रेतुआ नदी के कटाव से धपरटोला पर मंडराया अस्तित्व का संकट, ग्रामीणों में बढ़ी चिंता
रेतुआ नदी के कटाव से प्रभावित धपरटोला गांव का इलाका
Retua River Erosion: रेतुआ नदी के कटाव से धपरटोला गांव पर संकट गहरा गया है. ग्रामीणों ने कटावरोधी कार्य की मांग की है.
किशनगंज से गौरव कुमार की रिपोर्ट:
Retua River Erosion: प्रखंड क्षेत्र के झुनकी मुशहारा पंचायत अंतर्गत धपरटोला गांव रेतुआ नदी के लगातार हो रहे कटाव की चपेट में है. नदी के तेज कटाव ने गांव के अस्तित्व पर ही खतरा खड़ा कर दिया है. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बरसात और बाढ़ के दौरान रेतुआ नदी विकराल रूप धारण कर लेती है, जिससे सैकड़ों परिवार प्रभावित होते हैं और बड़ी मात्रा में कृषि योग्य भूमि नदी में समा जाती है.
ग्रामीणों के अनुसार पिछले कई वर्षों से कटाव की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है. नदी किनारे बसे कई परिवारों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है. वहीं किसानों की उपजाऊ जमीन नदी में विलीन होने से उनकी आजीविका पर भी गहरा संकट उत्पन्न हो गया है.
हर साल नदी में समा रही दर्जनों एकड़ जमीन
ग्रामीणों का कहना है कि रेतुआ नदी का कटाव इतनी तेजी से हो रहा है कि हर वर्ष दर्जनों एकड़ उपजाऊ भूमि नदी के गर्भ में समा जाती है. इससे खेती-किसानी पर निर्भर परिवारों की आर्थिक स्थिति लगातार प्रभावित हो रही है. कई किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.
कई बार उठी मांग, नहीं हुई ठोस पहल
स्थानीय लोगों ने बताया कि कटाव की समस्या को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन देकर कटाव निरोधी कार्य कराने की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है. इससे ग्रामीणों में निराशा और आक्रोश बढ़ता जा रहा है.
समय रहते नहीं हुई कार्रवाई तो बढ़ेगा संकट
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कटावरोधी कार्य शुरू नहीं कराया गया तो धपरटोला का बड़ा हिस्सा नदी में समा सकता है और सैकड़ों परिवार बेघर होने को विवश हो जाएंगे. लोगों ने जिला प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से अविलंब स्थायी कटाव निरोधी उपाय करने की मांग की है, ताकि गांव, घर और किसानों की बहुमूल्य कृषि भूमि को बचाया जा सके.
ग्रामीणों का मानना है कि समय पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है.
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By Shruti Kumari
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