लाखों की लागत से बना शवदाह गृह बना बदहाली की मिसाल, रसिया पंचायत में रख-रखाव पर उठे सवाल

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लाखों की लागत से बना शवदाह गृह बना बदहाली की मिसाल, रसिया पंचायत में रख-रखाव पर उठे सवाल

झाड़ जंगलों से घिरा रसिया पंचायत का शवदाह गृह

Kishanganj News: जिस शवदाह गृह को लोगों की अंतिम यात्रा को सम्मानजनक बनाने के लिए बनाया गया था, आज वहां झाड़-झंखाड़, ऊंची घास और गंदगी का कब्जा है. हालात ऐसे हैं कि अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोग भी डर और असुविधा के बीच पहुंचने को मजबूर हैं.

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पौआखाली (किशनगंज)से रणविजय की रिपोर्ट.

Kishanganj News: सरकारी योजनाओं के जरिए गांवों में बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के दावे अक्सर किए जाते हैं. लेकिन किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड की रसिया पंचायत में एक सरकारी शवदाह गृह इन दावों की हकीकत बयां कर रहा है. लाखों रुपये की लागत से बनाया गया यह शवदाह गृह आज रख-रखाव के अभाव में बदहाली का शिकार है. परिसर में उगी झाड़ियां, ऊंची घास और गंदगी न केवल इसकी उपयोगिता पर सवाल खड़े कर रही हैं, बल्कि सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न उठा रही हैं.

सम्मानजनक अंतिम संस्कार का सपना, बदहाली में बदला

शवदाह गृह का निर्माण इस उद्देश्य से किया गया था कि ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक स्थान उपलब्ध हो सके. लेकिन वर्तमान स्थिति इसके ठीक विपरीत दिखाई देती है.

स्थानीय निरीक्षण में शवदाह गृह के चारों ओर घनी झाड़ियां और ऊंची घास उगी मिली. लंबे समय से सफाई नहीं होने के कारण पूरा परिसर उपेक्षित नजर आता है. ग्रामीणों का कहना है कि अब यहां सांप-बिच्छुओं का भी खतरा बना रहता है.

अंतिम संस्कार में भी झेलनी पड़ रही परेशानी

स्थानीय लोगों के अनुसार शवदाह गृह की बदहाल स्थिति का सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो अपने परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए यहां पहुंचते हैं.

बरसात के मौसम में झाड़-झंखाड़ और भी बढ़ जाते हैं, जिससे परिसर में आवाजाही मुश्किल हो जाती है. लोगों का कहना है कि ऐसी स्थिति में संवेदनशील मौके पर भी उन्हें असुविधा और भय का सामना करना पड़ता है.

निर्माण हुआ, लेकिन रख-रखाव कौन करेगा?

ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी योजना के तहत भवन तो बना दिया गया, लेकिन उसके बाद रख-रखाव की कोई व्यवस्था नहीं की गई. पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी केवल निर्माण तक सीमित रह गई.

यही वजह है कि धीरे-धीरे यह सार्वजनिक संपत्ति उपयोग से बाहर होती जा रही है.

Kishanganj News: जवाबदेही पर उठे बड़े सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पंचायत स्तर पर हर वर्ष साफ-सफाई और अनुरक्षण के लिए राशि खर्च होती है, तो फिर शवदाह गृह की ऐसी स्थिति क्यों है.

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि क्या संबंधित अधिकारियों ने कभी इस स्थल का निरीक्षण किया? यदि नहीं, तो सरकारी संपत्ति की इस बदहाली की जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

यह मामला केवल एक शवदाह गृह तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सरकारी योजनाओं की भी तस्वीर पेश करता है, जिनका निर्माण तो होता है, लेकिन बाद में उनका संरक्षण और उपयोग सुनिश्चित नहीं किया जाता.

ग्रामीणों ने प्रशासन से की तत्काल कार्रवाई की मांग

रसिया पंचायत के लोगों ने जिला प्रशासन और प्रखंड प्रशासन से शवदाह गृह की तत्काल साफ-सफाई कराने और इसे फिर से उपयोग योग्य बनाने की मांग की है.

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो लाखों रुपये की लागत से बनी यह सरकारी परिसंपत्ति पूरी तरह बेकार हो जाएगी. साथ ही उन्होंने योजना की उपेक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित कर्मियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग उठाई है.

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प्रत्युष प्रशांत

लेखक के बारे में

By प्रत्युष प्रशांत

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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