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सरकारी उदासीनता का शिकार है महिला कॉलेज

8 Apr, 2015 8:04 pm
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सरकारी उदासीनता का शिकार है महिला कॉलेज

फोटो संख्या 23चित्र परिचय- महिला महा विद्यालय का भवन लखीसराय. जिले का एकमात्र महिला महाविद्यालय बड़हिया में स्थापित है. जहां स्नातक स्तर तक कला व विज्ञान के दर्जनों विषयों की पढ़ाई होती है. कला एवं विज्ञान विषयों के अतिरिक्त 100 से अधिक कंप्यूटर सेट के साथ कंप्यूटर शिक्षा की उत्कृष्ट व्यवस्था है. समाजवादी नेता स्व […]

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फोटो संख्या 23चित्र परिचय- महिला महा विद्यालय का भवन लखीसराय. जिले का एकमात्र महिला महाविद्यालय बड़हिया में स्थापित है. जहां स्नातक स्तर तक कला व विज्ञान के दर्जनों विषयों की पढ़ाई होती है. कला एवं विज्ञान विषयों के अतिरिक्त 100 से अधिक कंप्यूटर सेट के साथ कंप्यूटर शिक्षा की उत्कृष्ट व्यवस्था है. समाजवादी नेता स्व कपिलदेव सिंह के अथक प्रयास से वर्ष 1982 में इस कॉलेज की स्थापना की गयी थी. वर्तमान में 3500 से अधिक छात्रा इस कॉलेज में अध्ययनरत हैं. इस कॉलेज में पुस्तकालय एवं प्रयोगशाला कार्यरत हैं. इसके पुस्तकालय मे दस हजार से अधिक पुस्तकें एवं प्रयोगशाला में लाखों रुपये मूल्य के उपस्कर उपलब्ध हैं. यह कॉलेज बिहार सरकार के नारी शिक्षा अभियान को सफल करने में सक्षम हैं. फिर भी यह कॉलेज सरकारी उदासीनता के कारण अभी तक अंगीभूत नहीं हो पायी है. जबकि यूजीसी द्वारा प्रत्येक वर्ष इस कॉलेज को लाखों रुपये विकास मद के लिए अनुदान देती है.जिससे यह कॉलेज वित रहित शिक्षा के तहत सबसे महत्वपूर्ण कॉलेज हैं. इस कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य सच्चिदानंद शर्मा ने बताया कि यह महाविद्यालय यूजीसी का सारे मानक शर्तो को पूरा करती है. फिर भी बिहार सरकार नारी सशक्तिकरण के तहत सरकारी करण नहीं होने से इनके सशक्तिकरण पर प्रश्न चिन्ह लग गया है. विदित हो कि जिले का यह पहला नारी शिक्षा का केंद्र हैं जहां बिहार सरकार के गाइड लाइन के साथ ही प्रथम कक्षा से लेकर स्नातक स्तर तक की पढ़ाई एक ही परिसर में संपन्न करायी जा रही है.

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