धूमधाम से मनायी संत शिरोमणि रविदास की जयंती, माल्यार्पण कर अर्पित किया श्रद्धासुमन

Updated at : 12 Feb 2025 8:24 PM (IST)
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धूमधाम से मनायी संत शिरोमणि रविदास की जयंती, माल्यार्पण कर अर्पित किया श्रद्धासुमन

शहर के हलीम चौक स्थित काली मंदिर प्रांगण में संत शिरोमणि रविदास की जयंती धूमधाम से मनायी गयी.

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किशनगंज. शहर के हलीम चौक स्थित काली मंदिर प्रांगण में संत शिरोमणि रविदास की जयंती धूमधाम से मनायी गयी. इस मौके पर संत शिरोमणि रविदास के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया. साथ ही उनकी जीवनी व विचारों पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला गया. चंद्र किशोर राम ने कहा कि संत शिरोमणि रविदास जी का जन्म हिंदू कैलेंडर के आधार पर माघ माह की पूर्णिमा तिथि को हुआ था. इसलिए हर साल माघ पूर्णिमा को रविदास जयंती मनाते हैं. धार्मिक प्रवृत्ति के दयालु एवं परोपकारी व्यक्ति थे. उनका जीवन दूसरों की भलाई करने में और समाज का मार्गदर्शन करने में व्यतीत हुआ. वे भक्तिकालीन संत एवं महान समाज सुधारक थे. उन्होंने कहा कि उनके उपदेशों एवं शिक्षाओं से आज भी समाज को मार्गदर्शन मिलता है. संत रविदास जी को रैदास, गुरु रविदास व रोहिदास जैसे नामों से भी जाना जाता है. संत रविदास जी ने कहा था कि व्यक्ति पद या जन्म से बड़ा या छोटा नहीं होता है. वह गुणों या कर्मों से बड़ा या छोटा होता है. वे समाज में वर्ण व्यवस्था के विरोधी थे. उनका कहना था कि सभी प्रभु की संतान हैं. किसी की कोई जात नहीं है. उन्होंने कहा कि ने कहा कि संत रविदास जी कर्म को प्रधानता देते थे. उनका कहना था कि व्यक्ति को कर्म में विश्वास करना चाहिए. आप कर्म करेंगे तभी आपको फल की प्राप्ति होगी. फल की चिंता से कर्म न करें. संत रविदास जी ने कहा था कि सच्चे मन में ही प्रभु का वास होता है. जिनके मन में छल कपट होता है. उनके अंदर प्रभु का वास नहीं होता है. संत रविदास ने कहा है कि मन चंगा तो कठौती में गंगा, का मथुरा का द्वारका, का काशी का हरिद्वार. रैदास खोजा दिल आपना, तउ मिलिया दिलदार. इस मौके पर दीपक राम, ओम शर्मा, गुलशन राम एवं दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद थे.

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