गरीब नवाज एक्सप्रेस बनेगी अमृत भारत, फेरे बढ़ने की खुशी के बीच AC कोच हटने की आशंका से मध्यम वर्ग चिंतित

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गरीब नवाज एक्सप्रेस

Garib Nawaz Express: किशनगंज-अजमेर गरीब नवाज एक्सप्रेस को सप्ताह में तीन दिन से बढ़ाकर छह दिन चलाने और इसे आधुनिक ‘अमृत भारत एक्सप्रेस’ में बदलने के प्रस्ताव ने सीमांचल के रेल यात्रियों को असमंजस में डाल दिया है. एक तरफ जहां ट्रेन की फ्रीक्वेंसी दोगुनी होने से आम यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ नॉन-एसी (स्लीपर-जनरल) प्रारूप वाली अमृत भारत ट्रेन बनने से एसी कोच की सुविधा छिनने का डर सता रहा है.

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Garib Nawaz Express: बिहार के सीमांचल और पूर्वोत्तर भारत को सीधे दिल्ली, जयपुर और अजमेर शरीफ से जोड़ने वाली सबसे लोकप्रिय ट्रेनों में शुमार 15715/15716 किशनगंज-अजमेर गरीब नवाज एक्सप्रेस को लेकर पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. रेलवे बोर्ड को भेजे गए एक नए प्रस्ताव के तहत इस ट्रेन के फेरों को सप्ताह में 3 दिन से बढ़ाकर 6 दिन करने की तैयारी है. इसके साथ ही, इस ट्रेन को पूरी तरह से आधुनिक ‘अमृत भारत एक्सप्रेस’ (Amrit Bharat Express) के नए भगवा-काले रेक (Push-Pull Technology) से रिप्लेस करने का विचार है. इस खबर ने सीमांचल के रेल यात्रियों के बीच एक नया विमर्श छेड़ दिया है—एक तरफ जहां सीटों की मारामारी से जूझते यात्रियों के लिए यह बड़ी खुशखबरी है, वहीं लंबी दूरी का सफर तय करने वाले एसी (AC) श्रेणी के यात्रियों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं.

क्या है पूरा प्रस्ताव और क्यों उड़ी है एसी यात्रियों की नींद?

  • क्या है अमृत भारत की संरचना: अमृत भारत ट्रेनें पूरी तरह से ‘नॉन-एसी’ (Non-AC) श्रेणी के यात्रियों को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई हैं. इसमें केवल 22 कोच होते हैं, जिनमें मुख्य रूप से द्वितीय श्रेणी स्लीपर (Sleeper) और सामान्य अनारक्षित (General) बोगियां शामिल होती हैं. इसमें एसी-3 टायर, एसी-2 टायर या फर्स्ट एसी का कोई प्रावधान नहीं है.
  • एसी कोच हटने का डर: यदि गरीब नवाज एक्सप्रेस को पूरी तरह से अमृत भारत रेक में बदला जाता है, तो वर्तमान में चल रहे तमाम एसी कोच हटा दिए जाएंगे. ऐसे में सीमांचल से राजस्थान और दिल्ली की 24 से 30 घंटे की लंबी दूरी तय करने वाले बुजुर्गों, मरीजों और मध्यमवर्गीय परिवारों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा.

पक्ष और विपक्ष के तर्क; प्रवासियों और मध्यम वर्ग के बीच बंटा जनमत

सीटों की कमी बनाम प्रीमियम सुविधा: इस नए प्रस्ताव को लेकर सीमांचल के रेल उपयोगकर्ताओं, दैनिक यात्रियों और व्यापारिक संगठनों के बीच राय बंटी हुई नजर आ रही है, जिसे नीचे दी गई तुलनात्मक तालिका से समझा जा सकता है:

पक्ष में तर्क (समर्थक)विपक्ष में तर्क (आलोचक/पीड़ित)
यात्री क्षमता में भारी वृद्धि: अमृत भारत रेक में स्लीपर और जनरल बोगियों की संख्या अधिक होने से प्रतिदिन यात्रा करने वाले प्रवासियों और मजदूरों को आसानी से कंफर्म टिकट मिल सकेगा.सुविधा छीनने जैसा कदम: आलोचकों का कहना है कि सेवा विस्तार और फेरे बढ़ाने के नाम पर लंबी दूरी की ट्रेन से एसी की प्रीमियम सुविधा को पूरी तरह खत्म कर देना न्यायसंगत नहीं है.
सप्ताह में 6 दिन परिचालन: वर्तमान में 3 दिन चलने के कारण इस ट्रेन में भारी वेटिंग लिस्ट रहती है. 6 दिन चलने से राजस्थान और उत्तर भारत जाने वाले छात्रों व व्यापारियों को नियमित कनेक्टिविटी मिलेगी.मध्यम वर्ग पर आर्थिक बोझ: एसी बोगियां हटने से संपन्न या मध्यमवर्गीय यात्रियों को विवश होकर अन्य वीआईपी ट्रेनों में भारी-भरकम किराया देना होगा या फिर मजबूरी में स्लीपर में सफर करना पड़ेगा.

“सीमांचल अब सिर्फ मजदूरों का इलाका नहीं”; रेलवे से मिक्स्ड रेक की मांग

स्थानीय रेल यात्रियों और नागरिक मंचों का तर्क है कि सीमांचल (पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज) अब केवल प्रवासी मजदूरों का क्षेत्र नहीं रहा है, बल्कि यहां शिक्षा, व्यवसाय और स्वास्थ्य के क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ है, जिससे एक बड़ा मध्यम और उच्च-मध्यम वर्ग तैयार हुआ है जो प्रीमियम रेल यात्रा की मांग करता है.

यात्रियों ने पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के महाप्रबंधक (GM) और रेल मंत्रालय को सुझाव दिया है कि किशनगंज-अजमेर रूट की संवेदनशीलता और भारी डिमांड को देखते हुए, या तो अमृत भारत एक्सप्रेस में विशेष तौर पर 4 से 6 एसी कोच जोड़ने की अनुमति (मिश्रित रेक व्यवस्था) दी जाए, अथवा इस ट्रेन को परंपरागत एलएचबी (LHB) रेक के साथ ही सप्ताह में 6 दिन चलाया जाए.

रेलवे बोर्ड का अंतिम फैसला अभी बाकी:

राहत की बात यह है कि यह योजना फिलहाल केवल एक आंतरिक प्रस्ताव (Proposal) के स्तर पर है, जिस पर अंतिम मुहर और तकनीकी स्वीकृति रेलवे बोर्ड (नई दिल्ली) से मिलनी बाकी है. अब देखना दिलचस्प होगा कि रेलवे बोर्ड सीमांचल के आम यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए नॉन-एसी क्षमता बढ़ाता है या फिर मध्यम वर्ग की जायज मांग का सम्मान करते हुए एसी बोगियों को बरकरार रखने का कोई बीच का रास्ता (वैकल्पिक व्यवस्था) निकालता है.

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दिव्यांशु प्रशांत

लेखक के बारे में

By दिव्यांशु प्रशांत

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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