शिक्षक हैं नहीं, हो रहा नामांकन
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :03 Jul 2017 4:46 AM (IST)
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विडंबना. 43 प्लस टू उच्च विद्यालयों में कई विषयों के शिक्षक के पद खाली जिले के लगभग 43 प्लस टू उच्च विद्यालय में छात्रों के विषयवार शिक्षक उपल्ब्ध नहीं है. बावजूद इसके प्ल्स टू स्कूलों में छात्रों का नामांकन लिया जा रहा है. लखीसराय : जहां राज्य सरकार समावेशी शिक्षा के तहत शिक्षा की मौलिक […]
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विडंबना. 43 प्लस टू उच्च विद्यालयों में कई विषयों के शिक्षक के पद खाली
जिले के लगभग 43 प्लस टू उच्च विद्यालय में छात्रों के विषयवार शिक्षक उपल्ब्ध नहीं है. बावजूद इसके प्ल्स टू स्कूलों में छात्रों का नामांकन लिया जा रहा है.
लखीसराय : जहां राज्य सरकार समावेशी शिक्षा के तहत शिक्षा की मौलिक अधिकार की बात जनता से करती है वहीं जिले के लगभग सभी प्लस टू विद्यालय में बिना शिक्षक के धड़ल्ले से छात्रों के नामांकन किया जा रहा है. जिले के लगभग 43 प्लस टू उच्च विद्यालय में छात्रों के विषयवार शिक्षक उपल्ब्ध नहीं है. किसी विद्यालय में हिंदी के शिक्षक हैं तो अंगरेजी की नहीं, किसी में गणित के तो जंतु विज्ञान का नहीं. इतना ही नहीं किसी भी विद्यालय में भौतिकी एवं रसायन शास्त्र के शिक्षक नहीं हैं. प्रभात लखीसराय-पटना सीमा के नजदीक ज्ञान भारती प्लस टू उच्च विद्यालय है जहां एक भी शिक्षक प्लस टू के लिए नहीं है.
इसके बावजूद छात्रों का नामांकन किया जा रहा है. इस विद्यालय की स्थापना सन 1968 में स्वर्गीय रामश्रय बाबू ने अपने धर्मपत्नी मालती देवी के नाम पर की थी. जिसमें अष्टम वर्ग से 10वीं कक्षा तक पठन-पाठन की व्यवस्था की गयी थी. इस विद्यालय में गांव के लोग अपने बच्चे का नामांकन के लिए मारामारी करते थे. जब तक विद्यालय सरकारी नही हुआ था तब तक हर विषय के शिक्षक उपलब्ध थे और शिक्षक बच्चे को पठन-पाठन कराते थे. जब इस विद्यालय का सरकारीकरण हुआ तो पढ़ाई की गुणवत्ता धीरे-धीरे समाप्त हो गयी. इस विद्यालय में गणित विषय के शिक्षक नहीं रहने के कारण मैट्रिक व इंटर परीक्षा 2017 का रिजल्ट खराब रहने का खामियाजा जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग, व अभिभावक को कोपाभाजन का शिकार होना पड़ता है. बुद्धिजीवी अशोक पांडेय, अरुण कुमार, शिक्षक बृजनंदन कुमार ने कहा कि सरकार को समावेशी शिक्षा के तहत विद्यालय में शिक्षा के मौलिक अधिकार के तहत बच्चों को सारी सुविधा प्रदान करना चाहिए था लेकिन विद्यालय में सुविधा नदारद है. कहीं शिक्षक तो कहीं बेंच-डेस्क तो कहीं भवन तो कहीं पेय जल का अभाव है, ऐसे में समावेशी शिक्षा की कल्पना करना बेइमानी होगी.
यह सच है कि बिना शिक्षक के इंटर में छात्रों का नामांकन लिया गया है. छात्रों के अध्यापन माध्यमिक शिक्षकों के द्वारा ही कराया जाता है. प्राचार्य ने कहा कि प्लस टू के शिक्षक के लिए कई बार विभाग के वरीय पदाधिकारी को पत्र के माध्यम से जानकारी दी गयी लेकिन विभाग द्वारा इस पर कोई कार्रवाई नहीं
की गयी.
संजय कुमार, प्रभारी प्राचार्य
जिले के जो विद्यालयों में प्लस टू का शिक्षक नहीं है, वहां माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक द्वारा छात्रों को पठन-पाठन कराने का आदेश विद्यालय प्राचार्य को दिया गया है ताकि बच्चों का पठन-पाठन बाधित न हो.
परशुराम सिंह, डीपीओ, लेखा योजना
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