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छीन रहे बचपन, भारी हो रहे बस्ते

Updated at : 26 Jul 2025 9:00 PM (IST)
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छीन रहे बचपन, भारी हो रहे बस्ते

अधिक कॉपी किताब के ताम झाम नौनिहालों पर भारी पड़ रहा है.

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-अधिक कॉपी किताब के ताम झाम नौनिहालों पर भारी पड़ रहा है.

-होम वर्क के कारण नहीं खेल-कूद पातें हैं बच्चें

-बच्चों के स्वभाव में आ रहा है चिड़चिड़ापन

-बस्ते के बोझ में गुम हो रहा बचपन

प्रतिनिधि, किशनगंजस्कूली बच्चों का नया सत्र प्रारंभ हो चुका है. इसके साथ ही अब बच्चे अपने पिछली कक्षा से डेढ़ गुना अधिक बस्ते का बोझ ढ़ोने लगे हैं. किताबों की संख्या और काफी अधिक परिणाम में कॉपी ने जहां बच्चों की पीठ तोड़ रही है, वहीं अभिभावकों की कमर भी टूटने लगी है. जिले में इन दिनों नामी गिरामी विभिन्न निजी विद्यालयों में स्थिति यही है. जिससे अभिभावकों के समक्ष उहापोह की स्थिति बनी हुई है कि एक ओर जहां सरकारी विद्यालयों में किताबों की संख्या कम है, वहीं निजी विद्यालयों में बस्ते के बोझ ने छात्रों के विकास पर अंकुश लगा दिया है.

विश्व में हो रहे रिसर्च ने तो यह बात स्पष्ट कर दिया है कि बच्चों के विकास में होमवर्क और बस्ते का बोझ बहुत बड़ा बाधक है. रिसर्च में यह भी बताया गया है कि कक्षा चार के नीचे के बच्चों के लिए होमवर्क कम दिया जाए ताकि बच्चों को खेलने-कूदने का पर्याप्त समय मिल सके .

छात्रों को नहीं मिलता खेलने-कूदने का समय

विद्यालयों में होमवर्क का इतना अधिक लोड रहता है कि उनका बचपन कहां खो जाता है, उन्हें भी पता नहीं चलता और धीरे-धीरे उनके स्वभाव में भी परिवर्तन होता दिखता है. और वे बचपन से सीधे एक दबे हुए किशोर में परिवर्तित हो जाते है.

आज की शिक्षा प्रणाली में इनका बचपन कुंठित हो रहा है और शारीरिक और मानसिक विकास कुंद पड़ता जा रहा है.

रोग प्रतिरोधक क्षमता में हो रही है कमी

विशेष रूप से बढ़ते हुए बच्चों में कैल्शियम की कमी और इतने वजन के कारण उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है. कई बीमारियां पनपने लगती हैं. चिकित्सकों की माने तो बच्चे अब कई शारीरिक और मानसिक बीमारियों से जूझने लगे है. कितनों के आंखों पर तो पावर वाले चश्मे भी चढ़ गयें हैं. नस और हड्डी से संबंधित बीमारियों भी बच्चों में होने लगी है. इस संबंध में शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक बतातें हैं कि मानसिक दवाब के कारण बच्चों में अवसाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. इसके साथ ही अधिक वजन से बैकपेन, रीढ़ में कमजोरी, नेकपेन तथा नस से संबंधित बीमारियां हो सकती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AWADHESH KUMAR

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By AWADHESH KUMAR

AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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