाने वाले आज खुद घर विहीन है. दीये की रोशनी से दूसरों के घरों में उजाला फैलाने वाले कुंभकारों के घरों में आज अमावस्या का अंधियारा पसरा हुआ है. राजेंद्र पंडित अपनी तीन बेटियों की शादी कर आर्थिक तंगहाली में पहुंच गये. अब भी दो बेटियां की शादी करनी है. वे अपना घर बनाने में असमर्थ हैं. उन्होंने कहा कि गरीब होने के बाद भी बीपीएल सूची में नाम नहीं है. डीजल अनुदान को ले जमा हो रहा आवेदनसूर्यगढ़ा. जिलाधिकारी के निर्देशानुसार प्रखंड क्षेत्र में मौसम की मार झेल रहे किसानों के बीच डीजल अनुदान की राशि वितरण को लेकर आवेदन जमा लिया जा रहा है. उक्त जानकारी देते हुए प्रखंड कृषि पदाधिकारी रत्नेश कुमार ने बताया कि जिन किसानों ने धान की फसल को बचाने के लिए डीजल पंप से सिंचाई की है. उनको सरकार द्वारा डीजल अनुदान की राशि उपलब्ध करायी जायेगी. उन्होंने बताया कि एक किसान को अधिकतम ढ़ाई एकड़ जमीन में लगी फसल की सिंचाई को लेकर ही अनुदान की राशि उपलब्ध करायी जायेगी. आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 31 अक्तूबर तक रखी गयी है.बदबू से हो रही परेशानी सूर्यगढ़ा: स्थानीय बाजार स्थित एनएच 80 किनारे नवनिर्मित नाला से गंदे पानी के कारण निकल रही बदबू से स्थानीय लोग परेशान हैं. छोटे-बड़े व्यवसायी दीपावली के मौके पर अपने अपने प्रतिष्ठानों की साफ सफाई करने में जुटे हैं. इसके अलावे इन दुकानों पर खरीदारी को लेकर पहुंच रहे ग्राहक भी अपनी नाक पर रूमाल रख रहे हैं. बताते चलें कि नाले का निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन पानी निकासी की व्यवस्था नहीं किये जाने से पानी सड़ कर बदबू फैलाने लगा है. इसके अलावा इस पानी में पनप रहे मच्छरों व कीड़ों से बीमारी फैलने की आशंका बढ़ गयी है.घर लौटने लगे परदेशीसूर्यगढ़ा: लोक आस्था का पर्व छठ व दीपावली के मौके पर घर से दूर रह कर कमाई करने वाले लोग अब अपने घर लौटने लगे हैं. इन परदेशियों के लौटने से उनके घरों की रौनक बढ़ गयी है. परदेशी बाबू अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ दीपावली व छठ पर्व मनाने को लेकर घर वापस आते हैं और पर्व की समाप्ति के बाद वापस अपनी रोजी रोटी के लिए लौट जाते हैं. बदले की कार्रवाई में हुई बरखास्त सीआरपीएफ जवान की हत्यापुलिस ने की तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार लखीसराय: रविवार की शाम बड़हिया थाना क्षेत्र के तहदिया गांव के पास एनएच 80 पर 32 वर्षीय जैतपुर निवासी बरखास्त सीआरपीएफ जवान मोहन सिंह की हत्या बदले की भावना से कर दी गयी. इस बाबत मोहन सिंह के भाई रामानुज सिंह के बयान पर बड़हिया थाना में जैतपुर गांव के ही 13 लोगों सेठी सिंह, रौशन सिंह, गुड्डु सिंह, माखन सिंह, बंटी सिंह, निक्कू सिंह, मुन्ना सिंह, प्रहलाद सिंह, टुटु सिंह, गौतम सिंह, विक्की सिंह, जीवन सिंह एवं अमन सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है. बड़हिया थानाध्यक्ष विश्वरंजन सिंह ने बताया कि 2010 में जैतपुर गांव में राजीव सिंह एवं टाना सिंह की हत्या हुई थी. मृतक राजीव सिंह गुड्डू सिंह के भाई थे. इसकी प्राथमिकी बड़हिया थाना में कांड संख्या 129/10 के तहत दर्ज की गयी थी. उक्त हत्याकांड में मोहन सिंह नामजद था. मामला कोर्ट में ट्रायल पर था और 31 अक्तूबर तक कोर्ट का फैसला आ सकता था. उक्त हत्याकांड में नामजद होने के कारण मोहन सिंह की सीआरपीएफ की नौकरी भी चली गयी थी. आशंका जतायी गयी थी कि फैसला मोहन सिंह के पक्ष में आ सकता है. संभवत: इसी कारण बदले की नीयत से आरोपियों ने घात लगा कर मोहन सिंह की हत्या कर दी. इधर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों बंटी सिंह, निक्कू सिंह एवं रौशन सिंह को गिरफ्तार कर लिया. बताते चलें कि घटना की शाम मृतक मोहन सिंह तहदिया लाइन होटल स्थित चाय दुकान पर चाय पीने पहुंचे थे. इसी क्रम में आधा दर्जन हथियार बंद नकाबपोश अपराधियों ने घात लगा कर उन्हें घेर लिया और दो गोली मार दी. जख्मी हालत में मोहन सिंह ने भागने का प्रयास किया, लेकिन अपराधियों ने उन्हें खदेड़ कर पुन: गोलियों से छलनी कर दिया. इससे घटना स्थल पर ही मोहन सिंह की मौत हो गयी. बाद में अपराधी हवा में गोली चलाते हुए फरार हो गये. इधर घटना के बाद जैतपुर गांव में दहशत का माहौल है.

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