विद्यालय को भवन नहीं, धूप में पढ़ रहे नौनिहाल
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :29 Jun 2017 5:22 AM (IST)
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वर्ष 2003 में ही नवसृजित प्राथमिक विद्यालय शरमा मुसहरी की हुई थी स्थापना लखीसराय : सरकार द्वारा शिक्षा पर अधिक ध्यान देने व खर्च करने के बावजूद एक विद्यालय ऐसा भी है जहां खुले आसमान के नीचे नौनिहाल शिक्षा ग्रहण करने को विवश है. कभी खुले आसमान, कभी बगल के पेड़ के नीचे तो कभी […]
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वर्ष 2003 में ही नवसृजित प्राथमिक विद्यालय शरमा मुसहरी की हुई थी स्थापना
लखीसराय : सरकार द्वारा शिक्षा पर अधिक ध्यान देने व खर्च करने के बावजूद एक विद्यालय ऐसा भी है जहां खुले आसमान के नीचे नौनिहाल शिक्षा ग्रहण करने को विवश है. कभी खुले आसमान, कभी बगल के पेड़ के नीचे तो कभी शेड में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों के साथ शिक्षा ग्रहण कर रहे इन नौनिहालों के प्रति किसी का ध्यान नहीं है. जिले के रामगढ़ चौक – शरमा संपर्क पथ पर स्थित शरमा मुसहरी में संचालित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय शरमा मुसहरी को आज तक अपना भवन नसीब नहीं हुआ है.
अपने स्थापना काल से आज तक यह भवन खुले आसमान के नीचे संचालित किया जा रहा है. जिससे यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चे गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा से वंचित रह रहे हैं. इस विद्यालय में प्रभारी प्राचार्य मंजु कुमारी सहित तीन शिक्षक उपस्थित थे. इन शिक्षकों के द्वारा कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को शिक्षा दी जा रही थी. छोटे छोटे बच्चे खुले आसमान में सूर्य की तीखी धूप के बीच शिक्षा ग्रहण करने को विवश दिखे. इन बच्चों के लिये शिक्षा विभाग की ओर से भवन निर्माण नहीं कराया गया .
बारिश व शीतलहर में बगल स्थित शेड में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र पर शरण लेते हैं बच्चे
ग्रामीणों ने बताया कि ज्यादा धूप होने पर बच्चे बगल में स्थित पीपल के पेड़ के नीचे बैठ कर या फिर बारिश होने पर वहीं पास में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र में बैठ कर शिक्षा ग्रहण करते हैं. विद्यालय की प्राचार्य मंजु कुमारी ने बताया कि वर्ष 2003 में इस विद्यालय की स्थापना की गयी थी. तब से आज तक विद्यालय इसी प्रकार संचालित किया जा रहा है. इस विद्यालय में ज्यादातर मुसहरी टोला के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं. उन्होंने बताया कि वर्तमान में 91 बच्चे नामांकित है. इन बच्चों को पदस्थापित शिक्षकों द्वारा शिक्षा दिया जा रहा है. हर मौसम में बच्चों को होने वाली कठिनाई के संबंध में उन्होंने बताया कि वे इसमें क्या कर सकते हैं. विभाग भवन बना देता तो उसमे राहत महसूस करते हुए बच्चे शिक्षा ग्रहण कर सकते थे. लेकिन अभी तक यह विद्यालय भवन हीन है. उन्होंने बताया कि बरसात के दिनों में काफी परेशानी होती है. बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों के साथ किसी प्रकार बैठ कर शिक्षा ग्रहण करते हैं.
बोले अधिकारी
डीपीओ (सर्व शिक्षा अभियान) दिनेश चौधरी ने बताया कि संभवत: उक्त विद्यालय को जमीन नहीं है. उन्होंने बताया कि चार वर्ष पूर्व जिले के सभी नवसृजित विद्यालय जिसके पास जमीन थी उसे भवन के लिये राशि उपलब्ध करा दी गयी थी. इधर पिछले तीन वर्ष से राशि उपलब्ध नहीं है. इस संबंध में जमीन होने की जांच करा कर राशि आवंटन होने पर भवन निर्माण कराया जायेगा.
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