हिमाचल व उत्तराखंड से आ रही सर्द हवा व कनकनी से सिहरा जीवन, पाला का खौफ

Published at :11 Jan 2018 5:41 AM (IST)
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हिमाचल व उत्तराखंड से आ रही सर्द हवा व कनकनी से सिहरा जीवन, पाला का खौफ

सार्वजनिक स्थलों पर कहीं भी समुचित अलाव की व्यवस्था नहीं लखीसराय : हिमाचल व उत्तराखंड से आ रही सर्द हवा के कारण दिन प्रतिदिन कड़ाके के ठंड से कंपकंपी बढ़ती ही जा रही है. हालांकि, इसमें सूर्य का दर्शन तो होता है, लेकिन सुबह शाम कंपकंपी वाला ठंड पड़ रहा है,लोगों का घरों से निकलना […]

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सार्वजनिक स्थलों पर कहीं भी समुचित अलाव की व्यवस्था नहीं

लखीसराय : हिमाचल व उत्तराखंड से आ रही सर्द हवा के कारण दिन प्रतिदिन कड़ाके के ठंड से कंपकंपी बढ़ती ही जा रही है. हालांकि, इसमें सूर्य का दर्शन तो होता है, लेकिन सुबह शाम कंपकंपी वाला ठंड पड़ रहा है,लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है. कंपकंपी के बावजूद नगर परिषद और नगर पंचायत द्वारा वंचित गरीबों के बीच सार्वजनिक स्थलों पर कही भी समुचित अलाव की व्यवस्था नहीं की गयी है. इससे परेशान मजदूरों के बीच काफी आक्रोश है. इधर, रबी फसल उत्पादक किसानों में दिलीप कुमार, रवींद्र कुमार, बौआ सिंह, अरुण कुमार, अमरनाथ सिंह आदि ने बताया कि जिस तरह ठंड बढ़ रही है और अधिक समय ले रहा है
, उससे पाला मारने का भय सताने लगा है. अधिकतम 15 से 20 दिन का ठंड व कुहासा रबी फसलों के लिये अधिक लाभदायक होता है. ज्यादा दिन बढ़ जाने से पाला मारने का भय होता है. बड़हिया नगर पंचायत के मनोज कुमार, सुनील कुमार सहित दर्जनों लोगों ने कहा कि नगर पंचायत में चार हजार रुपये अलाव के लिये लकड़ी खरीदा गया. एक दिन 24 वार्डों के प्रतिनिधि ने अपने अपने वार्ड में अलाव के लिये लकड़ी ले गये. इसके बाद से अलाव की व्यवस्था नहीं की गयी. जिसके कारण सार्वजनिक स्थानों पर खास कर ठेला रिक्शा चालकों, ऑटो चालकों रात भर लोहिया चौक, स्टेशन पर टायर जला कर राहत ले रहे हैं. वहीं ठंड के गिरने न्यूनतम तापमान से किसानों को पाला से बचाने के लिए आलू व रबी फसलों में दवा का छिड़काव करना जरूरी है. अन्यथा पाला मार देने का भय है. सुरेंद्र सिंह, शंभु सिंह, अरविंद कुमार ने कहा कि अगर ठंड का प्रकोप उसी तरह जारी रहा तो जिस प्रकार वर्ष 2003 मे विषैला सांप ठंड से निकल कर मर जाता था वैसा ही हालत हो गया है.
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