विकास की धीमी रफ्तार से सहमे ग्रामीण: मूसलाधार बारिश में 'तालाब' बनी पौआखाली-रसिया मुख्य सड़क

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गड्ढों में तब्दील पौआखाली-रसिया की जलमग्न पीएमजीएसवाई सड़क | Prabhat Khabar Network

गड्ढों में तब्दील पौआखाली-रसिया की जलमग्न पीएमजीएसवाई सड़क | Prabhat Khabar Network

किशनगंज जिले के किशनगंज जिले के पौआखाली प्रखंड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्माणाधीन मुख्य सड़क बारिश के कारण कीचड़ और गहरे गड्ढों में तब्दील हो गई है. ग्रामीणों का गुस्सा है कि गलत प्लानिंग और लापरवाही के कारण सड़क विकास की जगह विनाश का पर्याय बन गई है. प्रभावित ग्रामीण तत्काल निर्माण कार्य पूरा करने की मांग कर रहे हैं.

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किशनगंज जिले के पौआखाली प्रखंड अंतर्गत पैकपाड़ा, भेभड़ा और नानकार सहित दर्जनों गांवों के ग्रामीणों के लिए मॉनसून की हर एक सुबह नई मुसीबत लेकर आ रही है. 'प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना' के तहत निर्माणाधीन पौआखाली–रसिया–साबोडांगी–एनएच 327ई से कादोगांव बाजार होते हुए सुखानी बॉर्डर तक जाने वाली मुख्य सड़क इस समय विकास की जगह विनाश का पर्याय बनती दिख रही है. बारिश के कारण पूरी सड़क कीचड़ और गहरे गड्ढों में तब्दील हो गई है, जिससे राहगीरों और स्थानीय ग्रामीणों का सुरक्षित घर लौटना भी किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं रह गया है.

जोगीमोहन धार से पौआखाली बाजार तक का हिस्सा बना 'टालाब'

बरसात का मौसम शुरू होते ही करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना की तकनीकी खामियां और निर्माण एजेंसी की लापरवाही उजागर हो गई है:

  • सड़क और गड्ढे का अंतर मिटा: जोगीमोहन धार से लेकर पौआखाली बाजार तक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा पूरी तरह से विशाल गड्ढों में तब्दील हो चुका है. जलजमाव के कारण दोपहिया वाहन चालक रोजाना गिरकर चोटिल हो रहे हैं, जबकि ई-रिक्शा और तिपहिया वाहन पलटने की कगार पर रहते हैं.
  • ठप पड़ा है कार्य: लगातार हो रही आफत की बारिश के बहाने निर्माण एजेंसी ने पिछले कई दिनों से यहां काम पूरी तरह से बंद कर रखा है, जिससे कीचड़ का साम्राज्य और अधिक फैल गया है.

गलत प्लानिंग का शिकार: सबसे जर्जर हिस्से को छोड़कर सीमा से शुरू हुआ काम

ग्रामीणों का सबसे बड़ा आरोप निर्माण कार्य की त्रुटिपूर्ण रूपरेखा (प्लानिंग) को लेकर है. स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों के अनुसार:

  1. प्राथमिकता की अनदेखी: इस परियोजना के तहत लगभग 5.5 मीटर चौड़ी चमचमाती सड़क और छह छोटे-बड़े पुल-पुलियों का निर्माण किया जाना है. कुछ पुल बन भी चुके हैं, लेकिन निर्माण एजेंसी ने काम सुखानी बॉर्डर (अंतिम छोर) की तरफ से शुरू किया.
  2. जर्जर मोड़ पर सुस्ती: एजेंसी ने उस हिस्से को प्राथमिकता नहीं दी जो सबसे ज्यादा आवागमन वाला और पिछले तीन वर्षों से सबसे ज्यादा बदहाल था यानी रसिया के पास जोगीमोहन धार से पौआखाली बाजार तक का इलाका. अगर पहले इस हिस्से की मरम्मत या निर्माण किया जाता, तो हजारों की आबादी को भारी फजीहत नहीं झेलनी पड़ती.

फसल, पढ़ाई और इलाज सब दांव पर; वैकल्पिक रास्ते भी नहीं

यह मुख्य मार्ग सिर्फ एक संपर्क सड़क नहीं है, बल्कि इस पूरे सीमावर्ती इलाके की आर्थिक और सामाजिक जीवनरेखा है. प्रतिदिन सैकड़ों किसान इसी रास्ते से अपनी चायपत्ती, धान और मक्के की फसल लेकर कृषि मंडियों तक जाते हैं.

यही नहीं, स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राएं और गंभीर मरीजों को अनुमंडल व जिला अस्पताल ले जाने वाली आपातकालीन एम्बुलेंस सेवाएं भी घंटों इस कीचड़युक्त बदहाल सड़क पर फंसी रहती हैं. ग्रामीणों का गुस्सा इस बात को लेकर भी है कि निर्माण कार्य के दौरान राहगीरों के सुरक्षित आवागमन के लिए किसी भी तरह के वैकल्पिक मार्ग या अस्थायी राबिश (मिट्टी-रोड़ा) बिछाने की व्यवस्था नहीं की गई.

विभागीय मॉनिटरिंग पर उठे गंभीर सवाल, जिला प्रशासन से गुहार

करोड़ों रुपये की इस सरकारी परियोजना की कछुआ चाल को देखकर अब ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) की कार्यप्रणाली और उसकी नियमित मॉनिटरिंग पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं. क्या कभी विभागीय इंजीनियरों ने बरसात के बीच इस सड़क की जमीनी हकीकत का भौतिक सत्यापन किया है? क्या संबंधित संवेदक (ठेकेदार) से इस कदर हो रही लेती-लतीफी का स्पष्टीकरण मांगा गया है?

अब पैकपाड़ा, भेभड़ा और नानकार के आक्रोशित ग्रामीणों ने जिलाधिकारी (DM) किशनगंज और ग्रामीण कार्य विभाग के वरीय अधिकारियों से सामूहिक गुहार लगाई है कि जोगीमोहन धार से पौआखाली बाजार तक के सबसे प्रभावित हिस्से को सर्वोच्च प्राथमिकता सूची में शामिल कर युद्धस्तर पर काम पूरा कराया जाए, ताकि किसी बड़ी जान-माल की दुर्घटना को समय रहते टाला जा सके.


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