विश्व हॉस्पिस दिवस 2025 :सदर अस्पताल में जागरूकता सत्र का किया गया आयोजन

विश्व हॉस्पिस एवं पल्लिएटिव देखभाल दिवस 2025 के अवसर पर सदर अस्पताल, किशनगंज में जागरूकता सत्र आयोजित किया गया.
गंभीर रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव के संकल्प के साथ स्वास्थ्यकर्मियों ने लिया भागकिशनगंज.विश्व हॉस्पिस एवं पल्लिएटिव देखभाल दिवस 2025 के अवसर पर सदर अस्पताल, किशनगंज में जागरूकता सत्र आयोजित किया गया. इसका उद्देश्य गंभीर रोगियों और उनके परिवारों को उचित देखभाल, दर्द प्रबंधन और मानसिक सहारा उपलब्ध कराना था.इस सत्र में उपस्थित जिला गैर-संचारी रोग अधिकारी डॉ उर्मिला कुमारी ने चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को संवेदनशील सेवा के महत्व से अवगत कराया.
पल्लिएटिव देखभाल: जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा
सत्र में यह स्पष्ट किया गया कि पल्लिएटिव देखभाल केवल इलाज नहीं है, बल्कि रोगी की शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर भी ध्यान देती है. यह सेवा जीवन की अंतिम अवधि को सहज, गरिमापूर्ण और पीड़ा मुक्त बनाने का प्रयास करती है. डॉ उर्मिला कुमारी ने कहा कि पल्लिएटिव देखभाल किसी रोग का अंत नहीं, बल्कि मानवता की शुरुआत है. मरीज को केवल इलाज नहीं, बल्कि संवेदना, संवाद और सहारा भी चाहिए.थीम 2025 : ‘सर्वव्यापी पल्लिएटिव देखभाल की उपलब्धि
इस वर्ष की थीम है “सर्वव्यापी पल्लिएटिव देखभाल की उपलब्धि”, जिसका उद्देश्य गंभीर रोगियों तक पल्लिएटिव देखभाल की सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करना है.डॉ उर्मिला ने बताया कि यह थीम स्वास्थ्य प्रणाली को याद दिलाती है कि हम केवल इलाज ही नहीं, बल्कि देखभाल और सहारा भी समान रूप से दें. किशनगंज जैसे सीमावर्ती जिलों में यह सेवा और महत्वपूर्ण है, क्योंकि विशेषज्ञ देखभाल तक पहुंच हमेशा आसान नहीं होती.स्वास्थ्यकर्मियों और समुदाय की भूमिका
कार्यक्रम में डॉक्टरों, नर्सों, एएनएम और अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को हॉस्पिस और पल्लिएटिव देखभाल की अवधारणा और दिशा-निर्देशों से अवगत कराया गया.डॉ उर्मिला कुमारी ने कहा कि पल्लिएटिव देखभाल केवल मरीज तक सीमित नहीं, बल्कि परिवार और समुदाय तक इसका प्रभाव होता है. प्रशिक्षण और जागरूकता आवश्यक हैं ताकि हर मरीज गरिमापूर्ण जीवन जी सके.साथ ही यह बताया गया कि समुदाय को जागरूक करना जरूरी है, ताकि गंभीर रोग से जूझ रहे परिवार के सदस्य सही समय पर सहायता और देखभाल प्राप्त कर सकें.सदर अस्पताल में पल्लिएटिव सेवाओं का विस्तार
सत्र में अस्पताल प्रशासन ने बताया कि आने वाले महीनों में परामर्श केंद्र और दर्द प्रबंधन इकाई स्थापित की जाएगी. इसके साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों को पल्लिएटिव देखभाल प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि मरीजों को संवेदनशील और समग्र सेवा मिल सके.कार्यक्रम के अंत में डॉ उर्मिला कुमारी ने कहा कि हर मरीज के लिए हमारा एक स्पर्श, मुस्कान या शब्द सबसे बड़ी दवा हो सकती है. यही हॉस्पिस का असली अर्थ है संवेदना में चिकित्सा.विश्व स्तर पर जागरूकता और भविष्य की राह
विश्व हॉस्पिस दिवस का आयोजन विश्व हॉस्पिस और पल्लिएटिव देखभाल संघ द्वारा किया जाता है. इसका उद्देश्य है कि जीवन के अंतिम चरण में भी हर व्यक्ति को गरिमा और देखभाल का अधिकार मिले. भारत में भी पल्लिएटिव देखभाल सेवाओं का दायरा बढ़ा है और विभिन्न राज्यों में प्रशिक्षण, सेवा केंद्र और समुदाय आधारित मॉडल विकसित किए जा रहे हैं. सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने कहा कि सदर अस्पताल में आयोजित यह सत्र गंभीर रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव का उदाहरण है. यह दिखाता है कि केवल इलाज ही नहीं, बल्कि सहानुभूतिपूर्ण देखभाल और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना भी स्वास्थ्य सेवा का अहम हिस्सा है. यह जागरूकता अभियान समाज में संवेदना से सेवा का संदेश फैलाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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