किशनगंज में गिरते दाम और सख्त नियमों ने बढ़ाई किसानों की चिंता, सीमांचल के मक्का उत्पादकों पर दोहरी मार

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 01 Jun 2026 9:57 AM

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चिंतित किसान

Kishanganj News: मक्का के गिरते दाम और सख्त खरीद नियमों ने बढ़ाई किसानों की टेंशन, क्या मिलेगा फसल का सही मूल्य?

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ठाकुरगंज (किशनगंज). से बच्छराज नखत की रिपोर्ट

Kishanganj News: सीमांचल के मक्का उत्पादक किसानों के सामने इस समय एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. मक्का के बाजार भाव में लगातार गिरावट और खरीद केंद्रों पर गुणवत्ता मानकों की बढ़ती सख्ती ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. खेती की बढ़ती लागत के बीच उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने से किसान आर्थिक दबाव महसूस कर रहे हैं.

पांच दिन में 40 पैसे प्रति किलो टूटा मक्का का भाव

किशनगंज जिले के गलगलिया स्थित रीगल रिसोर्सेस लिमिटेड मक्का खरीद केंद्र ने बीते कुछ दिनों में लगातार खरीद दर घटाई है. मंगलवार को जहां मक्का का भाव 19.20 रुपये प्रति किलोग्राम था, वहीं शुक्रवार को यह घटकर 19.10 रुपये, शनिवार को 19 रुपये, 31 मई को 18.90 रुपये और सोमवार को 18.80 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया.

लगातार गिरते भाव से किसानों की आय पर सीधा असर पड़ रहा है. जिन किसानों ने बेहतर मूल्य की उम्मीद में मक्का रोककर रखा था, उन्हें अब नुकसान की आशंका सता रही है.

अब नमी और गुणवत्ता पर भी सख्त निगरानी

मक्का के दाम घटने के साथ ही खरीद प्रक्रिया में भी कड़े मानक लागू कर दिए गए हैं. कंपनी के नए निर्देश के अनुसार यदि किसी खेप में 24 प्रतिशत से अधिक BDDI पाया जाता है तो पूरा वाहन रिजेक्ट किया जा सकता है. वहीं कुछ बैग निर्धारित मानक से अधिक पाए जाने पर उन्हें अलग श्रेणी में रखकर अस्वीकार किया जाएगा.

नमी की मात्रा को लेकर भी सख्ती बढ़ाई गई है. 15 प्रतिशत तक नमी वाला मक्का स्वीकार किया जाएगा. 16 प्रतिशत तक नमी होने पर विशेष शर्तों के साथ खरीद संभव है, लेकिन इससे अधिक नमी पाए जाने पर मक्का सीधे रिजेक्ट कर दिया जाएगा.

बढ़ती लागत और घटती कमाई का संकट

गलगलिया की यह फैक्ट्री ठाकुरगंज, पौआखाली, टेढ़ागाछ, छत्तरगाछ और आसपास के क्षेत्रों के हजारों किसानों के लिए प्रमुख खरीद केंद्र है. किसानों का कहना है कि बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और कीटनाशकों की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि बाजार भाव नीचे जा रहा है.

कई किसानों का कहना है कि यदि गुणवत्ता मानकों के कारण माल रिजेक्ट होता है तो उन्हें अतिरिक्त आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा. इससे खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है.

बाजार में सुधार की उम्मीद पर टिकी निगाहें

मक्का उत्पादक किसानों की निगाहें अब आने वाले दिनों के बाजार रुख पर टिकी हैं. किसानों को उम्मीद है कि मांग बढ़ने के साथ भाव में सुधार होगा और उन्हें अपनी मेहनत का उचित मूल्य मिल सकेगा. फिलहाल सीमांचल का किसान गिरते दाम और सख्त खरीद नियमों के बीच भविष्य को लेकर चिंतित नजर आ रहा है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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