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पंचायतों के चयन के विकल्प वाली स्थानांतरण नीति में सुधार की मांग

महिला शिक्षिकाओं ने निवास वाले पंचायत और पदस्थापित पंचायत छोड़ कर प्रखंड के दस अन्य पंचायतों के चयन के मिले विकल्प वाली स्थानांतरण नीति में सुधार की मांग की है.

ठाकुरगंज. ठाकुरगंज की सक्षमता पास महिला शिक्षिकाओं ने निवास वाले पंचायत और पदस्थापित पंचायत छोड़ कर प्रखंड के दस अन्य पंचायतों के चयन के मिले विकल्प वाली स्थानांतरण नीति में सुधार की मांग की है. सोमवार को इस मामले में महिला शिक्षिकाओं ने कहा कि वर्तमान स्थानांतरण नीति में कई कमियां हैं, जो शिक्षकों के कार्य व जीवन संतुलन को बाधित करती हैं और उनके पेशेवर विकास में अवरोध उत्पन्न करती हैं. इन कमियों को दूर करने के लिए सरकार को पहल करनी चाहिए. शिक्षक संगठनों के साथ मिलकर कई परिवर्तन की जरूरत है . इस बाबत कई महिला शिक्षिकाओं हेमंती लाहिड़ी, प्रिया सुमन, पिंकी कुमारी, रिंकी कुमारी, मीना, बेनजीर आदि ने कहा कि सरकार महिला शिक्षिकाओं के साथ अन्याय कर रही है.

महिला शिक्षकों को कार्यस्थल का चयन करने में कई चुनौतियां

इस बाबत महिला शिक्षिकाओं ने बताया कि महिला शिक्षकों के लिए वर्तमान व्यवस्था में कार्यस्थल का चयन करने में कई चुनौतियां आ रही हैं. महिला शिक्षिकाओं को पंचायत के बदले विद्यालय चयन का विकल्प मिलना चाहिए. महिलाओं को उनके पदस्थापित विद्यालय के बदले जिस पंचायत में वे निवास कर रही है, चाहे वह नगर पंचायत ही क्यों नहीं हो उसके सहित दस अन्य विद्यालयों का चयन करने का विकल्प मिलना चाहिए, ताकि वे अपनी व्यक्तिगत और पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन सुगमता से कर सकें.

सिंगल महिला संग तलाकशुदा महिलाओं की उपेक्षा

इस मामले में मुखर होकर महिला शिक्षकों ने कहा कि एक तरफ सरकार कहती है वह इस स्थानातरण नीति में उसने गंभीर रोग, मानसिक समस्या से ग्रसित शिक्षकों को प्राथमिकता दी है. सिंगल महिला और विडो और तलाकशुदा महिलाओं को भी इसका लाभ प्राथमिकता के आधार पर मिलेगा, ऐसी नीति बनाई है लेकिन ऐसा कहीं दिखता नहीं है. महिलाओं को लेकर भी जो कंडीशन दिया गया है, उसमें उन्हें न तो अपना नगर निकाय या पंचायत, न पति का नगर निकाय, न ही वर्तमान पोस्टिंग वाले जगह पर होगी, तो फिर उन्हें क्या फायदा हुआ.

शहरी क्षेत्र में हो पोस्टिंग

इस मामले में महिला शिक्षिकाओं ने कहा कि विशिष्ट शिक्षकों की नियुक्ति शहरी क्षेत्र में होनी चाहिए. इस मामले में तत्कालीन अपर मुख्य सचिव के पत्र को नजरअंदाज कर नये सिरे से नये-नये प्रयोग दिग्भ्रमित करने को पर्याप्त हैं. आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थिति बन जाती है कि अपर मुख्य सचिव पद पर आने वाले नये अधिकारी बगैर गहन विमर्श के ही अपने पूर्व के अधिकारी के आदेश को पलटने में जल्दबाजी कर जाते हैं.

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Prabhat Khabar News Desk
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