किशनगंज में मानसून का रौद्र रूप: 72 घंटे भारी बारिश और 'फ्लैश फ्लड' का हाई अलर्ट
प्रतीकात्मक फोटो | Prabhat Khabar Network
मानसून का रौद्र रूप किशनगंज में एक बार फिर सक्रिय हो गया है. अगले 72 घंटों में भारी से अत्यंत भारी वर्षा, आंधी-तूफान और वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है. जिले के अधिकांश प्रखंडों में 'फ्लैश फ्लड' का गंभीर खतरा मंडरा रहा है.
सीमांचल के किशनगंज जिले में मानसून ने एक बार फिर अपना प्रचंड और रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और स्थानीय मौसम केंद्र द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, किशनगंज जिले में अगले 24 से 72 घंटों के भीतर भारी से अत्यंत भारी वर्षा, आंधी-तूफान और भीषण वज्रपात (आकाशीय बिजली) की आशंका है. इसके साथ ही भौगोलिक रूप से संवेदनशील इस जिले के अधिकांश प्रखंडों में 'फ्लैश फ्लड' (अचानक बाढ़) का गंभीर खतरा मंडरा रहा है, जिसे देखते हुए जिला प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट मोड पर डाल दिया गया है.
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प्रखंडवार स्थिति: कहां कितना है खतरा?
लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण जिले के अलग-अलग प्रखंडों में स्थिति तेजी से बदल रही है. मौसम विभाग के इनपुट के आधार पर सभी क्षेत्रों पर विशेष नजर रखी जा रही है:
- किशनगंज मुख्यालय: शहरी क्षेत्र में लगातार जारी बारिश के कारण ड्रेनेज (जलनिकासी) सिस्टम पर भारी दबाव है. शहर के निचले मोहल्लों, सदर अस्पताल परिसर, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और मुख्य लाइफलाइन सड़कों पर जलभराव की गंभीर आशंका को देखते हुए नगर परिषद को चौकस रहने को कहा गया है.
- टेढ़ागाछ (सबसे संवेदनशील): इस प्रखंड को जिले के सबसे संवेदनशील जोन में रखा गया है. भारी वर्षा के कारण यहां की ग्रामीण सड़कों के टूटने और बस्तियों में अचानक पानी भरने का खतरा सबसे अधिक है. यहां राहत एवं बचाव दल (SDRF) को स्टैंडबाई पर रहने के निर्देश हैं.
- दिघलबैंक व ठाकुरगंज (सीमावर्ती क्षेत्र): नेपाल और दार्जिलिंग की तराई से सटे होने के कारण इन दोनों प्रखंडों में फ्लैश फ्लड का रिस्क सबसे ज्यादा है. पहाड़ी इलाकों में होने वाली भारी बारिश का पानी सीधे यहां की मेची और अन्य छोटी सहायक नदियों में अचानक उफान ला सकता है.
- बहादुरगंज व पोठिया: इन दोनों प्रखंडों के निचले इलाकों, कृषि क्षेत्रों (धान के खेतों) और ग्रामीण संपर्क मार्गों के पूरी तरह जलमग्न होने की आशंका जताई गई है. स्थानीय जलधाराओं के पास रहने वाली आबादी को सतर्क किया गया है.
- कोचाधामन: इस प्रखंड में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और सामान्य वर्षा (Rain Showers) दर्ज की गई है, लेकिन मौसम के तेवर देखते हुए जलजमाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
आपातकालीन गाइडलाइन: क्या करें और क्या न करें
संभावित आपदा और जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने आम नागरिकों और किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सलाह जारी की है:
- जलस्रोतों से दूरी: किसी भी परिस्थिति में उफनती नदियों, बरसाती नालों, जलमग्न पुल-पुलियों या रपटों को पार करने का प्रयास न करें.
- वज्रपात से सुरक्षा: आसमान में तेज कड़क या बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों, खेतों, बिजली के खंभों, मोबाइल टावरों या ऊंचे पेड़ों के नीचे शरण बिल्कुल न लें. पक्के मकानों के अंदर रहना ही सबसे सुरक्षित है.
- सामान की सुरक्षा: निचले और बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले ग्रामीण अपने मवेशियों, खाद्यान्न, जरूरी कागजात और दवाओं को पहले ही ऊंचे व सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर लें.
- अफ़वाहों से बचें: केवल मौसम विभाग और जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं और चेतावनियों पर ही भरोसा करें.
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बिहार में मानसून ट्रफ की सक्रियता के कारण अगले कुछ दिनों तक मौसम का यह कड़ा रुख जारी रहेगा. प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों के अंचलाधिकारियों (CO) और थाना प्रभारियों को पल-पल की रिपोर्ट नियंत्रण कक्ष को भेजने की हिदायत दी है.
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