लखी पूजा आज, श्रद्धालुओं ने की तैयारी पूरी

Updated at :25 Oct 2015 8:47 PM
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लखी पूजा आज, श्रद्धालुओं ने की तैयारी पूरी

लखी पूजा आज, श्रद्धालुओं ने की तैयारी पूरी फोटो संख्या : 19फोटो कैप्सन : प्रतिमा को दिया जा रहा अंतिम रूप प्रतिनिधि , जमालपुर सोमवार शरद पूर्णिमा के अवसर पर लौह नगरी जमालपुर में बंगाली समुदाय द्वारा लखी पूजा मनाया जा रहा है. पूजा को लेकर जहां श्रद्धालुओं ने तैयारी मुकम्मल कर ली है. वहीं […]

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लखी पूजा आज, श्रद्धालुओं ने की तैयारी पूरी फोटो संख्या : 19फोटो कैप्सन : प्रतिमा को दिया जा रहा अंतिम रूप प्रतिनिधि , जमालपुर सोमवार शरद पूर्णिमा के अवसर पर लौह नगरी जमालपुर में बंगाली समुदाय द्वारा लखी पूजा मनाया जा रहा है. पूजा को लेकर जहां श्रद्धालुओं ने तैयारी मुकम्मल कर ली है. वहीं कलाकारों द्वारा प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है. बंगाली समुदाय धन-दौलत व सुख-समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी की पूजा लखी पूजा के रूप में करते हैं. मान्यता है कि लक्ष्मी देवी की पूजा करने से शारदीय दुर्गापूजा के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा जो अमन-शांति, सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. उसे पूरा करने के लिए समृद्धि की देवी मां भगवती का पुन: अविर्भाव होता है. श्रद्धालु तन और मन से उनकी आराधना कर देवी दुर्गा की कृपा को पूरा कराने की कामना कराते हैं. मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से उनके द्वारा श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इस संबंध में बंगाली बारोबारी समिति जमालपुर के मूर्तिकार तथा सह सचिव प्रह्लाद घोष ने बताया कि यह पूजा मात्र एक दिन का होता है. भगवती लक्ष्मी की पूजा बंगाली समुदाय के हर घर एवं मंदिरों में होती है. माता का प्रमुख प्रसाद नारियल, केतारी या ईख के अलावा पांच फल एवं आठ प्रकार के भुंजा होता है. जिनमें चना, चावल, मटर, मूंगफली, मकई, चूड़ा तथा काबुली चना मुख्य रूप से शामिल होता है. उन्होंने बताया कि लखी पूजा में ढाक व घंटी को बजाना पूरी तरह वर्जित माना गया है. माता की पूजा में केवल और केवल शंख बजाया जाता है. यह पूजा शरद पूर्णिमा की चांद निकलने के बाद की जाती है. पूजा के बाद आरती, भोग व प्रसाद वितरण किया जाता है. जबकि जिन स्थानों पर प्रतिमा स्थापित की जाती है उस प्रतिमा को दूसरे ही दिन ” निरंजन ” कर दिया जाता है. बंगाली समुदाय में मान्यता है कि किसी भी देवी का विसर्जन हो ही नहीं सकता. इसलिए ही शक्ति की अधिष्ठात्री मां दुर्गा अपने विसर्जन के बाद अपनी पुत्री रूपी मां लक्ष्मी को श्रद्धालुओं को धन-धान्य तथा सुख समृद्धि प्रदान करने के लिए पृथ्वी पर भेजती है.

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