जीवन क्षणभंगुर है, मोह छोड़ भगवान का नाम लें - मुनिश्री डॉ ज्ञानेंद्र

Updated at : 21 Mar 2026 9:45 PM (IST)
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जीवन क्षणभंगुर है, मोह छोड़ भगवान का नाम लें - मुनिश्री डॉ ज्ञानेंद्र

शहर के शिवानंद भवन के चौथे तल्ले पर आयोजित संध्या प्रवचन में मुनि डॉ ज्ञानेंद्र ने जीवन, मृत्यु, मोह व रिश्तों की सच्चाई पर अत्यंत मार्मिक और जागरूकता से भरा संदेश दिया

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ठाकुरगंज शहर के शिवानंद भवन के चौथे तल्ले पर आयोजित संध्या प्रवचन में मुनि डॉ ज्ञानेंद्र ने जीवन, मृत्यु, मोह व रिश्तों की सच्चाई पर अत्यंत मार्मिक और जागरूकता से भरा संदेश दिया. उनके प्रवचन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को झकझोर दिया और आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया. मुनिश्री डॉ ज्ञानेंद्र ने कहा कि जीवन क्षणभंगुर है, मोह छोड़ भगवान का नाम लें. जब तक मनुष्य की सांस चलती है, तब तक वह रिश्तों के नाम और संबोधन में उलझा रहता है. लेकिन वास्तविकता यह है कि सभी रिश्ते आत्मा से जुड़े होते हैं, जबकि मोह शरीर से होता है मनुष्य शरीर को ही सब कुछ मान लेता है, जबकि असली संबंध आत्मा से है. उन्होंने संसार के नियम को स्पष्ट करते हुए कहा कि जब तक व्यक्ति जीवित है, तब तक ही रिश्ते हैं, उसके बाद समय के साथ सब बदल जाता है. इस सत्य को समझने की आवश्यकता पर उन्होंने विशेष जोर दिया. मुनिश्री ने जीवन की सच्चाई को सरल शब्दों में समझाते हुए कहा कि मनुष्य मुट्ठी बंद करके इस संसार में आता है, लेकिन जाते समय सब कुछ छोड़कर मुट्ठी खोलकर चला जाता है. इसके बावजूद मनुष्य जीवन भर मोह और संग्रह में उलझा रहता है. उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य अपनी आत्मा की चिंता कम और अपने बच्चों के भविष्य की चिंता अधिक करता है. बच्चों के भविष्य की चिंता करना स्वाभाविक है, लेकिन अपनी आत्मा के कल्याण को भूल जाना सबसे बड़ी भूल है. मुनिश्री डॉ ज्ञानेंद्र ने मृत्यु के अटल सत्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जो इस संसार में आया है, उसे एक दिन जाना ही है. यमराज से दोस्ती हो सकती है, लेकिन यमराज अपना काम नहीं छोड़ सकते. इस कथन के माध्यम से उन्होंने बताया कि मृत्यु से डरने के बजाय उसे स्वीकार करना ही बुद्धिमानी है. प्रवचन के दौरान उन्होंने मानव जीवन को चेतावनी देने वाले संकेतों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि समय-समय पर शरीर हमें संकेत देता है पहला लेटर-बाल सफेद होते हैं, दूसरा-घुटनों में दर्द, तीसरा- आंखों की रोशनी कमजोर, चौथा-कानों से कम सुनाई देना, पांचवा-दांत गिरना, छठा-हाथ-पैर ढीले पड़ना और शरीर शिथिल होना. उन्होंने बताया कि ये सभी संकेत बताते हैं कि जीवन अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहा है, फिर भी मनुष्य मोह और संग्रह में ही उलझा रहता है. मुनिश्री ने अंत में कहा कि जीवन क्षणभंगुर है, इसे व्यर्थ न गंवाएं. अभी से भगवान का नाम लें, अच्छे कर्म करें और आत्मा के कल्याण के मार्ग पर चलें. इस दौरान महिला श्रद्धालु नीतू नखत ने अपनी मधुर आवाज में भक्ति गीतिका प्रस्तुत की. गीतिका के माध्यम से धर्म, त्याग, संयम और आत्मचिंतन का संदेश प्रस्तुत किया गया. महिला श्रद्धालु की भावपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे सभागार को भक्ति रस में सराबोर कर दिया. प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे.

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