मॉडल स्कूल नामांकन में कई शर्तें, छात्रों में भ्रम और असंतोष

शिक्षा विभाग की ओर से प्रखंड स्तर पर चयनित मॉडल विद्यालयों में सत्र 2026-27 से नामांकन शुरू करने का आदेश जारी किया गया है
ठाकुरगंज. शिक्षा विभाग की ओर से प्रखंड स्तर पर चयनित मॉडल विद्यालयों में सत्र 2026-27 से नामांकन शुरू करने का आदेश जारी किया गया है, लेकिन इसके साथ लागू की गयी शर्तों ने छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम और असंतोष पैदा कर दिया है. जारी निर्देश के अनुसार, मॉडल विद्यालयों में नामांकन केवल कक्षा नौ से ही शुरू होगा और इसके लिए छात्रों का चयन एनएमएमएस परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाएगा. कम से कम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य रखा गया है, जिसके बाद मेरिट सूची तैयार कर मात्र 40 छात्रों का चयन किया जायेगा. सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि 40 से अधिक छात्र योग्य पाए जाते हैं, तो बाकी छात्रों को प्रवेश से वंचित कर दिया जायेगा, जबकि उन्हें किसी प्रकार का दावा मान्य नहीं होगा. वहीं, यदि सीटें खाली रह जाती हैं, तब अन्य छात्रों को मौका दिया जायेगा, जिससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. निजी विद्यालयों के छात्रों को इस सत्र में नामांकन से बाहर रखने का निर्णय भी विवाद का कारण बन रहा है. अभिभावकों का कहना है कि इससे समान अवसर के अधिकार का उल्लंघन होता है. साथ ही, अंतिम निर्णय का अधिकार जिला शिक्षा पदाधिकारी को दिए जाने से भी प्रक्रिया में पक्षपात की आशंका जतायी जा रही है. दस्तावेजों की लंबी सूची, सीमित सीटें और स्पष्ट प्रवेश परीक्षा की अनुपस्थिति ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया है. हालांकि विभाग का कहना है कि यह पहल उन्नत शिक्षा-उज्ज्वल भविष्य योजना के तहत की जा रही है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक प्रखंड में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समावेशी नहीं बनाया गया, तो यह योजना अपने उद्देश्य से भटक सकती है.
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