किशनगंज शहर के लोहारपट्टी स्थित शिव शक्ति धाम दुर्गा मंदिर में नौ दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है. महोत्सव के चौथे दिन कथा वाचक आचार्य अमन शास्त्री जी महाराज ने कथा के दौरान उन्होंने श्रीराम माता सीता का 14 वर्ष के वनवास का वर्णन किया. श्री आचार्य ने बताया कि राजा दशरथ ने अपने पुत्र श्रीराम को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था, लेकिन उनकी दूसरी पत्नी कैकेयी ने अपने पुत्र भरत के लिए राज्य की मांग की. राजा दशरथ ने कैकेयी के कहने पर श्री राम को 14 वर्षों के लिए वनवास भेज दिया. श्रीराम ने अपने पिता की आज्ञा का पालन किया और वनवास के लिए तैयार हो गए. माता सीता और उनके भाई लक्ष्मण भी उनके साथ वनवास जाने के लिए तैयार हो गए. श्री राम, माता सीता, और लक्ष्मण ने अयोध्या से वनवास के लिए प्रस्थान किया. उन्होंने गंगा नदी को पार किया और चित्रकूट पहुंचे, जहां उन्होंने एक आश्रम बनाया. कथा के दौरान सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचकर श्री राम और माता सीता के विवाह का वर्णन सुनने के लिए उपस्थित हुए. आचार्यअमन शास्त्री जी महाराज के द्वारा राम-सीता के विवाह का वर्णन करने पर माहौल भक्ति में हो गया. श्रद्धालुओं ने राम-सीता के विवाह का वर्णन सुनकर अपने आप को भाग्यशाली माना और आचार्य अमन शास्त्री जी महाराज के प्रति आभार व्यक्त किया.
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