चार दिन में 24 घंटे ड‍्यूटी वेतन उठा रहे पूरे महीने का

Published at :27 Jun 2017 10:46 AM (IST)
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चार दिन में 24 घंटे ड‍्यूटी वेतन उठा रहे पूरे महीने का

माह में चार दिन पूरे 24 घंटे ड‍्यूटी कर चिकित्सक पूरे महीने का वेतन उठा रहे हैं. यह हाल जिले के बड़हिया रेफरल अस्पताल का है. परिणामस्वरूप रोगियों को फिर उन चिकित्सकों से इलाज कराने के लिए महीने भर इंतजार करना होता है. यही हाल कमोवेश जिले के सभी अस्पतालों का है. लखीसराय : बड़हिया […]

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माह में चार दिन पूरे 24 घंटे ड‍्यूटी कर चिकित्सक पूरे महीने का वेतन उठा रहे हैं. यह हाल जिले के बड़हिया रेफरल अस्पताल का है. परिणामस्वरूप रोगियों को फिर उन चिकित्सकों से इलाज कराने के लिए महीने भर इंतजार करना होता है. यही हाल कमोवेश जिले के सभी अस्पतालों का है.

लखीसराय : बड़हिया रेफरल अस्पताल में महिला चिकित्सक छोड़ कर सात चिकित्सक पदस्थापित हैं. जिनमें डॉ विनोद कुमार सिन्हा अस्पताल प्रभारी के रूप में, जबकि डॉ उमेश प्रसाद सिंह, डॉ सुरेंद्र कुमार, डॉ सुभाष पासवान, डॉ मारुति नंदन, डॉ अशोक कुमार चौधरी, डॉ अनिल कुमार ठाकुर चिकित्सक के रूप में पदस्थापित हैं. ये सभी चिकित्सक पटना, बाढ़, मोकामा, बेगूसराय, मुंगेर आदि स्थानों से अपना-अपना निजी क्लिनिक चला कर माह में चार दिन रोस्टर के मुताबिक 24 घंटे लगातार ड‍्यूटी कर शेष 26 दिन का वेतन बिना काम किये ही उठा रहे हैं. जिससे सरकार को लाखों रुपये वेतन मद में बिना किसी सेवा के खर्च करना पड़ रहा है.

क्षेत्र के कोई मरीज सोमवार को अपना इलाज जिस चिकित्सक से कराते हैं उनको पुन: इलाज के लिये छह दिन इंतजार करना होता है. रोगी संतोष तांती ने बताया कि सरकार का कहना है कि अस्पताल में चिकित्सक, दवा, जांच, लेबर रूम में सारी सुविधा उपलब्ध हैं. लेकिन जब अस्पताल पहुंचते हैं तब सर्जन या फिजिशियन आउट डोर में एक ही डॉक्टर बैठ कर सभी बीमारियों का इलाज करते हैं. 33 प्रकार की दवाओं में लगभग एक दर्जन ही दवा उपलब्ध हैं. लेबर रूम में स्लाइन व एक सूई छोड़ कर कोई दवा उपलब्ध नहीं है.

ऐसी स्थिति में लोग मजबूरी में सरकारी अस्पताल से निजी क्लीनिक में जाना पसंद कर रहे हैं. आशुतोष कुमार ने कहा कि प्रत्येक दिन विशेषज्ञ चिकित्सक चाहे वह शिशु चिकित्सक हो, फिजिशियन हो या फिर सर्जन, उन्हें अस्पताल में रह कर मरीजों का इलाज करना चाहिए, लेकिन यहां तो हाल यह है कि एक ही चिकित्सक सभी प्रकार के मर्ज की दवा कर रहे हैं. रोगियों को अगर अगले दिन कुछ कष्ट हुआ तो उसे छह दिन का इंतजार करना पड़ता है. जबकि रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष एसडीएम होते हैं. विपिन कुमार ने बताया कि यह रेफर अस्पताल बन गया है. विदित हो कि पटना एवं लखीसराय मुख्य मार्ग पर अवस्थित इस अस्पताल में 300-400 रोगी आउटडोर में प्रतिदिन इलाज के लिये आते हैं. वही सड़क दुर्घटना में घायल हुए मरीज भी पहले इसी अस्पताल में इलाज के लिये आते हैं. लेकिन अस्पताल की इस प्रकार की व्यवस्था से मरीजों का इलाज कम ही हो पाता है.

आउटडोर में नहीं हुआ इलाज, सिर्फ इमरजेंसी सेवा ही रहा उपलब्ध

ईद की छुट्टी की वजह से आउटडोर में नही हुआ इलाज

लखीसराय. ईद पर्व को लेकर घोषित राष्ट्रीय छुट्टी के कारण अस्पताल सहित अन्य सरकारी संस्थान बंद रहा. अस्पताल में इमरजेंसी सेवा में चिकित्सक उपलब्ध थे लेकिन आउटडोर में चिकित्सक नहीं थे. चिकित्सक के अभाव में मरीज बिना इलाज कराये ही वापस लौट गये. सोमवार को जिले के सदर अस्पताल, रेफरल अस्पताल , प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र , अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र बंद रहा. हालांकि इन अस्पतालों में इमरजेंसी सेवा कार्य कर रहा था.

लेकिन साधारण रोगियों का इलाज आउटडोर में नहीं किया जा सका. इस दौरान इलाज कराने पहुंचे मरीज बिना इलाज के ही वापस लौटते देखे गये. रेफरल अस्पताल के चिकित्सक ने बताया कि ईद को लेकर छुट्टी है. इमरजेंसी में चिकित्सक उपलब्ध हैं. सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ मुकेश कुमार ने कहा कि ईद की छुट्टी के कारण आउटडोर बंद है. इमरजेंसी में चिकित्सक उपलब्ध हैं और मरीज के आने पर इलाज किया जायेगा.

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